सीएम योगी ने नैमिषारण्य धाम पहुंचे, जगदंबा मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में लिया हिस्सा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सीतापुर के नैमिषारण्य धाम पहुंचे। यहां उन्होंने श्री श्री जगदंबा राजराजेश्वरी मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर भी पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के इस अवसर पर नूतन देवालय के प्रमुख द्वार का उद्घाटन भी संपन्न हुआ। नैमिषारण्य धाम अपने पुरातन-सनातन वैभव को पुन: प्राप्त कर रहा है। पूज्य संतों, श्रद्धालुओं व जनपद वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हजारों वर्ष पहले भगवान वेद व्यास के सानिध्य में हजारों ऋषियों ने नैमिषारण्य धाम में साधना की थी।
हम सबके लिए जाति-पाति, पंथ से उठकर हम सबको देश के बारे में सोचना चाहिए। मैं धार्मिक इसलिए हूं क्योंकि मुझे देश के लिए काम करना है। देश हमारे लिए सबसे पहले है। मेरी साधना इसलिए है कि वो देश के हित में लगे, मेरा वैभव इसलिए कि वो देश के हित में लगे। जिस दिन भारत का हर व्यक्ति इस भाव के साथ काम करने लगे, याद रखना भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करने से कोई रोक नहीं सकता है। हम सबको उस दिशा में आगे बढ़ना होगा।

देश की व्यवस्था को, समाज की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए, लोक कल्याण के पथ पर उन्मुक्त करने के लिए जिस देवी का हम आह्वान करते हैं वह देवी जगदम्बा है। उनकी स्थापना का कार्य नैमिष में हुआ है। नैमिष तीर्थ को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। काशी में महाकाल, काशी में विश्वनाथ धाम को जिस तरह से भव्य स्वरूप दिया गया है। पहले जब वहां लोग जाते थे तो उन्हें पतली गलियों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। केदारनाथ और बद्रीनाथ में भी पुनरुद्धार का कार्य चल रहा है। अयोध्या का तो कहना ही क्या, जहां 500 साल के बाद यह अवसर आया है, जब कोटि-कोटि सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को संबल प्राप्त हुआ है।
भगवान राम की मर्यादा का पालन करते हुए, कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए भारतवासियों ने जिस संयम का परिचय दिया है, वह दुनिया के लिए एक अनोखा उदाहरण है। आज वो दर्जनों पीढ़ियां जिनके मन में अभिलाषा थी कि हम भी राम लला के दर्शन करेंगे, वो दुनिया छोड़कर चले गए, लेकिन हमारी पीढ़ि सौभाग्यशाली है कि हमने प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को देखा है, राम लला को विराजमान होते देखा है। यह सभी कुछ ना कुछ अच्छे कार्य हो रहे हैं। इन अच्छे कार्यों से हमे प्रेरणा लेनी चाहिए।












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