कोरोना वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर में यूपी को नहीं मिला रिस्पॉन्स, एक बार फिर से बढ़ाई डेट
लखनऊ, 1 जून। कोरोना वायरस की दूसरी लहर से बुरी तरह जूझने वाले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार वैक्सीनेशन को लेकर कोई कसर नहीं रखना चाह रही है। देश में वैक्सीन की कमी के बाद 4 करोड़ वैक्सीन की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी किया लेकिन वैक्सीन की मुश्किल हल होती नजर नहीं आ रही है। यूपी को अभी तक अंतरराष्ट्रीय वैक्सीन निर्माताओं से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है जिसके चलते प्रदेश सरकार ने एक बार टेंडर के लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख बढ़ाने का फैसला किया है।

द प्रिंट की खबर के मुताबिक योगी सरकार ने ग्लोबल टेंडर की आखिरी तारीख बढ़ाकर 10 जून कर दी है। यह दूसरा मौका है जब बोलियों को खोलने के लिए अंतिम तारीख बनाई गई है। यूपी स्टेट मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं से टीके खरीदने के लिए 5 मई को ग्लोबर टेंडर डारी किया था। आरंभ में 21 मई को बोली खोलने की योजना बनाई गई थी जिसे पहले 31 मई और अब 10 जून के लिए बढ़ा दिया गया है।
30 जून तक 1 करोड़ टीकाकरण का लक्ष्य
योगी सरकार ने 30 जून तक प्रदेश में एक करोड़ लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। यही नहीं एक जून से प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी 75 जिलों में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन शुरू किया है। जाहिर है सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश का टीकाकरण करने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में है जिन्होंने सबसे पहले वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था।
प्रिंट ने राज्य सरकार में उच्च आधिकारिको स्रोतों के हवालों से बताया है कि वैक्सीने के ग्लोबल टेंडर की तकनीकी बोली खोलने की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। सरकार को बोली में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी के निर्माताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट में भी छूट
सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं को बोली में शामिल होने के लिए जमा राशि और वैक्सीन के तापमान को लेकर भी छूट जारी की थी। पहले वैक्सीन निर्माताओं को 16 करोड़ रुपये जमा करने और टीकों को 2 से 8 डिग्री के बीच रखने की अनिवार्यता थी। नए नियमों के तहत सिक्योरिटी डिपॉजिट को 8 करोड़ किया गया जबकि उन वैक्सीन निर्माताओं को भी अनुमति द जिनकी वैक्सीन को माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर स्टोर और पहुंचाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक ऐसा फाइजर जैसी कंपनियों के लिए किया गया है जिनकी वैक्सीन को स्टोर करने के लिए अत्यधिक कम तापमान की आवश्यकता होती है। हालांकि यह ढील भी कंपनियों के साथ डील करवा पाने में नाकाम रही है।












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