2007 के गोरखपुर दंगा मामले में हाई कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ को दी राहत
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लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सात अन्य लोगों को 2007 के गोरखपुर दंगा मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले का समर्थन करते हुए इन सभी लोगों पर मुकदमा नहीं चलाए जाने का फैसला कायम रखा है। निचली अदाल ने इन सभी लोगों को गोरखपुर दंगे में राहत दी थी। कोर्ट ने राशिद खान की याचिका को खारिज करते हुए गोरखपुर की निचली अदालत को निर्देश दिया है कि दोनों पक्षों की सुनवाई की जाए। इस मामले में राशिद खान ने याचिका दायर करके कहा था कि कोर्ट ने उन्हें इस मामले में योगी आदित्यनाथ व अन्य के खिलाफ मामला खारिज करने से पहले उनके पक्ष को नहीं सुना।

कोर्ट ने दूसरा पक्ष सुनने को कहा
जस्टिस बालाकृष्णन नारायण ने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को खारिज किया जाता है, इस याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है, लिहाजा इसे खारिज किया जाता है। लेकिन अधिक सजग रहते हुए सीजेएम गोरखपुर को निर्देश दिया जाता है कि वह इस मामले को फिर से सुने और पूरी स्वतंत्रता व ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का पालन करे।

सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं
याचिकाकर्ता के वकील फरमान नकवी ने कहा कि हमारी याचिका को आंशिक रूप से खारिज किया गया है, लेकिन यह आदेश हमारे पक्ष में है, क्योंकि इसमे फिर से मामले की सुनवाई करने को कहा गया है, जिसके बाद हमे अपना पक्ष रखने का अधिकार दिया गया है, जिसे पिछली बार निचली अदालत ने सुनने से इनकार कर दिया था। हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी रुख कर सकते हैं।

क्या गोरखपुर का मामला
गोरखपुर में 2007 में 26/27 जनवरी की रात मोहर्रम जुलुस के दौरान दो पक्षों में विवाद हुआ और भीड़ ने राजकुमार अग्रहरि की हत्या कर दी। यही मामला बढ गया और इसने सांप्रदायिक रूप अख्तियार कर लिया। आरोप है कि तभी एक जनसभा हुई जिसमें तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने भड़काऊ भाषण दिया जिसके बाद ही दंगा भड़क गया। इस सभा में कई और नेता भी थे। उन पर भी यही आरोप है।
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