बांगरमऊ उपचुनाव: फिर से जीतकर साख पर लगा दाग धोना चाहेगी भाजपा
लखनऊ। यूपी की बांगरमऊ विधानसभा सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी है। यह सीट बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर को सजा मिलने के बाद खाली हुई थी। इसलिए बांगरमऊ उपचुनाव जीतकर बीजेपी साख पर लगा दाग धोना चाहेगी। कुलदीप सेंगर को लेकर बीजेपी को उसी तरह बदनामी झेलनी पड़ी थी जिस तरह हमीरपुर से बीजेपी विधायक अशोक चन्देल को सजा मिलने के बाद पार्टी की बदनामी हुई थी। हालांकि पिछले साल अक्टूबर में हुए उपचुनाव में हमीरपुर से बीजेपी के युवराज सिंह विजयी हुए। बीजेपी ने इस सीट को बरकरार रख दाग धो डाला था। इस बार बांगरमऊ में भी बीजेपी जीत दोहरा कर दाग धोना चाहेगी। बांगरमऊ में सबसे कठिन परीक्षा बीजेपी की है। मतदाता किसी भी चुनाव में सत्तारूढ़ दल के कामों से संतुष्ट नहीं रहता। ऊपर से माखी काण्ड की बदनामी भी कहीं न कहीं असर दिखाएगी। यहाँ के उलझे हुए जातीय समीकरण को देखते हुए बीजेपी को सपा से कड़ी टक्कर मिलने की सम्भावना है।

भाजपा ने जीत के लिए खेला पिछड़ा कार्ड
भाजपा समेत 10 प्रत्याशियों ने नामांकन के अंतिम दिन पर्चा दाखिल किया। इस तरह कुल 16 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है। भाजपा उम्मीदवार श्रीकांत कटियार के नामांकन के समय सांसद हरि साक्षी महाराज मौजूद थे लेकिन कहा जा रहा है कि श्रीकांत कटियार साक्षी महराज की पसंद नहीं हैं। लेकिन बांगरमऊ उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी 49 वर्षीय श्रीकांत कटियार की छवि साफ़ सुथरी है और उन पर कोई आपराधिक मामला भी नहीं चल रहा। उनके पास लगभग 72 लाख की चल, अचल संपत्ति है। उन्होंने 2019-20 में दाखिल आयकर रिटर्न में 2.43 लाख की आय दिखाई है। साफ़ छवि के कारण ही लंबे मंथन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीकांत कटियार को बांगरमऊ उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किया। बांगरमऊ में मुस्लिम मतदाताओं को अगर अलग कर दें तो पिछड़ी जाति के मतदाताओं की कुल संख्या सबसे ज्यादा है। इसी लिए पिछड़ा कार्ड खेलते हुए भाजपा ने श्रीकांत कटियार को चुनाव मैदान में उतारा है। बांगरमऊ के कस्बा टोला निवासी श्रीकांत कटियार 2012 से 2016 तक भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं।

बांगरमऊ से अब तक कोई महिला नहीं जीती
बांगरमऊ से अब तक कोई महिला विधानसभा में नहीं पहुंच सकी है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने पूर्व गृहमंत्री गोपीनाथ दीक्षित की बेटी आरती बाजपेई को टिकट दिया है। बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र में अब तक हुए 14 चुनावों में पांच बार महिलाएं भी मैदान में उतर चुकी हैं। चुनाव में महिलाओं को कभी जीत नहीं मिली। महिलाओं के चुनावी मैदान में उतरने की शुरुआत 1980 के विधानसभा चुनाव में हुई। उस समय जय देवी वर्मा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरी थी। तब कांग्रेस के दिग्गज नेता गोपीनाथ दीक्षित और राघवेंद्र सिंह भी मैदान में थे। जय देवी को मात्र 428 वोट ही मिल सके और उन्हें 10वें नंबर पर संतोष करना पड़ा। 1989 में फिर जय देवी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप से चुनावी मैदान में उतरीं। फिर उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। 305 वोट पाकर वह 9वें स्थान पर रहीं। वर्ष 1993 के चुनाव में अपूर्णा सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाने मैदान में उतरी। उन्हें भी जनता ने महत्व नहीं दिया। परिणामस्वरूप 387 वोट पाकर 12वें स्थान पर रहीं। 2012 में आशारानी ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उन्हें 1244 वोट मिले थे और वह 8वें स्थान पर रही थीं।

