Bahujan Samaj Party: 2024 से पहले युवा लीडरशिप उभारने की कवायद में जुटेगी BSP, चुनावी राज्यों पर फोकस

Bahujan Samaj Party में युवा लीडरशिप की कमी अब बसपा की मुखिया मायावती को खलने लगी है। इस कमी को पूरा करने के लिए मायावती ने सभी राज्यों की इकाइयों को युवा नेतृत्व उभारने पर जोर देने को कहा है।

मायावती

UP News: उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की हार ने बसपा सुप्रीमो मायावती को झकझोर कर रख दिया है। मायावती ने अब सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि युवाओं को मौका देकर आगे लाने का प्रयास करें। पार्टी की अहम जिम्मेदारियों पर इनको रखा जाए ताकि समय रहते पार्टी में नई लीडरशिप खड़ी हो सके। हालांकि बसपा का फोकस उन चुनावी राज्यों पर भी है जहां आने वाले समय में विधानसभा के चुनाव होने हैं।

युवा नेतृत्व को आगे लाना समय की मांग

पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी की विभिन्न राज्य इकाइयों के पदाधिकारियों से कहा है कि बसपा में युवाओं को सामने लाना अब समय की मांग है। पार्टी अब उनको अहम जिम्मेदारियां देगी ताकि उन्हें समय रहते निखारा जा सके। पार्टी के सूत्रों ने बताया कि अब नेताओं का मनना है कि बसपा नेताओं की एक नई पीढ़ी खड़ा करने की जरुरत है। ज्यादातर बड़े नेता या तो पार्टी छोड़कर जा चुके हैं या फिर काम करने लायक नहीं रह गए हैं। ऐसे में युवा लीडरशिप को आगे लाने का प्रयास होना चाहिए।

पार्टी के भीतर युवाओं को उभारने की चुनौती

हालांकि पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे युवा नेता की कमी है जो पार्टी के भीतर एक उदाहरण पेश कर सके। मायावती के भतीजे और बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद जरूरत के मुताबिक मौके पर नजर नहीं आ रहे हैं। इसलिए उनकी प्रासंगिकता भी समाप्त होती जा रही है। आनंद युवाओं को भी नहीं जोड़ पा रहे हैं। अब उन्हें युवा प्रतिभाओं को मौका देकर सामने लाने को कहा गया है।

मायावती ने समीक्षा बैठक में दिए थे निर्देश

बसपा की मुखिया मायावती ने रविवार को हिमाचल प्रदेश, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में पार्टी इकाइयों में पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। यूपी में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा की गई थी। समीक्षा बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी जिसमें अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव भी शामिल है। इस चुनाव को लेकर मायावती अब गंभीर हो गई हैं क्योंकि इसमें ज्यादा समय नहीं बचा है।

लोकसभा से पहले चुनावी राज्यों पर फोकस

बसपा का ध्यान लोकसभा 2024 के चुनावों पर है और वह अपनी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखना चाहती है। लेकिन इससे पहले पार्टी 2023 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है।

एक पार्टी पदाधिकारी ने कहा कि ,

यूपी में अभी भी मुस्लिम वोटों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जैसा कि समीक्षा बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं को बताया गया था। अन्य राज्यों को मुसलमानों, दलितों और ओबीसी तक पहुंचने के लिए अपनी रणनीति पर काम करना होगा। बसपा पूर्व में कम से कम 15 राज्यों में चुनाव लड़ चुकी है।

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