फिराक गोरखपुरी की पुण्यतिथि पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि
जानेमाने साहित्यकार फिराक गोरखपुरी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करके श्रद्धांजलि अर्पित की है।
मुख्यमंत्री ने पोस्ट करके लिखा, साहित्य जगत के देदीप्यमान नक्षत्र, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी भाषा के मूर्धन्य विद्वान, विश्व विख्यात शायर, 'पद्म भूषण' रघुपति सहाय 'फिराक गोरखपुरी' को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि! उनकी कालजयी रचनाओं से गोरखपुर और प्रदेश को देश-दुनिया में एक विशिष्ट पहचान मिली।

बता दें कि फिराक गोरखपुरी का वास्तविक नाम रघुपति सहाय था। उनका जन्म 28 अघस्त 1896 में गोरखपुर में हुआ था। वह महान कवि, लेखक, आलोचक थे। उर्दू शायरी और कविता के लिए फिराक गोरखपुरी विख्यात थे। उन्हें पद्म भूषण, ज्ञानपठ पुरस्कार, साहित्य अखादमी पुरस्कार से सम्मानदि किया गया था।
फिराक गोरखपुरी का विवाह प्रसिद्ध जमींदार विन्देश्वरी की बेटी किशोरी देवी से हुआ था। फिराक कला स्नातक में प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया था और इसके बाद वह आईसीएस में चुने गए थे। लेकिन 1920 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और स्वराज आंदोलन में कूद गए। वह डेढ़ वर्ष तक जेल में भी रहे। इसके बाद वह पंडित नेहरू के कार्यकाल में कांग्रेस के दफ्तर में अवर सचिव रहे। लेकिन नेहरू जी के यूरोप जाने के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया। इसके बाद वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में वह अंग्रेजी के अध्यापक रहे।
फिराक गोरखपुरी ने गुल-ए-नगमा नाम का लोकप्रिय कविता संग्रह लिखा था।फिराक गोरखपुरी को 1960 में उर्दू में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1968 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। वह ऑल इंडिया रेडियो के प्रोड्यूसर-एमेरिटस भी थे। उर्दू साहित्य के दिग्गज जोश मलीहाबादी ने फिराक गोरखपुरी को मीर तकी मीर और मिर्जा गालिब के बाद उर्दू का महान शायर बताया था।
फिराक गोरखपुरी भारत में उर्दू साहित्य की एक किंवदंती हैं। लंबी बीमारी से जूझने के बाद 1982 में उनका निधन हो गया। उनकी जीवनी, जिसका शीर्षक फिराक गोरखपुरी: द पोएट ऑफ़ पेन एंड एक्स्टसी है जोकि 2015 में प्रकाशित हुई थी और इसे उनके भतीजे अजय मानसिंह ने लिखा था।












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