BSP News: चंद्रशेखर को काउंटर करने के लिए मायावती ने चला आकाश आनंद का दांव?
BSP Chief Mayawati News: उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सामने कई बड़ी चुनौतियां। चुनाव दर चुनाव गिरता जनाधार और दलितों की पार्टी से बढ़ती दूरी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। उपर से पश्चिमी यूपी में चंद्रशेखर उर्फ रावण जैसे दलित नेता जो दलित युवाओं में आइकन के तौर पर उभर रहे हैं उनके लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल भी उनके वोट बैंक में सेंध लगाने की फिराक में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो चंद्रेशखर को काउंटर करने के लिए ही मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को आगे किया है।

मायावती की ओर से संकेत मिलने के तुरंत बाद ही बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। पार्टी प्रमुख मायावती ने रविवार को ही राज्य इकाई कार्यालय में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बैठक में उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी नामित किया था।
आकाश आनंद ने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि,
पार्टी प्रमुख मायावती ने देश में दलित-शोषित और वंचित समाज के विकास के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की विचारधारा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाऊंगा। बहुजन समाज पार्टी एक मिशन है, और हमें इसे देश के हर कोने में ले जाना है। मैं सभी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस यात्रा में सभी युवा साथियों का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आपसे जुड़ना चाहता हूं, आपके साथ चलना चाहता हूं, क्योंकि सामाजिक न्याय की यह लड़ाई बहुत लंबी है।
इस बीच, भीम आर्मी प्रमुख चंद्र शेखर आज़ाद ने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित करने के मायावती के फैसले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अपने सोशल मीडिया अकांउट एक्स पर लिखा है कि, "भीम राव अंबेडकर ने कहा था, "पहले, राजा रानी के गर्भ से पैदा होता था, लेकिन अब मैंने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि राजा अब रानी के गर्भ से नहीं, बल्कि मतपेटी से पैदा होगा।"
एक्स पर बसपा प्रमुख के पहले के बयान को पोस्ट करते हुए, चंद्रशेखर ने कहा:
एक सार्वजनिक बैठक में बोलते हुए, मायावती ने कहा था कि जब काशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को इस पार्टी की नींव रखी थी, तो उन्होंने परिवार और रिश्तेदारों को राजनीति से दूर रखने का फैसला किया था। राजनीति में निस्वार्थ भाव से कुछ करें। मैं अपने परिवार को भी राजनीति से दूर रखूंगी।
राजनीतिक विष्लेषक राजीव रंजन सिंह ने वनइंडिया से बातचीत में कहा कि, " आकाश को बसपा की खोई हुई जमीन वापस लाने के लिए अपने आपको साबित करना होगा। हो सकता है मायावती कई कारणों की वजह से आकाश आनंद को फ्रंट पर लेकर आई हैं लेकिन 2012 में सत्ता से हटने के बाद पिछले एक दशक में पार्टी के अभियान को काफी झटका लगा है। 2024 का लोकसभा चुनाव आकाश के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी। इस चुनाव के लिए उनको कई राज्यों का प्रभारी बनाया गया है।"
दरअसल, आकाश हाल ही में संपन्न हुए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और राजस्थान विधानसभा चुनावों में बसपा के प्रभारी थे। बसपा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में अपना खाता खोलने में विफल रही है जबकि उसे राजस्थान में दो सीटें मिलीं। पार्टी को छत्तीसगढ़ में 2.09%, राजस्थान में 1.82%, एमपी में 3.32% और तेलंगाना में 1.38% वोट मिले।
रंजन कहते हैं कि, "भीम आर्मी प्रमुख चंद्र शेखर आज़ाद के अलावा दलित समुदाय के बीच भाजपा भाजपा की बढ़ती पैठ भी आकाश के लिए एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि बीजेपी को लग रहा है कि दलित वोट बैंक उनके पास आ रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई नेताओं को आगे किया है जिसका फायदा भी उन्हें मिलता दिख रहा है।"
हालांकि लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव ने आकाश आनंद को आगे करने के पीछे और वजहें बतायीं। उन्होंने कहा कि
मायावती ने यूपी-उत्तराखंड का प्रभार अपने पास रखते हुए आकश को अन्य राज्यों की जिम्मेदारी पकड़ायी है। हालांकि इसमें दूसरा पहलू ये है कि मायावती ने आकाश को कहीं ऑन पेपर अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाया यानी उन्होंने सिर्फ कार्यकर्ताओं को एक मैसेज देने का प्रयास किया है कि उनकी अनुपस्थिति में आकाश ही पार्टी का काम देखेंगे।
श्रीवास्तव कहते हैं, ''शायद ऐसा करके मायावती आकाश आनंद पर परोक्ष रूप से अपना नियंत्रण रखना चाहती हैं। वह एक झटके में कुछ भी देना नहीं चाहतीं। यूं तो आकाश के पास पहले से ही कई राज्यों का प्रभार था और वह पार्टी के एक अहम सदस्य के तौर पर काम कर रहे थे और वही काम वो अभी भी करते रहेंगे। यानी मायावती आकाश आनंद को खुला नहीं छोड़ना चाहतीं।''












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