Ujjain News: श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम पर जन्माष्टमी की तैयारी, क्या रहेगा खास, जानिए
उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में आगामी 26 अगस्त 2024 को जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिये आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिये है। निर्देश में जन्माष्टमी पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों और उनसे जुड़े स्थलों पर आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उज्जैन में संभागायुक्त संजय गुप्ता और आईजी संतोष कुमार सिंह ने अंकपात मार्ग का अवलोकन किया। उन्होंने आश्रम में आगामी जन्माष्टमी पर्व के भव्य आयोजन किए के निर्देश दिए।

उनके द्वारा सान्दीपनि आश्रम के बाहर वाहनों की पार्किंग के लिये सुव्यवस्थित कार्य योजना बनाये जाने के भी निर्देश दिये गये। साथ ही अंकपात मार्ग का चौड़ीकरण किये जाने तथा मार्ग के बीच डिवाइडर बनाये जाने हेतु प्रस्ताव तैयार करने के लिये कहा गया।
गौरतलब है कि, सान्दीपनि आश्रम के बाहर पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने के कारण प्राय: बेतरतीब ढंग से वाहन रोड किनारे खड़े कर दिये जाते हैं। इस वजह से अंकपात मार्ग पर यातायात बाधित होता है। साथ ही दर्शन के लिये आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी असुविधा होती है।
संभागायुक्त और आईजी ने सान्दीपनि आश्रम में विद्यास्थली के दर्शन किये तथा यहां के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी प्राप्त की है। बताया गया कि, सिंहस्थ के दौरान अंकपात क्षेत्र में वैष्णव अखाड़े पड़ाव डालते हैं। आईजी सिंह ने गत सिंहस्थ के समय स्नान के समय वैष्णव अखाड़े के नदी तक पहुंचने के मार्ग के बारे में जानकारी प्राप्त की।
संभागायुक्त ने कहा कि, सान्दीपनि आश्रम में मन्दिरों में जो पत्थर लगे हैं, ये अत्यन्त ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के हैं। इनका मूल स्वरूप कायम रखा जाये। अधिकारियों द्वारा आगामी कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के अन्तर्गत मन्दिर में की जाने वाली व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली गई। इसके अतिरिक्त चौंसठ कला दीर्घा, गोमती कुण्ड का अवलोकन भी किया गया। इस दौरान सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।
मान्यता है कि द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलदाऊ के साथ उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने आए थे। भगवान गुरु आश्रम में 64 दिन रहे। इस दौरान उन्होंने गुरु सांदीपनि से 16 कला व 64 विद्या का ज्ञान प्राप्त किया। सैकड़ों भक्त यहां भगवान श्रीकृष्ण व पाठशाला के दर्शन करने आते हैं।
ये भी पढ़े- महेश्वर का प्राचीन ज्वालेश्वर महादेव मंदिर, जहां भगवान शिव ने मां नर्मदा को सौंपे थे शस्त्र












Click it and Unblock the Notifications