कांशीराम की जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि, बताया लोकप्रिय राजनेता
बहुजन नायक के नाम से लोकप्रिय कांशीराम की जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा, दलितों, वंचितों और शोषितों के अधिकारों तथा उनके समग्र विकास के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले लोकप्रिय राजनेता कांशीराम की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
बता दें कि कांशीराम का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रूपनगर में हुआ था। बहुजन समाज, पिछड़ा वर्ग, दलितों की आवाज को उठाने के लिए कांशीराम जीवन पर्यंत संघर्ष करते रहे। वर्ष 1984 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था। उन्होंने पार्टी की कमान मायावती को सौंपी थी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदेश की कमान संभाली थी।

शुरुआती जीवन में कांशीराम पुणे में एक्सप्लोसिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब में काम करते थे। यहां पर उन्होंने पिछड़ी जाति के साथ भेदभाव को महसूस किया और फिर वो एक्टिविस्ट बन गए। शुरुआती दौर में काशीराम ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया का समर्थन किया, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के साथ आरपीएफ की नजदीकी बढ़ी उसके बाद उन्होंने आरपीआई से दूरी बना ली।
वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण के बाद लम्बे समय तक तिरस्कृत व बिखरे पड़े उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान कारवाँ को देश की राजनीति में नई मजबूती व बुलन्दी देने का युगपरिवर्तनीय कार्य करने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी को 90वें जन्मदिन पर अपार श्रद्धा-सुमन।
बामसेफ, डीएस4 व बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कर उसके अनवरत संघर्ष के जरिए यूपी में सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके 'बहुजन समाज' हेतु 'सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक तरक्की' का जो मिशनरी लक्ष्य उन्होंने प्राप्त किया वह ऐतिहासिक एवं अतुलनीय, जिसके लिए वे बहुजन नायक बने व अमर हो गए।
उनकी विरासत, संघर्ष व कारवाँ को पूरे तन, मन, धन के सहयोग से आगे बढ़ाने का संकल्प जारी रखते हुए बीएसपी को अब यहां हो रहे लोकसभा आमचुनाव में अच्छा रिज़ल्ट दिलाना उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जो समतामूलक समाज की स्थापना व महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी आदि के विरुद्ध भी योगदान होगा।
कांशीराम ने आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से दलित अधिकारों को आगे बढ़ाने की कल्पना की। उन्होंने बामसेफ की स्थापना की। और सशक्त दलित आर्थिक रूप से स्वतंत्र, सामाजिक रूप से जागरूक और आध्यात्मिक रूप से जागृत हैं। यह दलितों और अन्य वंचित समूहों का पहला कैडर-आधारित संगठन बन गया और इसका उद्देश्य व्यापक एकजुटता स्थापित करना था।
इसने हाशिए पर रहने वाले समुदायों द्वारा सामना की जाने वाली आर्थिक असमानताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम किया। इन मुद्दों को उजागर करके और उन्हें संबोधित करने के लिए नीतियों और कार्यक्रमों की वकालत करके, BAMCEF ने आर्थिक सशक्तिकरण के बारे में बातचीत में योगदान दिया।












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