सपा प्रत्याशी सुरेश पाल पर चल रहे कई केस
इसके पहले भी 2007 में कांग्रेस के टिकट पर आरती बाजपेई बांगरमऊ से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। इस चुनाव में उन्हे 13375 वोट मिले थे। वह चौथे स्थान पर रही थीं। 2012 के चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। इस पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 17098 वोट हासिल किए। उनके पिता को जनता ने वर्ष 1969, 1980, 1985 और 1991 में बांगरमऊ से ही जिताकर विधानसभा भेजा था। वह प्रदेश सरकार में गृहमंत्री तक रहे, लेकिन बेटी को जनता ने एक भी मौका नहीं दिया। हालांकि इस बार उपचुनाव में कांग्रेस ने फिर से आरती बाजपेई पर ही भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है।
बांगरमऊ से सपा के प्रत्याशी 59 वर्षीय सुरेश पाल हैं। वो बीजेपी प्रत्याशी से अधिक मालदार हैं। उनके पास नौ करोड़ की चल-अचल संपत्ति है। उनके खिलाफ कानपुर चकेरी थाने में मारपीट, जालसाजी समेत अन्य धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं और कोर्ट में विचाराधीन हैं।

बांगरमऊ सीट पर जातिगत समीकरण
फोटो- बसपा प्रत्याशी महेश पाल
बांगरमऊ विधान सभा क्षेत्र का जातीय समीकरण भी बहुत उलझा हुआ है। यहाँ मोटे तौर पर करीब 3 लाख 60 हजार मतदाता हैं। सबसे ज्यादा करीब 66 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। इसके बाद करीब 51 हजार निषाद, लोधी, 41 हजार अनुसूचित जाति/जनजाति के मतदाता, फिर करीब 39 हजार ब्राह्मण, 26 हजार क्षत्रिय, 25 हजार यादव, 17 हजार बाल्मीकि, 16 हजार पाल, 14 हजार कुर्मी और शेष में अन्य मतदाता हैं। ऐसे में जिस प्रत्यशी के पक्ष में दो बड़ी संख्य वाली जाति के मतदाताओं का ध्रुविकरण जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। गैंगरेप मामले में सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर की विधानसभा सदस्यता जाने के बाद बांगरमऊ उपचुनाव में बीजेपी इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
बांगरमऊ के चुनावी मैदान में अभी 16 योद्धा
बीजेपी- श्रीकांत कटियार
सपा- सुरेश पाल
कांग्रेस - आरती वाजपेयी
बसपा- महेश पाल
(बाकी अन्य छोटे दलों के प्रत्याशी हैं)
-
IPL 2026 के बीच क्रिकेट जगत में पसरा मातम, सचिन के पहले शतक के 'असली हीरो' का निधन! शराब ने डुबोया करियर -
Iran America War: ईरान ने Amazon पर किया हमला, बहरीन का उड़ाया डेटा सेंटर, क्यों है बेहद खतरनाक? -
'16 की उम्र में क्लब के बाहर 20 रु. में खुद की CD बेची', Dhurandhar के इस बड़े स्टार का सच, यूं बदली किस्मत -
New Rules from 1 April 2026: 'LPG के दाम से लेकर ATM के चार्ज तक', आज से बदल गए ये 7 बड़े नियम -
Neha Sharma Exclusive Content: बिहार पूर्व MLA की बेटी की क्या मजबूरी? ₹299 में बेच रहीं एक्सक्लूसिव Photos -
Sonali Bendre Caste: पंजाबी गोल्डी की आंखों में बसने वाली सोनाली बेंद्रे की क्या है जाति? -
Assam Polls 2026: असम में फिर खिलेगा 'कमल 'या 'पंजा' करेगा कमाल? ताजा सर्वे ने बताई किसको कितनी सीटें? -
भारत में बनेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, 1 लाख दर्शक क्षमता, अहमदाबाद को टक्कर देने की तैयारी -
US-Israel-Iran War: Khamenei के सलाहकार Kamal Kharazi पर एयर स्ट्राइक, पत्नी की मौत, कितने हैं बच्चे? -
Ex IPS Shivdeep Lande: 'तुमने मुझे झकझोर दिया', कौन हैं लांडे? क्यों हुए बीवी के सामने नतमस्तक? -
AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से क्यों हटाया? किसे दी जगह? पार्टी की कोई नई रणनीति?- समझें -
'यहां पैसा कम मिलता है,' एडम जैम्पा ने IPL को लेकर दिया विवादित बयान, PSL की सैलरी से पकड़ा गया झूठ












Click it and Unblock the Notifications