नुसरत जहां को सलाह देने वाली तसलीमा ने खुद की हैं तीन शादियां

नई दिल्ली, 11 जून। चर्चित लेखिक तसलीमा नसरीन ने टीएमसी सांसद नुसरत जहां को तलाक की सलाह दे कर खुद चर्चा बटोर ली है। नुसरत जहां पिछले कुछ समय से अपने पति निखिल जैन से अलग रह रही हैं। चर्चा है कि वे मां बनने वाली हैं। तसलीमा ने नुसरत जहां की निखिल जैन से संबंध को लेकर कहा है, चमगादड़ की तरह किसी अस्थिर रिश्ते में लटके रहने का कोई मतलब नहीं है। इससे दोनों असुविधा में रहेंगे।

taslima nasreen who advice to nusrat jahan also has done three marriages

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      दरअसल, रिश्तों के टूटने की पीड़ा को तसलीमा से बेहतर कोई और नहीं जानता। उन्होंने तीन शादियां कीं। तीनों असफल रहीं। उन्हें अपने सपनों का राजकुमार नहीं मिला। जिंदगी बगावत में ही गुजरती रही। जब वे 52 साल की हुईं तो 32 साल के एक नौजवान को अपना ब्वॉयफ्रैंड बना लिया। जिंदगी में उथल पुथल मची रही। तसलीमा नसरीन ने अपनी किताब द्विखंडितो (को) में ढाका और कोलकाता के कई लेखकों के साथ अपने अंतरंग संबंधों का जिक्र किया। अपनी आत्मकथा (मेरे बचपन के दिन) में उन्होंने लिखा है कि कैसे पांच साल और सात की उमर में उनके मामा और चाचा ने उनके साथ यौन दुराचार किया।

      औरत के हक में नुसरत जहां को सलाह

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      उन्होंने नुसरत जहां के लिए लिखा है, "आप अच्छा अभिनय करती हैं। आप आत्मनिर्भर और जागरूक हैं। यदि किसी में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान है तो आप अपने बच्चे का संरक्षक हो सकता है। वह अपने बच्चे को अपनी पहचान से बड़ा कर सकता है। दरअसर निखिल और यश में क्या अंतर है ? अंत में पुरुष, पुरुष ही होते हैं। क्या एक व्यक्ति को छोड़ कर दूसरी शादी कर लेने से जीवन बहुत खुश हो जाता है ? क्या हमें दूसरी जहरीली जिंदगी जीने के लिए दूसरी शादी करनी पड़ती है ? फिर तो ये सिलसिला रुकेगा नहीं। आत्मनिर्भर और स्वतंत्र महिला का मनचाहा पुरुष, कल्पना में जीता है हकीकत में नहीं।" तसलीमा नसरीन औरत की आजादी की प्रबल समर्थक हैं। इसके लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है। खुद उनकी अपनी जिंदगी किसी इंकलाब से कम नहीं।

      “सम्मान की रक्षा के लिए बुरा बनना पड़े तो बनो”

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      किसी महिला और पुरुष के वैवाहिक जीवन के बारे में तसलीमा नसरीन क्या सोचती हैं ? इसकी एक बानगी देखिए। एक इंटरव्यू में तसलीमा ने कहा था, तरक्की की रफ्तार के बावजूद औरतों को दबाने की कोशिश जारी है। वैवाहिक जीवन में औरतों की मर्जी का शायद ही ख्याल रखा जाता है। संतान पैदा करने के बारे में वह अपनी कोई राय नहीं जाहिर कर सकती। स्त्री को अपने शरीर पर अधिकार नहीं। शादी के पवित्र बंधन में बंध कर भी सुकून नहीं। वह वैवाहिक बलात्कार का शिकार होती रहती है। पुरुषों के लिए स्त्री एक सेक्स ऑब्जेक्ट की तरह है। इसलिए मैं हर लड़की से कहती हूं कि यदि तुम्हें अपने सम्मान और अधिकार के लिए बुरा बनना पड़े तो जरूर बनो। व्यवस्था का विरोध करोगी तभी तुम्हें इज्जत और बराबरी मिलेगी। तस्लीमा नसरीन दर्द के इस दरिया से गुजर चुकी हैं। उनहोंने अपनी मर्जी की जिंदगी के लिए बार-बार बगावत की है। उन्होंने तीन शादियां कीं। लेकिन तीनों असफल रहीं।

