UP Election: सपा-रालोद गठबंधन ने 27 'अपराधियों' को क्यों बांटे टिकट? अब बचाव में कही ये बात
लखनऊ, 19 जनवरी। कोरोना वायरस संकट के बीच उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। बीजेपी के खिलाफ इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) को राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) का साथ मिला है। गठबंधन के बाद अब दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा किया जा रहा है। इस बीच गंठबंधन ने उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें कुल 36 लोगों का नाम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सभी में से 27 उम्मीदवार किसी न किसी आपराधिक मामलों में लिप्त हैं।

अपने उम्मीदवारों का बचाव करते हुए सहयोगी दलों ने कहा कि इन्हें टिकट देना इसलिए उचित है क्योंकि इन्होंने पिछड़े लोगों और कोरोना संकट में सामाजिक कार्य किया। पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हस्तिनापुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार योगेश वर्मा के लिए पार्टी ने कहा, उन्हें हस्तिनापुर के लोगों द्वारा चुना गया है और और उनके खिलाफ सभी मामले जनहित और राजनीतिक कानूनों से संबंधित हैं। वर्मा 2007 में इस सीट से सपा विधायक थे, 2017 में आम और 2019 में बुलंदशहर लोकसभा सीट से चुनाव हार गए थे।
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बता दें कि भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने पार्टियों को यह निर्देश दिया है कि उन्हें अपने उम्मीदवारों के बारे में जनता को बताना होगा कि आपराधिक मामलों के बावजूद उन्हें टिकट क्यों दिया गया है। वहीं, भाजपा ने माह के मंगलवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सहित 107 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची में से 25 ऐसे उम्मीदवारों की सूची जारी की जो किसी केस का सामना कर रहे हैं या उनके खिलाफ पहले कोई केस था। बीजेपी ने उनका बचाव करते हुए कहा था कि उनके उम्मीदवारों को 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण' कानूनी दांव-पेंच का सामना करना पड़ा था।












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