Ujjain News: देखते ही देखते क्षिप्रा नदी में डूबने लगा युवक, फिर हुए चमत्कार ने चौंकाया
उज्जैन में शनिवार की दोपहर नई दिल्ली से आए दो युवक राहुल पिता सुरेश सिंह एवं राकेश पिता रमेश सिंह शिप्रा नदी में स्नान कर रहे थे. स्नान के दौरान राहुल सिंह, जो तैरना नहीं जानता था, नदी में गहरे पानी में चले जाने से डूबने लगा। अपने साथी राहुल सिंह को डूबता देख उसे बचाने के लिए गया।
दूसरा युवक राकेश भी डूबने लगा दोनों युवकों को डूबता देख एसडीआरएफ जवान विजेंद्र वाघेला द्वारा दोनों युवकों के पास लाइफबॉय नदी में फेंकी गई और स्वयं भी अपनी जान की परवाह किए बगैर नदी में कूद गया एवं दोनों युवकों के पास पहुंचा और लाइफबाय की मदद से दिल्ली से आए दोनों युवकों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल कर जवान द्वारा साहसिक कार्य किया गया।

विजेंद्र वाघेला के अतिरिक्त दो अन्य जवान अशोक यादव और राहुल सूर्यवंशी भी मौके पर उपस्थित थेI इस प्रकार होमगार्ड/sderf टीम द्वार एक अप्रिय घटना को घटित होने से रोका गयाI होमगार्ड/sderf जवानों द्वारा मई जून की भीषण गर्मी की तपिश एवं लू के प्रकोप को झेलकर भी घाट पर मुस्तैदी से तैनात रहकर बाहर से आए श्रद्धालुओं की जीवन रक्षा की जा रही है। उज्जैन जिले में मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर बने रामघाट, दत्त अखाड़ा एवं नरसिंह घाट पर देश के कोने-कोने से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा मैया में श्रद्धा की डुबकी लगाने एवं महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन नगरी आते हैं।
श्रद्धालु स्नान करते समय गहरे पानी में चले जाते हैं जिससे वह डूबने लगते हैं. जिला सेनानी संतोष कुमार जाट द्वारा बताया गया की नदी का जल स्तर बढ़ा होने से डूब की घटनाएं हो रही है। रामघाट पर शिप्रा नदी में डुबकी लगाने आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था हेतु संपूर्ण रामघाट पर होमगार्ड/एसडीआरएफ के जवानों को मोटरबोट एवं अन्य आपदा उपकरणों के साथ तैनात किया गया है I सभी जवान तीन शिफ्टों में तैनात किया गए हैं, जिन्हें समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसके पश्चात ही रामघाट पर डूब की घटनाओं में कमी आई है।
आगामी वर्षा ऋतु की पूर्व तैयारी भी विभाग द्वारा की गई है, जिसके चलते जिला मुख्यालय स्तर पर EOC इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर एवं तहसील स्तर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों बड़नगर, कायथा, तराना, माकड़ोन, नागदा, महिदपुर, झार्डा, त्रिवेणी एवं रामघाट पर नौ डीआरसी डिजास्टर रिस्पांस सेंटर स्थापित किए गए हैं, ताकि वर्षा के दौरान डूब की घटना होने पर तत्काल रिस्पांस किया जा सके। इसके अतिरिक्त 3 जून से जिले में ही तैराकी का प्रशिक्षण चलाया जाना है, जिसमें लगभग 170 जवानों को तैराकी और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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