Palghar mob lynching: संत सुशील गिरि का आखिरी वीडियो कॉल, जानिए अपनी मां से क्या कहा?

सुल्तानपुर। महाराष्ट्र के पालघर में मॉब लिंचिंग के शिकार हुए संत सुशील गिरि (35) उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले थे। घरवालों को संत सुशील गिरि के देहांत की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से 17 अप्रैल को मिली। फोन किया तो वह बंद जा रहा था। उनके पैतृक घर पीपी कमैचा के चांदा कस्बे में मातमी सन्नाटा छा गया है। घर पर जहां ढ़ाढस देने वालों का तांता लगा हुआ है। वहीं हर कोई इस घटना की न‍िंंदा कर रहा है। घटना के चार घंटे पहले सुशील गिरि महाराज ने घर पर वीडियो कॉल कर अपनी मां से बात करते हुए कहा था- मां गुरुजी के अंतिम संस्कार में जा रहा हूं, तुमसे मिलने की बहुत इच्छा हो रही है। लॉकडाउन के बाद घर आऊंगा तो खूब बात करेंगे।

12 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

12 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

सुल्तानपुर जिला मुख्यालय से करीब 38 किलोमीटर दूर चांदा कस्बा है। महाराष्ट्र के पालघर में मॉब लिंचिंग के शिकार हुए जूना अखाड़े के संत सुशील गिरि यहीं के रहने वाले थे। परिवार ने उनका नाम शिवनारायण दुबे रखा था, लेकिन प्यार से सब रिंकू कहते थे। छह भाई-बहनों में सुशील गिरि सबसे छोटे थे। सुशील गिरि महाराज ने 12 साल की उम्र में पिता की डांट से क्षुब्ध होकर घर छोड़ दिया था। ये बात वर्ष 1997 की है, जब वे कक्षा छह में पढ़ते थे। घर से निकलकर वे ननिहाल पट्टी प्रतापगढ़ चले गए और वहां से बिना किसी को बताए एक ट्रेन से मुंबई पहुंच गए। यहां उनकी भेंट जूना अखाड़े के कुछ संतों से हुई। इसके बाद इन्होंने संन्यास ले लिया। वहां रामगिरि महाराज से दीक्षा लेकर पूजा-पाठ में रम गए।

पिछले साल दिसंबर में आखिरी बार आए थे घर

पिछले साल दिसंबर में आखिरी बार आए थे घर

सुशील के भाई शेष नारायण दुबे बताते हैं कि साल 2005 में वे कानपुर में एक सत्संग में आए थे। यहां उनके बचपन के मित्र ज्वाला दुबे से भेंट हुई। उन्होंने सुशील को बहुत समझाया बुझाया तो वे घर आए और कुछ दिन रहकर चले गए। इसके बाद से उसका आना-जाना था। आखिरी बार नवंबर-दिसंबर 2019 में वे यहां पास के एक गांव में शादी में शामिल होने आए थे। रात में ही वापस चले गए थे। भाई ने बताया कि उनके देहांत की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली।

घटना से 4 घंटे पहले मां से वीडियो कॉल पर की थी बात

घटना से 4 घंटे पहले मां से वीडियो कॉल पर की थी बात

17 अप्रैल को जब मोबाइल पर देखा कि सुशील गिरी की हत्या हुई है, तुरंत उन्हें फोन किया लेकिन बंद जा रहा था। इससे पहले जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन बड़े भाई से बात हुई थी तो उन्होंने बताया कि सुशील सूरत जा रहे हैं, गुरुजी का देहांत हुआ है। मुंबई में हमारे दो भाई, बड़े वाले और तीसरे नंबर वाले मौजूद थे। वे लोग अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते थे लेकिन पास नहीं होने के कारण शामिल नहीं हो सके। घटना के चार घंटे पहले सुशील गिरि महाराज ने घर पर वीडियो कॉल कर अपनी मां मनराजी से बात करते हुए कहा था- मां गुरुजी के अंतिम संस्कार में जा रहा हूं, तुमसे मिलने की बहुत इच्छा हो रही है। लॉकडाउन के बाद घर आऊंगा तो खूब बात करेंगे।

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