अटल जी के गुरु का घर जहां उन्होंने 8 महीने रहकर सीखा राजनीति का पाठ

कानपुर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं है उनके निधन होने से देश में शोक की लहर दौड़ गई है। कानपुर का एक परिवार भी उनके निधन से काफी दुखी है। यह परिवार है मदन मोहन पांडेय का जहां पर अटल जी ने उनके साथ आठ महीने तक का समय बिताया था। डीएवी कालेज में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान अटल जी इनके घर के एक कमरे में रहते थे। मदन मोहन पांडेय अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके परिवार ने अटल जी की बारे में बताई गई बीती बातों को साझा किया।

atal ji stayed in kanpur in his teachers house for 8 months

कानपुर का यह वो मकान है जंहा पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने आठ महीनो का समय बिताया था। डीएवी कालेज में पढ़ाई के दौरान अटल जी अपनी पुरानी साइकल से आते थे और इसी मकान के चबूतरे पर बैठकर पढ़ाई करते थे। मदन मोहन पांडेय डीएवी कालेज में प्रोफेसर थे और उन्होंने अटल जी को पढ़ाया था। उनके पुत्र और पुत्र वधु ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। अटल बिहारी के गुरु दिवंगत मदन मोहन की पुत्रवधु डॉ शक्ति पांडेय से जब बातचीत की गई तो उन्होंने रुंधे गले से अटल जी के बारे में विस्तार से बताया। डॉ शक्ति ने बताया कि मेरे ससुर अटल जी के गुरु थे अटल जी ने उनसे शिक्षा ग्रहण की थी उन्होंने अटल जी को अपने बेटे की तरह माना था। अटल जी भी उनको अपने पिता की तरह मानते थे बापू जी ने उनको एक अच्छा नागरिक बनाने के लिए उनको अच्छी शिक्षा देते थे। डॉ शक्ति ने अटल जी की पुरानी बातों को बताते हुए कहा की एक समय था जब वह पुरानी साइकल से हमारे घर आते थे और मेरी सासू माँ शारदा देवी पांडेय से किताबें लेकर पढ़ते थे। डॉ शक्ति बताती है कि अटल जी काफी सौम्य व्यौहार वाले थे और उनको खाने पीने का काफी शौक था। अटल जी मेरी सासू माँ के हाथों के बने पकौड़े, दही बड़े, कढ़ी को बड़े चाव से खाते थे।

डॉ शक्ति का कहना है की अटल जी ने पब्लिक एडमिस्ट्रेशन का पार्ट बाबू जी से सीखा था की कैसे प्लानिंग करना है कैसे संगठन के लिए काम करना है। बापू जी से ज्ञान प्राप्त करके वो ऐसे खड़े हुए जैसे चाणक्य खड़ा हुआ था। अटल जी ने अपनी कविता "मै हार नहीं मानूँगा मै रार नहीं ठानूँगा" की तर्ज पर उसको चरीथार्त करके दिखाया। कई बार चुनाव हारने के बाद अंत में उनकी जीत हुई थी। इसलिए भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई ही है। अटल बिहारी बाजपेई के बीमार होने की खबर मिलने पर डॉ शक्ति अपने स्कूल नहीं गई और वह ईश्वर से प्रार्थना करती रही कि वह स्वस्थ हो लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और ही मंजूर था।

डॉ शक्ति ने बताया की एक बार अटल जी से मिलने गई थी तब उन्होंने ऐसा स्वागत सत्कार किया था कि लगा मैं किसी नेता के घर नहीं अपने जेठ के घर आयी हूँ। डॉ शक्ति रुंधे हुए गले से बोली की आज उस पीड़ा को व्यक्त करने में अपने आप को पूरी तरह से असमर्थ महसूस कर रही हूँ। आज ऐसा महसूस हो रहा है कि मेरे ऊपर हाथ रखने वाला संसार से चला गया लेकिन वो अमर हैं। अब भले ही उनकी डोर प्रभु के अधीन है संसार का नियम है की जो आया है उसको जाना ही होगा और वह एक बार फिर से जन्म लेगा। यह अटल नियम है और अटल और हम सब उस नियम के बंधन में बंधे हुए है एक दिन तो सबको ही जाना है लेकिन अटल जी सबके दिलो में वास और निवास करते रहेंगे।

अटल बिहारी वाजपेई के गुरु स्वर्गीय मदन मोहन पाण्डेय के पुत्र डॉ कौशल किशोर ने अटल जी की कुछ बाते साझा करते हुए कहा कि मेरे पिता जी ने एक पब्लिक स्कूल बनाया था लेकिन सीबीएससी से मान्यता नहीं मिली। जब काफी मेहनत के बाद भी स्कूल की मान्यता नहीं मिली तब हम और बाबू जी अटल जी से मिलने दिल्ली गए।

वहां पर उनके ऑफिस वालों ने मुलाकात करवाने से मना कर दिया तब बाबू जी ने कहा की उनसे जाकर कहो की कानपुर डीएवी कालेज से उनके गुरु मदन मोहन पांडेय आये हैं। अटल जी को जैसे ही जानकारी मिली की गुरू जी आये हैं वैसे ही उन्होंने हम लोगों को अंदर बुला लिया और बाबू जी के पाँव छुये और हालचाल पूछा। जब बाबू जी ने आने के बारे में बताया तो उन्होंने राजनाथ सिंह को फोन करके बताया की यह हमारे गुरु है इनका काम होना चाहिए। उसके बाद अटल जी मेरे बाबू जी से बात करते हुए कहा की हम तो यंहा ऐसे फसे हुए है राजनीति में जो चल रहा है उससे परेशान रहता हूँ लेकिन जो आपसे सीखा है उसी पर चल रहा हूँ और आपने जो राजनीति का पाठ हमको पढ़ाया है उसका कोई तोड़ नहीं है |

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