टल सकता है फूलपुर-गोरखपुर लोकसभा का उपचुनाव, ये है BJP का गणित
इलाहाबाद। यूपी की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा के लिये होने वाला उपचुनाव टल सकता है। भाजपा के लगातार उपचुनाव की तिथियों को पीछे ढकेलने के कारणों की जब हमने पड़ताल की तो यह साफ हो गया कि भाजपा की पहली गणित यही है कि किसी तरह से लोकसभा सीट का उपचुनाव टल जाए। क्योंकि भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन और शक्तिवर्धन का मौका नहीं देना चाहती। ऐसे में यह रास्ता सबसे उपयुक्त होगा। सबसे बड़ी बात तो यह है कि उपचुनाव को टाला जाना संभव है और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अभी तक उसी ढर्रे पर आगे बढ़ रहा है।

ये रहे उपचुनाव के नियम
हमने इस बारे में वरिष्ठ अधिवक्ता व राजनैतिक विशेषज्ञ सूर्य नारायण मिश्र से बात की और लोकसभा चुनाव को टाल सकने के वैधानिक पहलुओं को जानने की कोशिश की। तो उन्होंने कई चौंकाने वाली जानकारी दी जो मौजूदा समय में भाजपा की रणनीति का हिस्सा नजर आ रही है। पहले ये नियम समझ ले, सब समझ जाएंगे ...
1 - सांसद के इस्तीफे के बाद 6 महीने का समय मिलेगा चुनाव कराने के लिये।
2 - एमएलसी पद की शपथ लेने के बाद 14 दिन का समय होगा सांसद पद से इस्तीफा देने के लिये।
3 - लोकसभा अध्यक्ष कम से कम 15 दिन का समय ले सकता है। किसी सांसद के इस्तीफे को स्वीकार करने में।
4 - केंद्र सरकार चाहे तो समय से पहले लोकसभा चुनाव करवा सकती है।
5 - अगर उपचुनाव और मुख्य चुनाव में एक साल का ही अंतराल हो तो चुनाव आयोग उपचुनाव स्थगित कर देता है।

कैसे टल सकता है उपचुनाव
राजनैतिक विशेषज्ञ सूर्य नारायण मिश्र बताते हैं कि अगर लोकसभा का चुनाव समय से पहले कराए जाए तो उपचुनाव नहीं होगा। यानी 2019 में तय उपचुनाव कुछ महीने पहले 2018 में हो तो उपचुनाव नहीं होगा। लोकसभा का उप चुनाव रोकने की कवायद तो पहले से ही चल रही है। इसीलिये एकदम डेडलाइन पर सांसद रहे योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य को एमएलसी बनाया गया। अब जब 18 को शपथ ग्रहण होना है तब फिर से सीएम योगी और केशव को 15 दिन का वक्त इस्तीफा देना के लिये मिल जाएगा। यानी अक्टूबर में इस्तीफा होगा। इस्तीफा जब लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के पास पहुंचेगा उस वक्त भी इस्तीफा स्वीकार नहीं होगा। बल्कि बतौर अध्यक्ष वह भी 15 दिन का समय इस्तीफा स्वीकार करने में व्यय करेगी। इस तरह से नवंबर महीने में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट खाली हो जायेगी। ये भी पढ़ें- फूलपुर और गोरखपुर टेस्ट में भाजपा फेल, कौन बनेगा अब खेवनहार?

उपचुनाव का पूरा गुणा-गणित
लोकसभा सीट खाली होने के बाद यहां चुनाव कराने के लिए 6 महीने का वक्त होगा। यानी अप्रैल-मई 2018 तक का समय सरकार के पास होगा। इसके बाद भी गुणा गणित खत्म नहीं होती। बल्कि फिर शुरू होती है। दरअसल उपचुनाव अगर एक साल के अंदर प्रस्तावित होता है तब चुनाव आयोग उपचुनाव स्थगित कर देता है। अगर महीनों पर नजर डाले तो लगभग अक्टूबर-नवंबर 2018 तक केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव कराए तो यह उपचुनाव टल जाएगा। इस रणनीति को बल इसलिये भी मिल रहा है। क्योकि दोनों सीटों पर कोई कद्दावर प्रत्याशी भाजपा की जीत को सुनिश्चित नहीं कर रहा। ऐसे में पीएम मोदी अपनी राजनैतिक समझ का इस्तेमाल कर विरोधियों को उपचुनाव के बहाने बाहुबली नहीं बनने देना चाहेंगे।












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