प्रगति की कहानी: 3 साल पहले हुई सर्जरी, अब जीते 2 मेडल, ब्रेन हेमरेज की जंग से तीरंदाजी की उड़ान
Archer Pragati Who Defied All Odds: चीन के चेंगदू में महिला तीरंदाज प्रगति का नाम सुनाई दे रहा है। 20 साल की प्रगति ने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 2 मेडल जीतकर कमाल करते हुए भारत को गौरवान्वित किया है। प्रगति की कहानी साधारण से हैरतंगेज तक की है।
3 साल पहले, प्रगति को ब्रेन हैमरेज हुआ, जिसके कारण उन्हें सर्जरी करनी पड़ी। सर्जरी काफी जटिल थी, परंतु प्रगति ने हिम्मत हारने की बजाय, मेहनत करके अपना सपना पूरा किया।

प्रगति ने मिक्स्ड टीम में गोल्ड मेडल जीता है। प्रगति और अमन सैनी की मिक्स्ड टीम ने साउथ कोरिया को 157-156 से हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया। महिला टीम में भी उनके हिस्से सिल्वर आया है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार प्रगति कहती हैं, "मुझे गोल्ड मेडल मिलने से बहुत खुशी हुई। साउथ कोरिया को हराना हमारे लिए बहुत मुस्किल था, लेकिन हमने प्रेशर झेल लिया। महिला टीम में हमें सिल्वर मेडल मिला, हमने 2-3 पॉइंटस से मैच हारा, लेकिन हमने 100% मेहनत की।"
दिल्ली के दिलशाद गार्डन में रहने वाली प्रगति गुरु काशी विश्वविद्यालय की छात्रा हैं। उनके परिवार और कोच ने उन्हें इस सफलता में सहायता की, और उन्हें खुशी है कि उन्होंने तीरंदाजी को एक लक्ष्य बनाया।
5 मई, 2020 की वो सुबह-
प्रगति को 17 साल की उम्र में, 5 मई 2020 को, ब्रेन हेमरेज हुआ। तब प्रगति को सुबह-सुबह सिर में तेज-तेज दर्द हुआ। उन्हें बेहोशी आ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने पता लगाया कि उनके सिर में खून का थक्का पड़ गया है। इसके बाद, प्रगति की कई घंटे की सर्जरी करनी पड़ी।
सर्जरी के बाद के बाद वे कई दिनों तक अस्पताल में रहीं। दिमाग की सर्जरी के कई साइड-इफेक्ट्स होते हैं। प्रगति को सर्जरी के बाद, सिर में सूजन, सिर-घूमना, संतुलन-खोना, याददाश्त कमजोर होना आदि की समस्याएं हुई। उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफी संघर्ष किया, अपनी प्रतिभा का दम दिखाया और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में मेडल जीता।
प्रगति का पहला प्यार: तीरंदाजी-
प्रगति को 8वीं कक्षा में ही तीरंदाजी का प्यार हो गया था। प्रगति कहती हैं, "मुझे पढ़ने में मजा नहीं आता था। मुझे सिर्फ खेलने में मजा आता था।" प्रगति को पहले-पहले, लॉन-टेनिस पसंद था। परंतु, प्रगति के पिताजी, सुरेश कुमार, खेल-कूद को ज्यादा तवज्जों नहीं देते थे। प्रगति कहती हैं, "पिताजी मुझे खेलने से मना करते। मुझे 10-12 घंटे पढ़ने को कहते थे।"
ये भी पढ़ें- जर्मनी का FIFA World Cup 2023 से बाहर होना: महिला फुटबॉल का सबसे बड़ा सरप्राइज
लेकिन प्रगति ने माता-पिता को कहा कि वे तीरंदाजी में भी सब-कुछ साबित करके दिखा देंगी। फिर उन्होंने दिल्ली के नजफगढ़ में देवांश तीरंदाजी अकादमी में दाखिला ले लिया, और वहां से तीरंदाजी की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने जल्दी ही विजयवाड़ा में सब-जूनियर अंडर 14 मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने 2020 में देहरादून में जूनियर नेशनल में जीत हासिल की।
प्रगति का सफर कोई सामान्य सफर नहीं है। 3 साल पहले, उनके सिर में खून का थक्का पड़ने से उनकी सर्जरी हुई। लेकिन, प्रगति ने हिम्मत हारने की बजाय, मेहनत करके, अपने सपनों को पूरा किया। प्रगति का जीता हुआ मेडल उनके संघर्ष की कहानी को और खास बनाता है। प्रगति एक सच्ची प्रेरणा हैं और उन्होंने दुनिया भर के लोगों को दिखाया है कि कुछ भी असंभव नहीं हैं।












Click it and Unblock the Notifications