भड़काऊ भाषण मामले में बढ़ सकती है योगी आदित्यनाथ की मुश्किल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बढ़ सकती है मुश्किल, भड़काऊ भाषण मामले में कोर्ट ने मामले को चलाए जाने की अनुमति दी है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति नहीं दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दिए जाने से इंकार किए जाने के खिलाफ जो याचिका दायर की गई थी उसपर सुनवाई करने के लिए कोर्ट ने याचिका को मंजूर कर लिया है।

इलहाबाद हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने यूपी सरकार की आपत्ति के खिलाफ याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि वह इस मामले पर सुनवाई करेगी, मामले की सुनवाई 9 अगस्त को होगी। इस मामले पर सोमवार को सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की काफी फजीहत हुई।
सरकार के वकीलों में मतभेद
दरअसल जब यह मामला कोर्ट में उठा कि जब प्रदेश सरकार किसी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दे तो क्या मजिस्ट्रेट इसपर सुनवाई कर सकता है। इस पर यूपी के अडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल व वरिष्ठ वकील अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि मजिस्ट्रेट सरकार के आदेश को खारिज करके मामले की सुनवाई कर सकता है और उसके पास इस बात का अधिकार होता है।
कोर्ट ने पूछा किसकी दलील मानें
लेकिन तभी यूपी के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने अपने सहयोगियों की दलील को गलत ठहराते हे कहा कि मजिस्ट्रेट को इस बात का अधिकार नहीं है। सरकार की ओर से वकीलों के तर्कों में मतभेद के बाद कोर्ट ने कहा कि पहले आप लोग फैसला कर लीजिए कि कोर्ट को किस की दलील को मानना है।
2007 में भड़का था दंगा
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता परवेज परवाज और असद हयात ने इस मामले में याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस एसी शर्मा की डिवीजन बेंच ने की। आपको बता दें कि 27 जनवरी 2007 को गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। इस दंगे में दो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
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भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
जिसके बाद भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ व राधा मोहन दास अग्रवाल, तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी पर रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, जिसके चलते यहां दंगा भड़क गया था। घटना के बाद योगी आदित्यनाथ सहित तमाम नेताओं पर आईपीसी की धारा 153 A व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।












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