संगठन-सरकार के बीच सबकुछ ठीक नहीं ?, केशव मौर्य के ट्वीट के बाद योगी के इस कदम ने दी अटकलों को हवा
लखनऊ, 24 अगस्त : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के भीतर सबकुछ सही नहीं चल रहा है। पिछले कुछ दिनों के भीतर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की तरफ से दिए गए बयानों राजनीतिक अटकलों को हवा दी तो मंगलवार को बीजेपी मुख्यालय पर हुई बड़ी बैठक में योगी आदित्यनाथ शामिल नहीं हुए। इसके बाद इन अटकलों को और बल मिला है कि क्या संगठन और सरकार के बीच वाकई ठन गई है। नए संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह सैनी मंगलवार को पहली बार पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। यहां एक परिचयात्मक बैठक रखी गई थी। चार क्षेत्रों की अहम बैठक में योगी के न आने से एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गरम हो गया है। पिछले एक महीने के भीतर केशव मौर्य की बॉडी लैंगवेज में जिस तरह का बदलाव आया है उसके बाद राजनीतिक विश्लेषक भी तरह तरह के कयास लगा रहे हैं।

संगठन-सरकार में सबकुछ ठीक नहीं ?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के रविवार को ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि 'संगठन सरकार से बड़ा है'। इसके बाद लखनऊ में आयोजित इस बड़ी बैठक में योगी आदित्यनाथ का न आना चर्चा का विषय बना हुआ है। योगी के बैठक में आने और न आने को लेकर बीजेपी में दो धड़ों का अलग अलग तर्क है। एक धड़े का कहना है कि चूंकि धर्मपाल सिंह मुख्यमंत्री आवास में जाकर खुद योगी से मिल चुके थे ऐसे में उनका बैठक में आने का कोई औचित्य नहीं था जबकि एक धड़े का कहना है कि चार क्षेत्रों की बड़ी बैठक में योगी का न आना कहीं न कहीं यह दिखाता है कि संगठन और सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

सिराथू से चुनाव हारने के बाद भी बढ़ा था केशव का कद
राजनीतिक विष्लेषकों की माने तो सिराथू विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ऐसा लगा कि उनका ग्राफ नीचे गिरता चला जाएगा लेकिन पिछले एक महीने के भीतर उनकी बॉडी लैंगवेज में ऐसा बदलावा आया है जिसको देखकर लोग तरह तरह के अनुमान लगा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा था कि अपना दल (के) नेता पल्लवी पटेल से मिली हार के बाद मौर्य का भाग्य अधर में लटक जाएगा। हालाँकि उन्हें डिप्टी सीएम के रूप में फिर से नियुक्त किया गया था। हालांकि मौर्य को पीडब्ल्यूडी के बजाय एक 'लो-की' ग्रामीण विकास विभाग दिया गया था।

पीएम और जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद बदली केशव की बॉडी लैंगवेज
सरकार और पार्टी में मौर्य के कद को लेकर अटकलें लगभग तीन महीने तक चलती रहीं। लेकिन 19 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी तस्वीर पूरे सोशल मीडिया पर छा गई थी। संसद सत्र के बीच में ही पीएम उनसे मिलने के लिए राजी हो गए थे, इससे उनकी स्थिति और मजबूत हो गई। लगभग 20 दिन बाद उन्हें विधान परिषद का नेता नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए भी एक झटका यह था कि जल शक्ति मंत्री और वर्तमान राज्य भाजपा प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह ने मौर्य के लिए रास्ता बनाने के लिए विधान परिषद के नेता के पद से इस्तीफा दे दिया।

केशव ने बीजेपी की जीत का श्रेय बंसल को दिया था
कुछ दिनों बाद, मौर्य को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ स्पॉट किया गया, जो सुर्खियों में बने रहने की अपनी प्रतिष्ठा पर खरे उतरे। पिछले हफ्ते, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक समारोह में, उन्होंने यह स्वीकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि भले ही पार्टी के प्रदर्शन का श्रेय यूपी भाजपा प्रमुख को रहा हो, लेकिन कोई भी इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता कि यह था भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल के कारण ही पार्टी को सफलता मिली है। बंसल पदोन्नत होने से पहले यूपी बीजेपी के महासचिव (संगठन) थे।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे हैं केशव ?
ऐसे समय में जब सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी बीजेपी के अब तक के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं। ऐसे में मौर्य ने एक बयान दिया कि "संगठन सरकार से बड़ा है"। गाजियाबाद में नव नियुक्त यूपी बीजेपी के संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ परिचयात्मक बैठक कर रहे थे। बाद में उन्होंने वही वन-लाइनर ट्वीट किया। हालांकि बीजेपी के एक नेता ने कहा पिछले कुछ समय से केशव के बयानों को देखा जाए तो यही लग रहा है कि वह प्रदेश अध्यक्ष की रेस में बने हुए हैं।












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