श्रीनगर दौरे पर हम खुद गए और हमें किसी ने समर्थन नहीं किया: यशवंत सिन्हा
श्रीनगर दौरे को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने बताया कि घाटी का दौरा करने के लिए उन्होंने किसी का समर्थन नहीं मिला है।
श्रीनगर। घाटी में बिगड़े हालात के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने श्रीनगर का दौरा किया और अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की। इस दौरे को लेकर उन्होंने बताया कि हम किसी के कहने पर या फिर समर्थन से श्रीनगर नहीं गए।

'घाटी का दौरा करने की योजना उन्होंने खुद बनाई'
श्रीनगर दौरे को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने बताया कि कश्मीर घाटी में पिछले कई महीनों से हालात बेहद खराब हैं। आखिर इसकी वजह क्या है और ऐसा क्यों हो रहा है? इसी की पड़ताल के लिए हम श्रीनगर गए।
उन्होंने बताया कि वहां उन्होंने अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की। उनके पक्ष को सुना। जानने और समझने की कोशिश की कि आखिर हालात बिगड़ने की वजह क्या है?
उन्होंने बताया कि घाटी का दौरा करने की योजना उन्होंने अकेले बनाई। उन्हें इसके लिए किसी का समर्थन नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि हमने वहां अलगाववादी नेताओं के साथ-साथ लोगों से भी बात की। उनकी बातों को गौर से सुना।
घाटी में बिगड़े हालात के चलते किया श्रीनगर का दौरा
बता दें कि नौ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से घाटी में हालात बिगड़े हुए हैं।
इसी के मद्देनजर पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा समेत पांच सदस्यीय दल कश्मीर के हालात सुलझाने और अलगाववादी नेताओं से मुलाकात के लिए श्रीनगर पहुंचे।
अलगाववादी नेताओं से मुलाकात में सबसे खास है हुर्रियत कांफ्रेस के नेता सैयद अली शाह गिलानी से हुई उनकी मुलाकात।
अलगाववादी नेताओं ने रखी शर्त
गिलानी ने इस मुलाकात में सिन्हा से जो दो शर्तें रखी हैं उसमें 6,000 लोगों की रिहाई और 450 लोगों पर पबिलक सेफ्टी एक्ट को हटाना है।
यशवंत सिन्हा से मुलाकात के बाद भी अलगाववादी नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों का एक नया कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर में 18 अक्टूबर और नवंबर में विरोध प्रदर्शनों की मांग की गई है।
इस कैलेंडर की खास बात है कि इसमें अलगाववादी नेताओं ने किसी भी तरह से पाकिस्तान के लिए प्रार्थना करने और पाक के समर्थन में नारे लगाने की बात नहीं कही है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि निश्चित तौर पर यह एक बदलाव का संकेत है।












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