कौन हैं 30 साल बाद एथलेटिक्स में कीर्तिमान बनाने वाले अविनाश साबले, रिकॉर्ड तोड़ना है इनकी आदत
नई दिल्ली, 7 मई: भारत के धावक अविनाश साबले के चलते भारतीय एथलेटिक्स फिर से चर्चित हो रहा है। साबले ने देश का 30 साल पुराना रिकॉर्ड जो तोड़ा है। जिस दौड़ में यह रिकॉर्ड तोड़ा गया है वह पूरे 5 हजार मीटर की थी। साबले ने यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए युनाइटेड स्टेट्स को चुना। भारत की स्पोर्ट्स ऑथरटी ने इस बात की जानकारी दी। एक दौड़ को मीट कहा जाता है और अविनाश ने यहां पर 12वां स्थान हासिल किया जो टॉपर तो नहीं है लेकिन नेशनल रिकॉर्ड को जरूर तोड़ गया।

एथलेटिक्स के तीन बड़े रिकॉर्ड में एक को तोड़ दिया
अविनाश सेना के जवान हैं और उम्र 27 साल है। उनको यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए दौड़ को 13:25.65 में पूरा करना पड़ा क्योंकि बहादुर साहब ने 1992 में जून की गर्मी के दौरान 13:29.70 का समय निकाला था।
आपको बता दें कि बहादुर का रिकॉर्ड उन तीन रिकॉर्ड में शामिल था जो 21वीं सेंचुरी से पहले नेशनल ओलंपिक्स में बनाए गए। बाकि के दो शिवनाथ सिंह और पीटी उषा के नाम हैं। शिवनाथ ने पुरुषों की मैराथन में नेशनल रिकॉर्ड बनाया था और पीटी उषा गजब की धाविक थी हीं, उन्होंने 1984 में 400मी हर्डल रेस में यह रिकॉर्ड बनाया। तब लॉस एजिंल्स के ओलंपिक गेम्स चल रहे थे। आज इनमें से एक रिकॉर्ड का टूटना बड़ी बात तो है।

3000 मीटर की स्टीपलचेज में महारत हासिल
पिछले कुछ समय से लगातार कोई ना कोई रिकॉर्ड तोड़ रहे साबले को 3000 मीटर की स्टीपलचेज में महारत हासिल है। ये स्टीपलचेज कोई साधारण दौड़ नहीं होती। यहां पर पूरे ट्रैक के दौरान बाधाएं बनाई जाती हैं जिससे धावक फोकस का भी इस्तेमाल करता रहे और पैरों का भी। यानी शारीरिक और मानसिक कसरत की दौड़।
अविनाश 8:18.12 के समय के साथ 3000 मीटर की स्टीपलचेज में भी रिकॉर्ड बना चुके हैं और यह नेशनल रिकॉर्ड है। उन्होंने इंडियन ग्रांड प्रीक्स 2 में मार्च 23, 2022 को भी रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 8:16:21 का समय निकाला और नेशनल रिकॉर्ड को 8वीं बार तोड़ा। खास बात यह है कि साबले को कई बार अपने ही 3000 मीटर स्टीपलचेज राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए जाना जाता है।

6 साल की उम्र में स्कूल की वजह से भागना शुरू हुआ
साबले का जन्म मांडवा में हुआ जो महाराष्ट्र के बीड जिले में पड़ता है और परिवार किसान है। पैदल ही शरीर को खोलने के अवसर बचपन से ही मिलने लगे। परिवार का हिसाब ऐसा था कि स्कूल 6 किलोमीटर दूर पड़ता है। 6 साल की उम्र में यह यात्रा या तो भागकर होती थी या फिर पैदल चलकर क्योंकि बस, रिक्शा वगैरह की कोई सुविधा नहीं थी। 12वीं क्लास पास करने के बाद सेना में नौकरी लग गई और 2013-14 में सियाचीन ग्लेशियर पर पोस्टिंग दी गई, राजस्थान के रेगिस्तान में भी ड्यूटी की और 2015 में सिक्किम में तैनात रहे।

20 किलो वजन कम करना पड़ा, वो भी तीन महीने में
इसके बाद खेल में बड़ा पड़ाव आया जब इस जवान ने इंटर आर्मी क्रास कंट्री रनिंग में पहले भाग लिया। उनके साथी जवानों ने साबले में कुछ तो हुनर देखा और उनके कहने पर साबले दौड़ में शामिल हो गए। इसके बाद वे स्टीपलचेज में गए और अमरीश कुमार से ट्रेनिंग ली। साबले का वजन जो आज दुबला पुतला लगता है एक समय बड़ा भारी थी। उनको 20 किलो वजन कम करना पड़ा, वो भी तीन महीने में। उसके बाद नेशनल कैम्प में एंट्री हुई और विदेशी कोच ने उनको तराशा।

सफलताएं मिलनी शुरू हुईं और अब तक जारी हैं
देसी खिलाड़ी को लेकिन विदेशी कोचिंग माफिक नहीं आई और वे फिर से कुमार की कोचिंग की छत्रछाया में चले गए। उन्होंने 2018 में नेशनल ओपन चैम्पियनशिप में 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। फिर मार्च 2019 में नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। अपने रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़ने के कारनामों के बाद वह ऐसे पहले पुरुष स्टीपलचेजर बन गए जो वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए क्वालिफाई कर पाए थे।
इंटरनेशनल सफलता अब मिलनी शुरू हुई क्योंकि उन्होंने साल 2019 में एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में सिल्वर हासिल कर लिया। फिर उसी साल के अंत में अपना ही रिकॉर्ड वर्ल्ड चैम्पियनशिप में तोड़ दिया। वर्ल्ड चैम्पियनशिप में यह खिलाड़ी 3000 मीटर स्टीपलचेज के फाइनल में जाने वाला पहला भारतीय था। उन्होंने बाद में 2020 के समर ओलंपिक में भी क्वालिफाई किया।












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