Bullet Train भी इसके आगे फेल! जापान में CM योगी ने परखी 600 की टॉप स्पीड, महज 10 मिनट में 100 KM का सफर तय
CM Yogi Travelled in High Speed Train Maglev: सीएम योगी आदित्यनाथ इन दिनों जापान के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने जापान की विश्व प्रसिद्ध SC Maglev (सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव) ट्रेन का टेस्ट राइड लिया। इस हाई-स्पीड ट्रेन ने अपनी तेज रफ्तार से मुख्यमंत्री को प्रभावित किया।
ट्रेन की खासियत यह है कि यह पटरी से करीब 100 मिमी ऊपर हवा में तैरती हुई चलती है। मुख्यमंत्री ने इस डेमोंस्ट्रेशन रन के दौरान ट्रेन की स्मूद, साइलेंट मूवमेंट और लेटेस्ट सेफ्टी फीचर्स का अनुभव किया। मुख्यमंत्री इस हाई-स्पीड ट्रेन की तकनीक और रफ्तार को देखकर काफी उत्सुक नजर आए। उन्होंने इस सफर के दौरान महज 10 मिनट में 100 किमी की अविश्वसनीय दूरी तय की।

जापान के यमनशी प्रांत में जापानी सरकार और वहां के गवर्नर का आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व पीएम शिंजो आबे के उस सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत और जापान तकनीक के जरिए एक-दूसरे के करीब आएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'मुझे बहुत खुशी है कि जापानी सरकार और यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर जापान और भारत के बीच संबंधों को मज़बूत करने और पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।'
IIT कानपुर बनेगा 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'
परिवहन के साथ-साथ सीएम योगी ने क्लीन एनर्जी और एकेडमिक एक्सीलेंस के क्षेत्र में सहयोग पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार ने IIT कानपुर को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के तौर पर विकसित करने के लिए एक बड़ा प्रोग्राम शुरू किया है। उनका विश्वास है कि ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, प्रधानमंत्री मोदी के उत्तर प्रदेश को ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाने के मिशन में मील का पत्थर साबित होगी।
जिस मैग्लेव ट्रेन का मुख्यमंत्री ने अनुभव लिया, वह पूरी तरह चुंबकीय शक्ति (Magnets) पर आधारित है। इसमें पटरियों और ट्रेन के बीच घर्षण (Friction) शून्य होता है, जिससे यह 600 km/h से भी अधिक की गति प्राप्त कर लेती है।
जापान की मैग्लेव (SC Maglev) ट्रेन की चौंकाने वाली खासियतें:
- सुपरफास्ट स्पीड: इस ट्रेन की सामान्य गति 500 किमी/घंटा है, जबकि इसने 603 किमी/घंटा की रफ्तार का विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
- हवा में लेविटेशन: यह ट्रेन पटरी से लगभग 100 मिमी (4 इंच) ऊपर उठकर चलती है, जिससे यह पूरी तरह शोरमुक्त और कंपन रहित हो जाती है।
- टेक-ऑफ तकनीक: शुरुआत में यह रबर के टायरों पर चलती है, लेकिन जैसे ही रफ्तार 150 किमी/घंटा के पार पहुंचती है, यह अपने आप हवा में उठ जाती है।
- सुपर कूलिंग सिस्टम: इसके सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स को -269 डिग्री सेल्सियस के बेहद कम तापमान पर लिक्विड हीलियम के जरिए ठंडा रखा जाता है।
- अनोखी बनावट (L0 सीरीज): ट्रेन का अगला हिस्सा (Nose) बहुत लंबा बनाया गया है ताकि टनल में घुसते समय हवा के दबाव और शोर को कम किया जा सके।
- सुरक्षा और स्थिरता (Security and stability): इसमें 'फिगर-8' कॉइल्स का उपयोग होता है, जो किसी भी आपात स्थिति में ट्रेन को ट्रैक के केंद्र में बनाए रखते हैं और गिरने नहीं देते।
बुलेट ट्रेन vs मैग्लेव: क्या है असली फर्क?
- चलने का तरीका: बुलेट ट्रेन सामान्य ट्रेनों की तरह लोहे के पहियों पर पटरी से सटकर चलती है। वहीं, मैग्लेव ट्रेन में पहिए नहीं होते, यह चुंबकीय शक्ति (Magnets) के सहारे पटरी से करीब 4 इंच ऊपर हवा में तैरते हुए दौड़ती है।
- रफ्तार की जंग: बुलेट ट्रेन की टॉप स्पीड आमतौर पर 320-350 किमी/घंटा होती है। इसके मुकाबले मैग्लेव 600 किमी/घंटा की तूफानी रफ्तार पकड़ सकती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज ट्रेन बनाता है।
- शोर और झटका: चूंकि मैग्लेव पटरी को छूती तक नहीं, इसलिए इसमें रगड़ (Friction) नहीं होती। इस वजह से यह सुपर-साइलेंट है और इसमें सफर के दौरान बिल्कुल भी झटके महसूस नहीं होते।
- रखरखाव: पटरी और पहियों के बीच कोई रगड़ न होने की वजह से मैग्लेव में टूट-फूट बहुत कम होती है, जिससे लंबे समय में इसकी देखरेख का खर्च कम हो जाता है।
- ऊंची चढ़ाई में माहिर: मैग्लेव अपनी पावरफुल मैग्नेटिक तकनीक की वजह से बुलेट ट्रेन के मुकाबले ऊंची चढ़ाई और ढलानों को कहीं ज्यादा तेजी और आसानी से पार कर लेती है।
नोट- इस आर्टिकल में AI इनपुट शामिल है।












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