Paris Olympics: ओलंपिक गोल्ड मेडल दाँतों से क्यों काटा जाता है? जानिए ऐसे तथ्य जो आपको पता नहीं होंगे
Olympics facts: ओलंपिक को खेलों का महाकुम्भ किया जाता है। दुनिया भर से 180 से ज्यादा देश इसमें स्पर्धा करते हैं। अलग-अलग खेलों में स्पर्धा होती है और हर खिलाड़ी गोल्ड मेडल के लिए खेलता है। कई बार सफलता मिलती है और कई बार असफलता भी हाथ लगती है।
ओलंपिक मेडल्स, परम्पराओं आदि के बारे में कई बार सुनने और देखने को मिलता है। कुछ बातें और तथ्य ऐसी भी होते हैं, जिनके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं होते। इनके बारे में यहाँ जिक्र करने का प्रयास किया गया है। आपको जरुर जानना चाहिए।

सोना खरा नहीं होता है
चमकता हुआ सोना ओलंपिक जीत का पर्याय है लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आया। अब सोने की मात्र बहुत कम होती है। 1912 से इसमें चाँदी की मात्रा 92 फीसदी से भी ज्यादा होती है। बचा हुआ सोना होता है। सोने की मात्रा कम से 6 ग्राम तो होनी चाहिए।
आदर्श वाक्य सिर्फ विंटर्स खेलों के लिए होता है
ओलंपिक आदर्श वाक्य शीतकालिक खेलों के पदकों पर दिखता है, ग्रीष्मकालीन खेलों पर यह नहीं होता है। इससे शीतकालीन खेलों में एक अनोखा टच देखने को मिलता है। ओलंपिक आदर्श वाक्य सीटियस, अल्टियस और फोर्टीयस है। इसका अर्थ तेज, उच्चतम और मजबूत होता है।
पहले नहीं होते थे पदक
1896 में पहले आधुनिक ओलंपिक में चैंपियनों को जैतून की माला से ताज पहनाया गया, जो प्राचीन ग्रीस का प्रतीक है। 1904 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के बाद स्वर्ण पदक, रजत और कांस्य पदक का प्रचलन देखने को मिला। इससे ओलंपिक में एक नया बदलाव आ गया।
विंटर्स में वजन में भारी पदक
हालांकि पदक जीत का प्रतीक होते हैं लेकिन विंटर ओलंपिक में पदक ज्यादा भारी और मोटे होते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे डिजाइन, शीतकालीन खेलों के लिए एक बड़े क्षेत्र को समायोजित करना आदि।
पदक दांतों से काटना प्रमाणिकता नहीं
खेलों में जीत दर्ज करने के बाद एथलीट पदक को काटते हुए दिखते हैं। ऐसा सिर्फ फोटो के लिए किया जाता है। सोने को जांचने के लिए काटकर परीक्षण करने की प्रथा नहीं है। फोटोग्राफर के अनुरोध पर पोज देने के लिए ऐसा किया जाता है।
ओलंपिक सिर्फ शारीरिक खेलों के लिए नहीं थे
ओलंपिक में कला, साहित्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला जैसी श्रेणियों में भी पदक के लिए स्पर्धा देखने को मिलती थी। 1912 से लेकर 1948 तक इस प्रकार की स्पर्धाएं हुआ करती थी। उस समय ओलंपिक सिर्फ शारीरिक कौशल को लेकर ही नहीं थे। आर्ट का भी महत्व था।
माइकल फेल्प्स हैं गोल्ड के किंग
कुछ एथलीट ऐसे हुए हैं, जो हर बार ओलंपिक में गोल्ड जीतने के लिए बने हैं। माइकल फेल्प्स भी ऐसे ही एथलीट हुए हैं। उन्होंने ओलंपिक में तैराकी की विभिन्न स्पर्धाओं में कुल 18 गोल्ड मेडल अपने नाम किये हैं। महिलाओं में पूर्व सोवियत जिमनास्ट लारिसा लैटिनिना ने 9 गोल्ड मेडल हासिल किये थे।












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