बीजेपी नेता की कोचिंग में कमरे में बंद कर युवती का किया उत्पीड़न

नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया, बच्ची अपने पिता राजेंद्र के साथ मुझसे मिलने आयी थी। वो मेंटली डिप्रेस है और कांपने लग रही है।

वाराणसी। शहर के सबसे चर्चित कोचिंग इंस्टीट्यूट पर 12वीं की स्टूडेंट मान्या को मेंटली टार्चर करने का आरोप लगा है जिसमें कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने जाँच के आदेश दिए हैं। नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया, बच्ची अपने पिता राजेंद्र के साथ मुझसे मिलने आयी थी। वो मेंटली डिप्रेस है और कांपने लग रही है। तुरंत अपर जिलाधिकारी नगर जितेंद्र मोहन को संकल्प ट्यूटोरियल के ऊपर लगे आरोप का जाँच सौंप दिया।

मामले में अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

मामले में अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

पीड़िता ने कोचिंग के चलाने वालों के खिलाफ सिगरा थाने में तहरीर भी दी है। अधिकारियों का कहना हैं कि यदि उत्पीड़न का मामला सच हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर कोचिंग का नाम सुनते छात्रा बेहोश हो जा रही है। कोचिंग बीजेपी के नेता का है इसलिए पहले तो पुलिस ने थाने से पीड़िता को भगा दिया था।

कोचिंग के मालिक बीजेपी के स्थानीय नेता

कोचिंग के मालिक बीजेपी के स्थानीय नेता

कोचिंग के मालिक बीजेपी के स्थानीय नेता हैं। कई बार बात करने के प्रयास में भी बात नहीं हो सकी। लहुराबीर निवासी राजेंद्र चक्रवाल ने बताया बेटी मान्या इंटर में है। 17 तारीख को साइंस की पढ़ाई के लिए 2200 रुपये देकर उसने कोचिंग में एडमिशन लिया। दो दिन तक क्लास किया और पढ़ाई समझ में न आने पर उसने कोचिंग छोड़ने का फैसला किया। 20 तारीख को वो टीचर से मिलकर पैसा वापसी की मांग की तो भगा दिया गया। रास्ते में रोते हुए किसी राहगीर ने देखकर बोला बेटा पुलिस कम्प्लेन कर दो। मान्या ने हिम्मत के साथ तहरीर लिखा और सिगरा पहुँच गयी। एसओ ने वहां से भगा दिया और कोचिंग वालों को बता दिया कि लड़की आयी थी ।

शिक्षकों ने छात्रा को बंद कमरे में धमकाया

शिक्षकों ने छात्रा को बंद कमरे में धमकाया

मान्या के पिता राजेंद्र ने बताया फिर 22 तारीख को कोचिंग पहुंची तो तीन बार उसे दौड़ाया गया। उसके बाद स्टाफ रूम में बंद कर दिया गया और बारी-बारी से टीचरों ने मेंटली टॉर्चर किया। बोला गया कि पैसा वापस नहीं होगा, जिंदगी बर्बाद जरूर हो जाएगी। तुम्हारी बदनामी होगी और कोई बचा नहीं पाएगा। मान्या के घर पहुँचते ही हालत खराब हो गयी। दो दिन तक मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब उसका इलाज बीएचयू में चल रहा है। बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर एसके सिंह ने बताया कि बंद कमरे में उससे जो भी कहा गया, उससे मान्या डिप्रेसन के उस लेवल तक चली गयी जहां कोचिंग के नाम से उसे दहशत है। उसे कुछ महीनों के लिए बाहर ले जाना चाहिए।

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