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BHU में हो रही शैक्षणिक माहौल खराब करने की कोशिश ?, जानिए क्यों आया अलगाववाद का जिक्र

वाराणसी, 2 मई : उत्तर प्रदेश के काशी में स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रों का एक समूह परिसर में एक छात्रावास के बाहर "आपत्तिजनक" पोस्टर चिपकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। यह ग्रुप 28 अप्रैल से रोजाना विरोध प्रदर्शन कर रहा है। हालांकि वामपंथी विचारधारा से प्रेरित छात्र संगठन भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीसीएम), जिसका नाम इस विवाद में सामने आया है। उसने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस मामले में उनका हाथ नहीं है। हालांकि बीएचयू प्रशासन ने इस मामले में लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है और कहा है कि पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और परिसर का माहौल खराब करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।

बीएचयू

कश्मीर में अलगाववाद के समर्थन में लगाए गए थे पोस्टर

शिकायत में कहा गया है कि हिंदी में लिखे गए नारे कश्मीर और अन्य जगहों पर अलगाववाद का समर्थन करते हैं और ब्राह्मणवाद के विश्वविद्यालय को खत्म करने का आह्वान करते हैं। इस बीच, विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने नारा लिखने के लिए "अज्ञात व्यक्तियों" के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। कुलपति सुधीर कुमार जैन द्वारा गर्ल्स हॉस्टल में आयोजित इफ्तार पार्टी में शामिल होने पर विवाद के बाद आया है।

27 अप्रैल को छात्रावास की दीवार पर लगे थे पोस्टर

विरोध कर रहे छात्रों के मुताबिक 27 अप्रैल की रात एक छात्रावास के बाहर दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए थे। बीसीएम ने 28 अप्रैल को यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर को एक शिकायत सौंपी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इसे बदनाम करने के लिए इन नारों के साथ उसका नाम लिखा गया था। बीसीएम सचिव अनुपम कुमार ने पत्र में कहा कि यह कुछ तत्वों द्वारा उन्हें बदनाम करने की साजिश थी, जिन्होंने पहले अंबेडकर जयंती मनाने और ब्राह्मणवाद के खिलाफ बोलने के लिए उनके कार्यकर्ताओं पर हमला किया था।

एबीवीपी

एबीवीपी और वामपंथी संगठन ने लगाया एक दूसरे पर आरोप

अनुपम ने कहा, "हमने 28 अप्रैल को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के लिए धरने की योजना बनाई थी, जिन्होंने पहले हमारे दो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की थी। हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले के पीछे उन लोगों ने ये नारे लिखे। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने वालों के संबंध आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से हैं।

आरोपियों के खिलाफ सख्त हुआ प्रशासन

एबीवीपी परिसर सचिव पुनीत मिश्रा ने कहा कि प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्र किसी छात्र संगठन से नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बीसीएम लेखन में शामिल था और उसके सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एबीवीपी किसी भी तरह से प्रदर्शन में शामिल नहीं है। बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह ने कहा, "अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ लंका पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शैक्षणिक माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर विश्वविद्यालय के अधिकारी नजर रखे हुए हैं।

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