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अद्भुत संयोग : पचास साल पहले अटल जी जब दीनदयाल उपाध्याय का अस्थि कलश लेकर आए थे प्रयाग

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    इलाहाबाद। भारत रत्न व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन आज भी उनकी यादें ढेरों बूढ़ी काया के जेहन में सहेजी हुई हैं। आज से 50 साल पहले सन 1968 में अटल जी भी एक अस्थि कलश लेकर संगम नगरी आए थे और आज खुद उन का अस्थि कलश प्रयागराज लाया गया है। तब अटल जी राजनीति के पुरोधा व जनसंघ की धुरी रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अस्थि कलश लेकर आए थे। आज अटल जी की अस्थि जनसंघ की नवीन पीढ़ी में बदली सतारूढ बीजेपी लेकर आई है। आज प्रयागराज में अटल जी का अस्थि कलश पहुंचा तो उसे देखकर उम्र के जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर पहुंच चुके कई जर्जर काया वाले व्यक्तित्व की यादें ताजा हो उठी और अनायास ही उन्होंने पांच दशक पुराने उस दिन की यादें मीडिया कर्मियों से साझा की। अतीत की उन यादों को साझा किया है व्रतशील शर्मा, श्याम कृष्ण पांडेय आदि ने। आप भी पढ़ें अटल जी का वह दौरा-

    अद्भुत संयोग : पचास साल पहले अटल जी जब दीनदयाल उपाध्याय का अस्थि कलश लेकर आए थे प्रयाग

    नंगे पैर चल रहे थे अटल जी
    फरवरी, 1968 में अटल जी जब प्रयाग आए तब किशोरावस्था की ओर बढ़ रहे इलाहाबाद के व्रतशील शर्मा अपने पिता पं. रमादत्त शुक्ल के साथ बड़े हनुमान जी के मंदिर के पास खड़े थे। वह बताते हैं कि हनुमान जी के दर्शन के बाद वे बांध पर आकर खड़े हो गए और उन्हें पता नहीं था कि यहां कोई आने वाला है। अचानक सामने एक जुलूस आता हुआ दिखता है और जुलूस के सबसे आगे नंगे पैर चल रहा शख्स कोई और नहीं बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी थें।

    अटल जी को पहली बार देखा, लेकिन उस ओजस्वी तेज के वशीकरण से वह हमेशा के लिये वशीभूत हो गए। बेहद ही गमगीन माहौल में उस वक्त हवा भी मानो बह रही थी। एक झोंके के साथ अटल जी पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का अस्थि कलश लेकर संगम की ओर जुलूस के साथ चले गए। पिताजी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय और वहां मौजूद लोगो के बारे में बताया और फिर मुझे साथ लेकर वह संगम तट तक गएं। जहां हमने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

    संघ कार्यालय में हुई थी सभा
    1968 में जब अटल बिहारी वाजपेयी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अस्थियां लेकर प्रयागराज पहुंचे तो ट्रेन से उतरने के बाद वह सीधा महाजनी टोला स्थित मोतीमहल के संघ कार्यालय पहुंचे। इस दिन को याद कर श्याम कृष्ण पांडेय बताते हैं कि उस दिन संघ कार्यालय में डॉ. मुरली मनोहर जोशी, पूर्व संघ प्रमुख रज्जू भैया, अशोक सिंहल जैसे कद्दावर नेता पहले से मौजूद थे।

    यहीं पर श्रद्धांजलि सभा हुई और फिर एक विशाल जुलूस में अस्थि विसर्जन के लिये कारवां पैदल ही संगम की ओर बढ़ा। रास्ते में कई जगह लोग बड़ी संख्या में पुष्पांजलि देकर कृतज्ञता व्यक्त करते रहे थे और आखिरीबार संगम तट पर सर्वदलीय शोकसभा हुई। उस समय बहुत अधिक साधन की उपलब्धता नहीं थी । लेकिन, अस्थि विसर्जन के लिए इलाहाबाद जिला प्रशासन द्वारा मोटर बोट उपलब्ध कराई गई। जिस पर बैठकर अटलजी गंगा जमुना के मिलन स्थल पर पहुंचे और अस्थियों का विसर्जन किया।

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    English summary
    before 50 years ago when atal bihari vajpayee came in allahabd to take bone's of deen dayal upadhyay up

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