UP में अस्पतालों की बदहाली पर अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा, कहा- एंबुलेंस के अभाव में जा रही लोगों की जान
UP में अस्पतालों की बदहाली पर अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा, कहा- एंबुलेंस के अभाव में जा रही लोगों की जान
लखनऊ, 05 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में अस्पतालों की बदहाली पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने अखबार की खबर को ट्वीट करते हुए कहा कि भाजपा के राज में स्ट्रेचर व एंबुलेंस के अभाव में लोगों की जो जान जा रही है वो बचाई जा सकती थी। इतना ही नहीं, अखिलेश ने बढ़ती महंगाई को लेकर भी तंज कसा है।

अखिलेश यादव ने अखबार की जो ट्वीट की है, उसमें एक व्यक्ति (तीमादार) अपने बुजुर्ग पिता को गोद पर उठाकर अस्पताल के भीतर ले जा रहा है। उसे मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं मिला। वहीं, दूसरी तस्वीर में एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी पत्नी को ठेले पर खींचकर अस्पताल तक पहुंचा। लेकिन उसकी जान नहीं बचा सका। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा,
उप्र में चिकित्सा की झूठी उपलब्धि के झूठे विज्ञापनों में जितना खर्च किया जाता है, उसका थोड़ा-सा हिस्सा भी अगर सपा के समय सुधरी चिकित्सा सेवाओं पर लगातार खर्च किया जाता रहा होता तो आज भाजपा के राज में स्ट्रेचर व एम्बुलेन्स के अभाव में लोगों की जो जान जा रही है वो बचाई जा सकती थी।
बता दें कि अखिलेश जो तस्वीर पोस्ट की है, वो बलिया जिले के चिलकहर ब्लाक के अन्दौर गांव की है। सुकुल प्रजापति की पत्नी 55 वर्षीय जोगनी की तबियत 28 मार्च को खराब हो गई थी। उन्हें अस्पताल तक जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला, लिहाजा ठेला पर ही पत्नी को लिटाकर तीन किमी दूर पीएचसी चिलकहर पहुंचे। सुकुल ने बताया कि स्वास्थ्य केन्द्र पर कुछ दवाएं देकर डॉक्टर ने जिला अस्पताल ले जाने को कहा। रास्ते में पियरिया के पास पत्नी को ठेला पर ही छोड़कर वह पैदल घर आ गये।
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पैसे-कपड़े आदि लेकर वापस पत्नी के पास पहुंचे। वहां से टेम्पो से पत्नी को जिला अस्पताल पहुंचे। इस दौरान कुछ लोगों ने ठेले से ले जाते हुए फोटो खींच लिया औऱ उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। हालांकि, इलाज के दौरान जोगनी की मौत हो गयी। मीडिया कर्मियों से बातचीत में सुकुल ने बताया कि रात में करीब 11-12 बजे मौत के बाद लाश ले जाने के लिए अस्पताल वालों से एम्बुलेंस मांगा गया तो उन्होंने रात में वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होने का हवाला दे दिया।
विवश होकर 1100 रुपये में निजी एम्बुलेंस किराए पर किया और लाश को लेकर घर आया। वहीं, बलिया के सीएमओ डॉक्टर नीरज पांडे का कहना है कि पीएचसी चिलकहर के गेट तक मरीज को लेकर परिजन गए थे। इसके बाद जिला अस्पताल ले गया, जहां मौत हो गई। पूछने पर उसने बताया कि एंबुलेंस के लिए फोन नहीं किया था।












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