      तसलीमा नसरीन की तीन शादियां

      तसलीमा नसरीन की तीन शादियां

      पढ़ने लिखने में जहीन तसलीमा जब 13 साल की थीं तभी से कविता लिखने लगीं थीं। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी पढ़ने गयीं तब भी काव्य रचना जारी रही। तसलीमा नसरीन की पहली शादी 1982 में बांग्ला के मशहूर कवि रुद्र मोहम्मद शहीदुल्ला से हुई थी। उस समय तसलीमा की उम्र 20 साल थी और वे मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं थीं। प्रेमविवाह के बावजूद ये शादी सिर्फ चार साल चली। इसके बाद उन्होंने 1990 में बांग्लादेश के पत्रकार नईमुल इस्लाम खान से शादी की नईमुल के परिवार वाले इस शादी के खिलाफ थे। उनके पिता सांसद रहे थे। तसलीमा की दूसरी शादी केवल एक साल में ही टूट गयी। फिर उन्होंने 1991 में एक अन्य पत्रकार मीनार महमूद से तीसरी शादी की। लेकिन एक साल बाद ही 1992 में इनका तलाक हो गया। फिर उनकी जाती जिंदगी में खामोशी छायी रही। लेकिन 2014 में उन्होंने ट्वीटर पर अपने ब्वॉयफ्रैंड की तस्वीर डाल कर तहलका मचा दिया। उस समय तसलीमा की उम्र 52 साल और उनके पुरुष मित्र की उम्र 32 साल थी। आजादा ख्याल वाली तसलीमा अपनी मर्जी के मुताबिक जिंदगी जीती रही हैं। वे बेबाक बोलती हैं। बेखौफ लिखती हैं।

      क्या सभी पुरुष शोषक हैं ?

      क्या सभी पुरुष शोषक हैं ?

      2018 में 'मी टू कैंपेन' के दौरान एक बयान देकर उन्होंने भूचाल ला दिया था। उन्होंने कहा था, सुनील गांगुली (बांग्ला साहित्यकार) ने जब मुझे गलत तरीके से छुआ तो मैं आवाक रह गयी। मैं उन्हें अपना बड़ा भाई मानती थी। मैं उनका बहुत सम्मान करती थी।" हालांकि सुनील गांगुली ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया था। तसलीमा नसरीन की वैवाहिक जिंदगी भले हिचकोले खाती रही लेकिन उनकी लेखकीय जिंदगी परवान चढ़ती रही। उन्होंने कठमुल्लाओं को चुनौती दे कर जो साहसिक लेखन किया वो दुर्लभ है। उन्होंने निर्वासित जीवन जीना मंजूर किया लेकिन कलम की आजादी से कोई समझौता नहीं किया। पुरुषों के वहशी रूप को दिखने के लिए उन्होंने अपनी कहानी कही। उन्होंने बताया (आत्मकथा खंड एक- मेरे बचपन के दिन) कि जब वे पांच साल की थीं तब कैसे उनके मामा ने फुसला कर उनका शीलभंग किया था। तब वे इस बात का मतलब भी नहीं समझती थीं। दो साल बाद ही अपने चाचा ने उनके साथ गंदा काम किया। इसलिए तसलीमा आज कहती हैं कि मर्दों की नजर में औरत एक वस्तु से अधिक कुछ और नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या कुछ घटनाओं के आधार पर सभी पुरुषों को शोषक के रूप में दिखाना उचित है ? अगर कोई सारे रीति- रिवाजों और मान्यताओं को तोड़ कर अपनी पसंद से शादी करता है तो उसे कम से कम प्यार के मामले में हरदम खुश ही रहना चाहिए। लेकिन इसके बाद भी अगर खुशी नहीं मिलती तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? इस सवाल का ईमानदारी से जवाब मिलना मुश्किल है।

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