चुनाव आयोग में सपा विवाद पर कौन रख रहा है दोनों पक्षों की बात
समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को दो बड़े वकील चुनाव आयोग के सामने रख रहे हैं, एक तरफ कपिल सिब्बल तो दूसरी तरफ मोहन परासरन।
लखनऊ। सपा के भीतर चुनाव चिन्ह को लेकर घमासान के बीच आज चुनाव आयोग के सामने अखिलेश यादव और मुलायम सिंह की ओर से जिरह की गई। सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग के सामने साइकिल चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों पक्षों के बीच तकरीबन चार घंटे तक की बहस हुई, जिसके बाद आयोग ने इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया। तकरीबन एक महीने से अधिक समय से परिवार के भीतर चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद पर आयोग ने अभी तक अपना फैसला नहीं दिया और इस विवाद को अभी तक विराम नहीं लग सका है।
लेकिन यहां समझने वाली बात यह है कि चुनाव आयोग में चार घंटे तक चलने वाली इस वजजह की वजह क्या है। एक तरफ जहां अखिलेश यादव का पक्ष कपिल सिब्बल रख रहे थे तो दूसरी ओर से मोहन परासरन अपना पक्ष रख रहे थे और आयोग के सामने दोनों के बीच जमकर बहस हुई। कपिल सिब्बल 1989 से 1990 के बीच एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया रह चुके हैं, इसके अलावा वह तीन बार सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ मोहन परासरन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं और वह सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया भी 213-14 में रह चुके हैं। इससे पहले वह नौ सालों तक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं।
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चुनाव आयोग में हुई बहस के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही आयोग अपना फैसला सुना सकता है। समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे विवाद परतमाम विपक्षी पार्टियों ने भी हमला बोला है। बसपा नेता सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि चुनाव आयोग का जो भी फैसला होगा वह अलग है लेकिन प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी सरकार को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके अलावा तमाम दलों ने भी यह कहा है कि पार्टी के भीतर चल रहा यह विवाद महज एक ड्रामा है और लोगों का असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।














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