तीन तलाक पर मोदी सरकार ने मांगी राज्यों से सलाह, 8 राज्यों ने किया समर्थन

नई दिल्लीः सदियों से चली आ रही है तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने ड्राफ्ट बिल तैयार किया है, इस बिल का आठ राज्यों ने समर्थन किया है वहीं बाकी राज्यों का जवाब आना बाकी है। कानून मंत्रालय ने तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए दंडनीय और गैर-जमानती-अपराध बनाने के लिए सभी राज्यों से राय मांगी थी। अगर तीन तलाक पर कानून बन जाता है तो वो जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होगा।

 तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था

तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के महीने में तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। हालांकि बाद में शीर्ष अदालत ने इस पर रिपोर्ट देने को कहा था। अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश भर से तीन तलाक के 37 मामले सामने आए थे। वहीं उसमें से ज्यादातर मामले यूपी से आए थे।

मोदी सरकार ने बनाई थी कमिटी

मोदी सरकार ने बनाई थी कमिटी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश भर में कई शिकायतें मिली थी, इसी को लेकर केंद्र सरकार ने समाधान निकालने के लिए एक कमिटी बनाई थी। इस कमिटी में मोदी सरकार के कई मंत्री शामिल हुई थे। कमिटी में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, रवि शंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी ,समेत दो और राज्यमंत्री शामिल हुए हैं। इसके बाद ही 'मुस्लिम विमिंज प्रॉटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज ऐक्ट' नाम का ड्राफ्ट बिल तैयार किया गया।

केंद्र सरकार बना रही है कानून

केंद्र सरकार बना रही है कानून

सूत्रों ने पता चला है कि केंद्र सरकार के ड्राफ्ट बिल में लिखा है कि अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर तलाक देता है तो उस मुस्लिम पुरुष को तीन साल की सजा और पीड़ित महिला को कोर्ट से गुहार लगाने की इजाजत। साथ ही पीड़ित कोर्ट से मुआवजा लेने की गुहार भी लगा सकती है।

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