सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार की अपील, कहा- CoA को हटाकर अब AIFF को दी जाए ये बड़ी जिम्मेदारी
विश्व फुटबॉल संचालन संस्था फीफा (FIFA) द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म है।
नई दिल्ली, 22 अगस्त। विश्व फुटबॉल संचालन संस्था फीफा (FIFA) द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म है। फीफा के इस कड़े फैसले के बाद केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर गई। जहां केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से प्रशासकों की समिति (सीओए) को हटाने की अपील की है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कही यह बात
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से प्रशासकों की समिति (सीओए) के कार्यकाल को समाप्त करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन की देखभाल कार्यवाहक महासचिव के नेतृत्व में एआईएफएफ प्रशासन द्वारा की जाएगी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सीओए को 23 अगस्त, 2022 के अंत तक एआईएफएफ के लिए अंतिम मसौदा संविधान अदालत में जमा करने का निर्देश जारी करें।
सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया था COA
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफएफ के मामलों के प्रबंधन के लिए तीन सदस्यीय सीओए नियुक्त किया था। लेकिन अब सरकार चाहती है कि एआईएफएफ में सीओए का हस्तक्षेप खत्म हो जाये। वह सुप्रीम कोर्ट में भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) को अब एआईएफएफ प्रशासन के हवाले करने की बात कह रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कहा कि फीफा से भारतीय फुटबॉल महासंघ के निलंबन से उनकी बातचीत चल रही है।
85 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है ऐसा
85 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय फुटबॉल महासंघ को फीफा की तरफ से निलंबन किया गया है। दरअसल, सीओए ने चुनाव को अपने मुताबिक कराकर कुछ खिलाड़ियों के वोट मांगे थे, जिसे फीफा ने तीसरा पक्ष माना और इसके लिए भारतीय फुटबॉल टीम को इंचरनेशनल मुकाबलों में भाग लेने के लिए बैन कर दिया। इतना ही नहीं इस घटना के बाद अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी के अधिकार भी भारत से छीन लिया गया।
सीओए की ओर गोपाल शंकरनारायण ने कही यह बात
सीओए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फीफा ने पिछले दो वर्षों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया जब एआईएफएफ में संविधान का पालन नहीं किया जा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि यहां बदलाव के लिए सभी ने हामी भरी, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोग को ऐसा लगा कि इसे बिना मान्यता के किया जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फीफा ने इलेक्टोरल कॉलेज पर चिंता जताई है।












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