MP के बाद अब UP सरकार ने मेडिकल छात्रों को लेकर लिया ये बड़ा फ़ैसला, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Uttar Pradesh Government ने medical students के लिए अंग्रेजी के अलावा हिन्दी में अपनी पाठ्यक्रम पुस्तकों का अध्ययन करने का विकल्प देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसको लेकर सरकार ने एक हाइलेवल समिति का गठन किया है जो हिंदी में चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम पर काम करेगी। मध्य प्रदेश ने हाल ही में मेडिकल छात्रों के लिए हिंदी में किताबें पेश की है जिसके बाद यूपी सरकार के इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है। फिलहाल यूपी में में 45 मेडिकल कॉलेज हैं और 14 और निर्माणाधीन हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने की थी कमेटी बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री योगी ने की थी कमेटी बनाने की घोषणा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद में एक समारोह में घोषणा की थी कि राज्य में जल्द ही चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा हिंदी में भी दी जाएगी। उन्होंने उसी दिन इस मुद्दे पर ट्वीट भी किया था: "अगले साल से, उत्तर प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्रों को हिंदी में पाठ्यक्रम की किताबों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।" हालांकि उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक श्रुति सिंह ने कहा कि, "राज्य में मेडिकल छात्रों के लिए हिंदी में पुस्तकों की शुरूआत का मूल्यांकन करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।"

इस कमेटी में शामिल होंगे कई तरह के विशेषज्ञ

इस कमेटी में शामिल होंगे कई तरह के विशेषज्ञ

इन विशेषज्ञों को उत्तर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से चुना जाएगा, विशेष रूप से वे जिन्होंने अतीत में चिकित्सा मुद्दों पर कुछ किताबें लिखी हैं। समिति के एक सदस्य ने कहा, "अंग्रेजी की किताबें नहीं बदली जाएंगी, लेकिन हिंदी की किताबें अतिरिक्त होंगी।" चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, "सबसे महत्वपूर्ण बात, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पाठ्यक्रम की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। चिकित्सा संस्थानों में पेश किए जाने से पहले प्रत्येक पुस्तक और अध्याय का मूल्यांकन किया जाएगा। "

लंबे समय से महसूस की जा रही थी हिन्दी पुस्तकों की आवश्यकता

लंबे समय से महसूस की जा रही थी हिन्दी पुस्तकों की आवश्यकता

विशेषज्ञों ने कहा कि चिकित्सा की पढ़ाई में हिंदी की पुस्तकों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हर साल, बड़ी संख्या में छात्रों को भाषा की समस्या का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे अंग्रेजी में पारंगत नहीं होते हैं। ऐसे मेडिकल छात्रों के लिए विशेष अंग्रेजी कक्षाएं चलाई जाती हैं। लेकिन अगर किताबें हिंदी में हैं, तो इससे उन छात्रों को मदद मिलेगी, जो अंग्रेजी के साथ सहज नहीं हैं। इस फैसले के बाद पहले दिन से ही बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।

प्रोफेसर सूर्यकांत लिखी थी हिन्दी में अपनी थेसिस

प्रोफेसर सूर्यकांत लिखी थी हिन्दी में अपनी थेसिस

1991 में हिंदी में अपनी थीसिस लिखने वाले किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (King George Medical University) में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सूर्यकांत ने कहतें हैं कि, "एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी या बायो-केमिस्ट्री शुरू करने से पहले, छात्रों को अंग्रेजी पढ़ाया जाता है। मैं हिंदी में थीसिस जमा करने वाला पहला व्यक्ति था। इसलिए, इसे समझाने में लंबा समय लगा और आखिरकार राज्य विधानसभा से एक प्रस्ताव आया था। प्रो सूर्यकांत मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा समिति के सदस्य थे, जिन्होंने हाल ही में एमबीबीएस की पुस्तकों को हिंदी में पेश करने पर काम किया था।

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