रामलला के 'चोरों' से वकीलों ने फेरा मुंह! 8 आरोपियों की कस्टडी आज खत्म, अब कानूनी मदद मिलना मुश्किल
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी और हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की मुश्किलें सोमवार को काफी बढ़ सकती हैं। इस बड़े मामले में लोकल वकीलों ने कड़ा रुख अपना लिया है, जिससे अब आरोपियों को स्थानीय स्तर पर कानूनी मदद मिलना नामुमकिन लग रहा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने फैसला किया है कि उनका कोई भी वकील कोर्ट में इन आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा।
बार एसोसिएशन की तरफ से सोमवार सुबह बुलाई गई एक जरूरी मीटिंग में इस फैसले पर आखिरी मुहर लगा दी जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि सोमवार को ही इन सभी आरोपियों की तीन दिन की न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) भी खत्म हो रही है। कोर्ट में पेशी और पुलिस रिमांड की अर्जी पर सुनवाई से ठीक पहले वकीलों का यह सामूहिक फैसला आरोपियों के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर अयोध्या के वकीलों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। वकीलों का मानना है कि आस्था के सबसे बड़े केंद्र और रामलला के चढ़ावे में हेराफेरी करके न सिर्फ चोरी की गई है, बल्कि करोड़ों भक्तों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई गई है। बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने साफ किया कि लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने वाले इस काम के विरोध में ज्यादातर वकील इन आरोपियों की पैरवी नहीं करना चाहते।
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लोकल वकीलों में कितना गुस्सा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ सीनियर वकील अब प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सीनियर वकील राजेंद्र चौधरी ने कहा कि इस घटना से दुनियाभर में अयोध्या का नाम खराब हुआ है, इसलिए आरोपियों पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनके खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, वकील विवेक कुमार सिंह का कहना है कि आरोपियों को सीधे कोर्ट ले जाने की जगह पहले जनता के सामने लाया जाना चाहिए था।
कौन हैं ये आरोपी और अब तक क्या-क्या मिला?
राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के आरोप में पुलिस ने जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, वे सभी मंदिर के अंदर चढ़ावे के पैसों की गिनती का काम करते थे। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। इन लोगों पर मंदिर में आने वाले सोने-चांदी, नगद रुपए और दूसरी कीमती चीजों की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप है।
एसआईटी (SIT) की शुरुआती जांच के बाद यूपी पुलिस ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने सभी आठ आरोपियों के ठिकानों पर छापे मारकर करीब 79.85 लाख रुपये नगद बरामद किए हैं। इसके अलावा, इनके पास से कई संपत्तियों और जमीनों के कागज भी मिले हैं। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या ये जमीनें मंदिर के चोरी के पैसों से ही खरीदी गई थीं।
इन सभी के खिलाफ कानून की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें साजिश रचने, चोरी का माल छुपाने और भरोसा तोड़ने जैसी धाराएं शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें एंटी करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार विरोधी कानून) की धाराएं भी जोड़ी गई हैं, ताकि आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके। सोमवार को पुलिस कोर्ट से इन आरोपियों की लंबी रिमांड मांगेगी ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
सीसीटीवी फुटेज और मंदिर ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर 24 सेकंड का एक सीसीटीवी फुटेज वायरल हो गया। इस वीडियो में पुलिसवाले आरोपी अविनाश शुक्ला को एक सफेद गाड़ी में बैठाते दिख रहे हैं और उसके हाथ में एक काला बैग नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि इस बैग में चोरी के पैसे थे। यह घटना पांच जून की बताई जा रही है, जिसने जांच टीम के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पैसों के इस हेरफेर की भनक काफी पहले लग गई थी। पांच जून को ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कहने पर कुछ अधिकारी पुलिस के साथ आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंचे थे, जहां से बड़ी रकम मिली थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी बरामदगी होने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से उस समय तुरंत पुलिस में शिकायत (FIR) दर्ज नहीं कराई गई थी।
एसआईटी जांच में सुरक्षा और देखरेख की बड़ी कमियां आई सामने
यह मामला तब देशभर में चर्चा में आया जब सात जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा और चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब होने की जांच की मांग की। विपक्ष के दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपी सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यों वाली स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाकर मामले की पूरी जांच के आदेश दिए।
एसआईटी ने अपनी पहली जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दे दी है। इस रिपोर्ट में राम मंदिर के अंदर सुरक्षा और पैसों के हिसाब-किताब को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चढ़ावे के मैनेजमेंट, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और कर्मचारियों के बैकग्राउंड की जांच में बड़ी लापरवाही बरती गई। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक के कुछ प्राइवेट (आउटसोर्स) कर्मचारियों पर भी शक की सुई घूम रही है, जिन्हें एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था।
फिलहाल, सोमवार का दिन इस पूरे मामले के लिए काफी अहम होने वाला है। एक तरफ जहां बार एसोसिएशन की मीटिंग में यह तय होगा कि आरोपियों को वकील मिलेंगे या नहीं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और एसआईटी की टीम कोर्ट से आरोपियों की रिमांड लेकर इस पूरी चोरी के पीछे का सच सामने लाने की कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाएगी।
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