Vat Purnima 2026: वट पूर्णिमा आज, क्या है कथा? नोट करें पूजा सामग्री
Vat Purnima 2026: आज सुहागिनों का प्रिय व्रत वट पूर्णिमा है, इस दिन महिलाएं वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करके अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह व्रत श्रद्धा, संयम और त्याद का प्रतीक है। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'वट वृक्ष की पूजा से जीवन में स्थिरता, सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।'

वट पूर्णिमा की पूजा सामग्री
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा/चित्र
- कलश
- गंगाजल
- दीपक और घी
- धूप और अगरबत्ती
- चंदन
- रोली और अक्षत
- तुलसी दल
- पीले और लाल पुष्प
- मौसमी फल
- पंचामृत
- नारियल
- मिठाई या खीर
- चावल
- कपूर
वट पूर्णिमा व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत रूपवान, बुद्धिमान और पतिव्रता थीं। उन्होंने स्वयंवर में सत्यवान को अपना पति चुना। हालांकि महर्षि नारद ने पहले ही बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम है और विवाह के एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। इसके बावजूद सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं और सत्यवान से विवाह कर लिया। विवाह के बाद जब सत्यवान की मृत्यु का दिन आया, तब सावित्री ने कठोर व्रत और उपवास रखा। वह अपने पति के साथ जंगल गईं, जहां लकड़ी काटते समय सत्यवान अचानक मूर्छित हो गए और उन्होंने सावित्री की गोद में ही प्राण त्याग दिए। उसी समय मृत्यु के देवता यमराज उनके प्राण लेकर चल पड़े। सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चलने लगीं।
सावित्री ने यमराज से मांगा 100 पुत्रों की मां बनने का वरदान
यमराज ने उन्हें वापस लौटने को कहा लेकिन सावित्री नहीं मानी, तब सावित्री की निष्ठा, ज्ञान और धर्मयुक्त वचनों से प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा, जिस पर उन्होंने उनसे सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा, जो कि यमराज ने दे दिया, इसके बाद सावित्री ने कहा कि बिना पति के ये वरदान कैसे फलित होगा। तब यमराज को स्मरण हुआ कि बिना सत्यवान के जीवित हुए यह वरदान पूरा नहीं हो सकता। अपनी भूल का एहसास होने पर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद दिया।
वट पूर्णिमा के दिन बरगद के पेड़ की पूजा होती है
ये सब का साक्षी वट वृक्ष था, इसलिए तभी से वट पूर्णिमा के दिन बरगद के पेड़ की पूजा होने लगी। विवाहित महिलाएं वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं। वट वृक्ष को दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख, समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना पूर्ण होने का विश्वास है।














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