विकास दुबे के पकड़े जाने की पूरी कहानी महाकाल मंदिर के गार्ड लखनसिंह यादव की जुबानी, VIDEO
उज्जैन। सुबह करीब 7 बजे का वक्त था। महाकाल मंदिर के पीछे वाले गेट से कोई अंदर आने की कोशिश कर रहा था। हमने कानपुर एनकाउंटर के आरोपी विकास दुबे की तस्वीर देख रखी थी। देखते ही उसे पहचान गए। विकास दुबे के महाकाल दर्शन करने से पहले उसे हमने सीसीटीवी कैमरे में देख लिखा। उस वक्त हम क्यूआरटी टीम में आठ सुरक्षाकर्मी थे।
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हमने उसे संदिग्ध मानते हुए दो घंटे तक उससे पूछताछ की। फिर उसका विकास दुबे होना कन्फर्म होने पर उच्च अधिकारियों व पुलिस को सूचना दी। इसके बाद महाकाल थाना पुलिस ने विकास दुबे को गिरफ्तार कर लिया। यह कहना है कि महाकाल मंदिर उज्जैन के सुरक्षाकर्मी लखन सिंह यादव का। महाकाल मंदिर के पास से विकास दुबे को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाने वालों में सुरक्षाकर्मियों में लखन सिंह यादव के साथ ही गोपाल सिंह की भी खासी भूमिका रही।

एक सुजालपुर का दूसरा उज्जैन का
गोपाल सिंह व लखन सिंह याादव एसआईएस सिक्योरिटी कंपनी के तहत यहां लगे हुए बताए जा रहे हैं। गोपाल सिंह भोपाल के पास सुजालपुर का रहने वाला है। दिसम्बर 2019 से महाकाल मंदिर में सुरक्षाकर्मी के रूप में तैनात है। वहीं, गोपाल सिंह उज्जैन का रहने वाला है और लम्बे समय से बतौर सुरक्षाकर्मी सेवाएं दे रहा है। उधर, मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि गैंगस्टर विकास दुबे मध्यप्रदेश पुलिस की कस्टडी में है। गिरफ्तारी कैसे हुई, इसके बारे कुछ भी कहना ठीक नहीं है।
विकास दुबे ने सुरक्षाकर्मी से की हाथापाई
कानपुर एनकाउंटर के आरोपी विकास दुबे को पकड़वाने वाले गार्ड गोपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उसे शक होने पर उसने विकास दुबे को पूछताछ के लिए रोका तो वह आनाकानी करने लगा। इस पर गोपाल सिंह का शक और बढ़ गया। गोपाल ने तुरंत महाकाल थाना पुलिस को इत्तला की। इस दौरान विकास दुबे गोपाल सिंह से हाथापाई भी करने लगा।

महाकाल मंदिर के पास फोटो भी खिंचवाई
बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह ही विकास दुबे महाकालेश्वर मंदिर पहुंचा और सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर विकास दुबे ने मंदिर के सामने अपना नाम चिल्लाने लगा था। इतना ही नहीं बताया जा रहा कि महाकाल मंदिर के नजदीक विकास दुबे खुलेआम घूमता रहा और फोटो भी खिंचवाई, जो सोशल मीडिया में वायरल भी हो रही है।
हरियाणा के फरिदाबाद में भी आई थी लोकेशन
कानपुर एनकाउंटर के बाद विकास दुबे अपने घर से फरार हो गया था। इसके बाद उसकी आखिरी लोकेशन औरेया दिखाई दी थी। बाद में पुलिस को उसके बीहड़ की ओर भाग जाने का शक हुआ था, लेकिन विकास दुबे तब उत्तर प्रदेश का बॉर्डर पार करके हरियाणा पहुंच चुका था। विकास दुबे की तलाश में पुलिस की एक टीम फरीदाबाद के एक होटल पहुंची। पुलिस ने होटल की सीसीटीवी फुटेज भी बरामद की है।
कौन कर रहा था विकास दुबे की मदद
हरियाणा के फरीदाबाद के सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस को सकते में डाल दिया था। इस फुटेज में विकास दुबे की झलक दिखाई दी थी। हालांकि फरीदाबाद में विकास दुबे पुलिस के हाथ नहीं लगा और विकास फरीदाबाद से भी भाग निकला। यूपी से हरियाणा और फिर मध्य प्रदेश में फरारी काट रहे विकास दुबे की आखिर मदद कौन कर रहा था। इसका खुलासा उससे विस्तृत पूछताछ के बाद ही हो सकेगा।
कानपुर शूटआउट केस में अब तक क्या हुआ?
2 जुलाई: विकास दुबे को गिरफ्तार करने 3 थानों की पुलिस ने बिकरू गांव में दबिश दी, विकास की गैंग ने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी।
3 जुलाई: पुलिस ने सुबह 7 बजे विकास के मामा प्रेमप्रकाश पांडे और सहयोगी अतुल दुबे का एनकाउंटर कर दिया। 20-22 नामजद समेत 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
5 जुलाई: पुलिस ने विकास के नौकर और खास सहयोगी दयाशंकर उर्फ कल्लू अग्निहोत्री को घेर लिया। पुलिस की गोली लगने से दयाशंकर जख्मी हो गया। उसने खुलासा किया कि विकास ने पहले से प्लानिंग कर पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
6 जुलाई: पुलिस ने अमर की मां क्षमा दुबे और दयाशंकर की पत्नी रेखा समेत 3 को गिरफ्तार किया। शूटआउट की घटना के वक्त पुलिस ने बदमाशों से बचने के लिए क्षमा दुबे का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन क्षमा ने मदद करने की बजाय बदमाशों को पुलिस की लोकेशन बता दी। रेखा भी बदमाशों की मदद कर रही थी।
8 जुलाई: एसटीएफ ने विकास के करीबी अमर दुबे को मार गिराया। प्रभात मिश्रा समेत 10 बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया।
9 जुलाई: प्रभात मिश्रा और बऊआ दुबे एनकाउंटर में मारे गए। विकास दुबे उज्जैन से गिरफ्तार।












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