फूलपुर और गोरखपुर टेस्ट में भाजपा फेल, कौन बनेगा अब खेवनहार?
मुश्किल अब यह है कि भाजपा के ये दोनों कद्दावर चेहरे चुनाव मैदान में नहीं है। इनकी जोड़ का कोई चेहरा भी भाजपा के लिये नहीं है।
इलाहाबाद। यूपी विधानसभा चुनाव में जब दलबदलुओं को टिकट दिया जा रहा था, उसी वक्त भाजपा ने साफ कर दिया था कि भाजपा टिकट पार्टी से जुड़ाव पर नहीं, जीत के निर्धारित मानक को पूरा करने वालों को मिलेगा। भाजपा का वही टेस्ट उपचुनाव में भी शुरू हो गया है और पार्टी जुड़ाव वालों के लिये फिर से अच्छे संकेत नहीं हैं। दरअसल गोरक्षपीठ से जुड़ी गोरखपुर लोकसभा और नेहरू परिवार से जुड़ी फूलपुर लोकसभा सीट पर चुनावी सरगर्मी शुरू हो गई है। देश को पहला प्रधानमंत्री देने वाली फूलपुर लोकसभा एक बार फिर चुनाव के लिये तैयार हो रही है।
मोदी लहर पर सवार केशव मौर्य ने पहली बार फूलपुर सीट पर भगवा लहराया है जबकि गोरखपुर सीट का तो भाजपा के लिये योगी आदित्यनाथ का चेहरा ऐतिहासिक समीकरण रहा है लेकिन अब यहां उपचुनाव में भी कमल खिला रहेऐसे समीकरण भाजपा बनाने में जुटी है। मुश्किल अब यह है कि भाजपा के ये दोनों कद्दावर चेहरे चुनाव मैदान में नहीं हैं। इनकी जोड़ का कोई चेहरा भी भाजपा के लिये नहीं है। अभी तक भाजपा ने इन दोनों स्थानों पर ग्राउंड समीक्षा कराई तो दूसरे किसी नाम पर टेस्ट पाजिटिव नहीं मिला है।

बदला हैं ट्रेंड
दरअसल पिछले कुछ वर्षों में चुनाव का बुनियादी उसूल बदला है। पार्टी प्रत्याशी के जनता पर असर और पकड़ का पता लगाने के बाद ही टिकट फाइनल करती है। यानी कि राजनीतिज्ञों द्वारा यूपी की नब्ज टटोलने का शोध चल रहा है। दो पंचवर्षीय पूर्व विधान सभा चुनाव में पहले मायावती फिर मुलायम सिंह ने सही नब्ज पकड़ी और पूर्ण बहुमत में आये। लेकिन लोकसभा चुनाव से असली नब्ज तो भाजपा ने पकड़ी है जो बदस्तूर विधानसभा चुनाव में भी जारी है। लेकिन असली मुश्किल तो अब उप चुनाव में है। भाजपा की नाक दो सीटों पर अटकी हैं। यह कोई साधारण सीटें नहीं हैं और इनका प्रभाव सीधे लोकसभा चुनाव को पर पड़ेगा। भाजपा नहीं चाहती कि इन सीटों पर कोई कोताही बरते। इसलिये कद्दावर प्रत्याशी की तलाश पिछले 6 महीने से जारी है। लेकिन भाजपा के टेस्ट में अभी तक कोई खरा नहीं उतर सका है।

भाजपा के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं!
भाजपा ऐसे चेहरों की तलाश कर रही है। जो सीएम योगी और केशव मौर्य की कमी को पूरी कर सके। पर भाजपा ने इन सीटों पर कभी दूसरे चेहरे को उभरने का मौका ही नहीं दिया। नतीजतन भाजपा खुद नहीं समझ पा रही कि उपचुनाव में टिकट किसे दिया जाय। दरअसल दावे और टिकट की लाइन में दर्जन भर प्रत्याशी फूलपुर लोकसभा से हैं। इनके पोस्टर बैनर भी लग चुके हैं। लेकिन समस्या वही है कि बाहरी लोगों को यहां कि जनता क्यों स्वीकार करेगी। खुद केशव मौर्य का कार्यकाल फूलपुर लोकसभा में अच्छा नहीं रहा है। उनके गोद लिये गांव तक में हालात बदतर हैं। यह बात भाजपा नेतृत्व को भी पता है। इसलिये टिकट देने से पहले वह सारे संभावित प्रत्याशियों को ग्राउंड पर भेज रही है। उनकी रिपोर्ट कार्यकर्ताओ से ली जा रही है। स्थानीय नेतृत्व ने तो पहले ही साफ कर दिया है। अभी तक कोई भी खरा नहीं उतरा है। सब टेस्ट में फेल हैं।

आ सकता है बाहरी
भाजपा के स्थानीय नेतृत्व में इस बात की पुष्टि हैं कि पार्टी किसी बाहरी को मैदान में उतार सकती है क्योंकि विधान सभा चुनाव में भी बाहरी प्रत्याशी ही जीत कर हावी हुये थे। उस वक्त भी दल-बदलुओं का विरोध हुआ और इस बार भी होगा लेकिन विरोध सिर्फ सैद्धांतिक ही रहेगा। कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी फिर से जीत की इबारत लिखने की होगी। भाजपा कोशिश कर रही है कि दूसरे दल से आया प्रत्याशी अपना खुद का वोट बैंक लेकर आयेगा जो भाजपा के पारंपरिक वोट के साथ मिलकर जीत दर्ज कर सकता है।
हो रही है मॉनिटरिंग
आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में भी यह ललकार कहते हैं कि उनकी राजनैतिक क्षमता को कोई कम न आंके। वह कहते हैं कि वह जीतने के लिये समीकरण बनाते हैं और विपक्ष उन्हे हराने की कोशिश करता है। अब जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की विधान परिषद की सदस्यता पक्की हो गयी है। ऐसे में लोकसभा सदस्यता से इनका इस्तीफा भी तय है। शपथ ग्रहण के 14 दिनों के भीतर दोनों इस्तीफा देंगे। उसके बाद बिगुल उपचुनाव का बजेगा। तो विपक्ष फिर से भाजपा को इन दोनों सीटों पर हराने का प्रयास करेगा। लेकिन भाजपा जो समीकरण बना रही है। उसमें हो सकता हैं कि विपक्ष का कद्दावर चेहरा ही भाजपा का उम्मीदवार हो।












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