'लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय समाज में स्वीकार नहीं होता......' ब्रेकअप पर HC ने की बड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि भारतीय समाज में मोटे तौर पर आज भी लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता नहीं दी जाती। इसका परिणाम ये होता है कि ब्रेकअप के बाद इस रिश्ते में रह चुकी महिला के पास विकल्प नहीं रहते।

allahabad-hc-comment-on-breakup-live-in-relationship-is-not-accepted-in-indian-society

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप के एक मामले में बहुत ही गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में ब्रेकअप के बाद वाली परिस्थितियों और फिर लगने वाले गंभीर आरोपों को लेकर बहुत उचित सवाल उठाया है। अदालत ने कहा है कि भारतीय समाज ऐसा है, जहां आम तौर पर आज भी इस तरह के रिश्ते नहीं स्वीकार किए जाते। जिसके बाद महिलाओं के पास विकल्प नहीं रह जाते और फिर उन्हें मुकदमेबाजी का सहारा लेना पड़ जाता है। इस मामले में अदालत ने आरोपी शख्स की जमानत अर्जी मंजूर कर दी है।

'भारतीय समाज में ऐसे रिश्तों को स्वीकार्य नहीं माना जाता है........'

'भारतीय समाज में ऐसे रिश्तों को स्वीकार्य नहीं माना जाता है........'

शादी के झूठे वादे और बलात्कार के मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बहुत बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने अपने सामने आए मामले को लेकर कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का यह एक विनाशकारी परिणाम है। हाई कोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ की बेंच ने कहा, 'लिव-इन रिलेशनशिप तोड़ने के बाद एक महिला के लिए अकेले रहना मुश्किल होता है। बड़े पैमाने पर भारतीय समाज में ऐसे रिश्तों को स्वीकार्य नहीं माना जाता है........ '

'महिला के पास ब्रेकअप के बाद......'

'महिला के पास ब्रेकअप के बाद......'

अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आगे कहा, '.....इस वजह से महिला के पास अपने लिव-इन पार्टनर के खिलाफ फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच जाता है, जैसा कि मौजूदा केस में हुआ है।' यह जमानत याचिका एक शख्स ने डाली थी, जिसके खिलाफ एक महिला ने आईपीसी की धारा 376 और 406 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी डेढ़ साल तक उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहा। इस दौरान वह गर्भवती हो गई। लेकिन, बाद में उसने शादी करने से इनकार कर दिया।

'महिला इस रिश्ते के होने वाले परिणामों से पूरी तरह से वाकिफ थी'

'महिला इस रिश्ते के होने वाले परिणामों से पूरी तरह से वाकिफ थी'

पीड़िता की पहले भी एक व्यक्ति से शादी हो चुकी है और पहले विवाह से उसके दो बच्चे हैं। महिला का यह भी दावा है कि आरोपी ने उसके पति को उसकी अश्लील तस्वीरें भेजी थीं, जिसके चलते उसके पति ने उसे अपने साथ रखने से मना कर दिया था। जबकि आरोपी के वकील की ओर से जमानत के पक्ष में यह दलील दी गई कि पीड़ता बालिग थी और उसके साथ अपनी इच्छा से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को तैयार हुई थी। उन्होंने यह भी दलील रखी कि महिला इस रिश्ते के होने वाले परिणामों से पूरी तरह से वाकिफ थी; और इसकी शुरुआत शादी के वादे से नहीं हुई थी।

आरोपी ने आरोपों को झूठा बताया

आरोपी ने आरोपों को झूठा बताया

आरोपी के वकील ने अदालत से बार-बार गुहार लगाई कि उसके क्लाइंट को झूठे आरोपों में फंसाया जा रहा है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। सबसे बड़ी बात ये है कि अतिरिक्त सरकारी वकील (AGA) ने इस मामले में आरोपी को जमानत देने का तो विरोध किया, लेकिन आरोपी की ओर से पेश की गई दलीलों को खारिज नहीं कर सके। लिहाजा अदालत को आरोपी के वकील की दलीलों में दम नजर आया।

Recommended Video

    What is Ghosting: Relationship में ये Breakup से ज्यादा Dangerous क्यों है | वनइंडिया हिंदी
    आरोपी की जमानत अर्जी हाई कोर्ट ने मंजूर की

    आरोपी की जमानत अर्जी हाई कोर्ट ने मंजूर की

    आखिरकार कोर्ट ने ट्रायल से संबंधित निष्कर्षों की अनिश्चितता, पुलिस की ओर से एकतरफा जांच, आरोपी पक्ष की ओर वाले मुकदमे को नजरअंदाज करने, आरोपी का तेज सुनवाई का मौलिक अधिकार और भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के व्यापक प्रावधानों के अलावा अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर अदालत ने शख्स की जमानत अर्जी को मंजूरी दे दी। (हाई कोर्ट की तस्वीर के अलावा बाकी सांकेतिक)


    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+