Ujjain को मिली सौगात, क्षिप्रा में नहीं मिलेगा कान्ह नदी का दूषित जल
इंदौर से कान्ह नदी के माध्यम से क्षिप्रा नदी में मिल रहे दूषित जल की समस्या का स्थाई समाधान होगा। देशभर से प्रति वर्ष उज्जैन दर्शन के लिए आने वाले एक करोड़ से अधिक यात्रियों को आचमन, स्नान के लिए क्षिप्रा नदी का शुद्ध ज

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट में कान्ह डायवर्शन परियोजना की स्वीकृति देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, यह परियोजना राज्य शासन की और से उज्जैन के लिए एक और सौगात है। इससे इंदौर से कान्ह नदी के माध्यम से क्षिप्रा नदी में मिल रहे दूषित जल की समस्या का स्थाई समाधान होगा। देशभर से प्रति वर्ष उज्जैन दर्शन के लिए आने वाले एक करोड़ से अधिक यात्रियों को आचमन, स्नान के लिए क्षिप्रा नदी का शुद्ध जल मिलेगा। यह परियोजना आगामी सिंहस्थ के पूर्व पूर्ण होगी। सभी को पुण्य सलिला क्षिप्रा का शुद्ध जल मिले इसके लिए साधु-संतों ने भी प्रयास किए थे।
कुछ ऐसा है पूरा मामला
इस परियोजना पर एक नजर डालें तो कान्ह नदी के दूषित पानी को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिए उज्जैन के समीप ही गोठड़ा गांव के पास स्टॉप डेम निर्माण किया जाएगा, और दूषित जल को उज्जैन के शहरी क्षेत्र में मिलने से रोका जाएगा। उज्जैन की सीमा के कालियादेह गांव के समीप क्षिप्रा नदी में कान्ह नदी का पानी नहीं मिलने दिया जाएगा, इसके लिए कान्ह नदी के 40 क्यूसेक पानी को हर दिन डायवर्ट किया जा सकेगा। कान्ह नदी को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से 598 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी है। कान्ह नदी में इन्दौर शहर एवं औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित जल मिलता है। कान्ह नदी आगे चल कर उज्जैन के पास क्षिप्रा में जाकर मिलती है। क्षिप्रा नदी के जल को कान्ह नदी के दूषित जल से बचाने के लिये कान्ह नदी डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना तैयार की गई है।
शुद्ध जल से कर सकेंगे आचमन
सिंहस्थ से पहले इस परियोजना को पूरा करने की तैयारी की जा रही है। देश और दुनिया के लोग क्षिप्रा नदी में अमृत स्नान के लिए पहुंचते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर अमृत स्नान करते हैं। सिंहस्थ का मेला देश और दुनिया में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि, सिंहस्थ के मेले में शामिल होने दूर-दूर से लोग धार्मिक नगरी उज्जैन में होते हैं। अबकी बार लोगों के सिंहस्थ में पहुंचने पर क्षिप्रा नदी के शुद्ध जल से आचमन करने के लिए मिलेगा, जिसके लिए तैयारियां शुरू हो गई है।
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