महादेवी वर्मा की जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने पोस्ट करके लिखा प्रख्यात कवयित्री, छायावाद की दीपशिखा, 'पद्म विभूषण' महादेवी वर्मा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!
बता दें कि महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। वह हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। कवि निराला ने उन्हें हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती तक कहा था। महादेवी वर्मा ने आजादी के पहले के भारत के साथ आजादी के बाद का भी भारत देखा है। उनकी लेखनी में हर वह भाव नजर आते हैं जो समाज की असल तस्वीर को पेश करते हैं।

महज 7 वर्ष की आयु में ही महादेवी वर्मा ने लिखना शुरू कर दिया था। उनकी लेखनी में दुख, पीड़ा नजर आती है, इन भावों को उन्होंने काफी करीब से देखा है। अहम बात यह है कि उनकी रचनाओं में विषाद का वह भाव नहीं है जो आपको कुंठित करे बल्कि संयम और त्याग की भावना प्रबल होती है। उन्होंने लिखा की मैं नीर भरी दुख की बदली, विस्तृत नभ का कोई कोना, मेरा कभी न अपना होना। परिचय इतना, इतिहास यही, उमड़ी थी कल आज मिट चली।
महादेवी वर्मा महान कवयित्री के साथ गद्यकार भी थीं। उन्होंने नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत, दीपशिखा, यामा और सप्तपर्णा शामिल है। महादेवी वर्मा का विवाह नवाबगंज के वरुण नारायण वर्मा से हुआ था। लेकिन बावजूद इसके उन्होंने संन्यासिनी का जीवन व्यतीत किया। उन्होंने पूरी जिंदगी सफेद कपड़े पहने। उन्होंने कभी श्रृंगार नहीं किया। पति की मौत के बाद वह स्थायी रूप से इलाहाबाद में रहने लगीं थीं।












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