UP News: धमाका करके पाकिस्तान भागने का था प्लान! ATS ने ISI के आतंकी तुषार-समीर को दबोचा, कौन था निशाने पर?
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) ने एक सनसनीखेज आतंकी साजिश का भंडाफोड़ किया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने की एक बड़ी कोशिश को नाकाम करते हुए ATS ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के साथ मिलकर भारत में 'टारगेट किलिंग' और संवेदनशील जगहों पर हमला करने की फिराक में थे।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें 'स्लीपर सेल' के रूप में इस्तेमाल करने का यह अंतरराष्ट्रीय जाल अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। आइए जानतें हैं आखिर इन आतंकियों का असली प्लान क्या था?

मेरठ और दिल्ली के युवकों को कैसे बनाया गया मोहरा?
यूपी एटीएस ने गुरुवार को नोएडा से दो आरोपियों को दबोचा है। इनकी पहचान मेरठ निवासी तुषार चौहान उर्फ 'हिजबुल्लाह अली खान' (20 वर्ष) और दिल्ली के ओल्ड सीमापुरी निवासी समीर खान (20 वर्ष) के रूप में हुई है। इंटेलिजेंस इनपुट के अनुसार, ये दोनों आरोपी पाकिस्तानी गैंगस्टर्स शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के सीधे संपर्क में थे। इन आरोपियों के पास से एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और एक चाकू बरामद किया गया है, जिसका इस्तेमाल ये बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए करने वाले थे।
सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम के जरिए कैसे फैलाया गया जाल?
पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर रेडिकल पाकिस्तानी यूट्यूबर्स और गैंगस्टर्स इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे हैं। आरोपी तुषार चौहान इतना प्रभावित था कि उसने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नाम से कई फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाईं। इसी के जरिए उसने भट्टी का नंबर हासिल किया और फिर वीडियो और वॉयस कॉल के जरिए देश के खिलाफ साजिश रचना शुरू कर दिया।
क्या थी 'टारगेट किलिंग' और धमाकों की खौफनाक साजिश?
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने इन दोनों युवकों को बेहद खतरनाक काम सौंपे थे। भट्टी ने तुषार को निर्देश दिए थे कि वह विशिष्ट लक्ष्यों (Targets) के घरों पर ग्रेनेड फेंके और उनकी हत्या कर दे। इसके अलावा, इन्हें 'एक्स-मुस्लिमों' और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की रेकी करने और उन्हें ठिकाने लगाने का काम भी दिया गया था। हथियारों की आपूर्ति भी सीमा पार से बैठे आकाओं द्वारा की जानी थी। आरोपियों ने कई लोगों को जान से मारने की धमकियां भी दी थीं, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर्स खुद कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए शामिल होते थे।
लाखों का लालच और पाकिस्तान भागने का पूरा प्लान
आतंक की इस राह पर चलने के लिए तुषार को भारी भरकम रकम का लालच दिया गया था। शहजाद भट्टी ने काम शुरू करने से पहले ₹50,000 एडवांस और काम पूरा होने के बाद ₹2,50,000 नकद देने का वादा किया था। इतना ही नहीं, साजिश यह भी थी कि वारदात को अंजाम देने के बाद तुषार का पासपोर्ट बनवाकर उसे दुबई के रास्ते पाकिस्तान बुला लिया जाएगा। जांच में सामने आया है कि ISI एजेंट मेजर हामिद, मेजर इकबाल और मेजर अनवर भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे और उन्हीं के जरिए हथियार और पैसे पहुंचाए गए थे।
'TTH' और नए लड़कों की भर्ती का क्या है एजेंडा?
दूसरे आरोपी समीर खान को शहजाद भट्टी ने 'TTH' (तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान) के प्रचार का जिम्मा दिया था। उसे दीवारों पर 'TTH' पेंट करने और अधिक से अधिक युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ने (Recruit) का काम सौंपा गया था। समीर और तुषार इंस्टाग्राम के जरिए ही एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। फिलहाल, एटीएस ने इन पर UAPA और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और अब रिमांड पर लेकर इनके अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।














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