Fifa World Cup: जब दक्षिण कोरिया ने सेमीफाइनल खेल कर रचा था इतिहास

कतर समेत विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता में एशिया के पांच देश शिरकत कर रहे हैं। कतर, ईरान, सऊदी अरब, जापान और दक्षिण कोरिया। विश्वकप फुटबॉल के 92 साल के इतिहास में आज तक कोई एशियाई देश खिताब नहीं जीत सका है।

कतर समेत विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता में एशिया के पांच देश शिरकत कर रहे हैं। कतर, ईरान, सऊदी अरब, जापान और दक्षिण कोरिया। विश्वकप फुटबॉल के 92 साल के इतिहास में आज तक कोई एशियाई देश खिताब नहीं जीत सका है। इस प्रतियोगिता में यूरोप और दक्षिण अमेरिकी देशों का ही दबदबा रहा है। एशियाई देशों में सबसे अच्छा प्रदर्शन दक्षिण कोरिया का है। वह 2002 के फीफा विश्वकप के सेमीफाइनल में पहुंचा था। यह पहला मौका था जब कोई एशियाई देश सेमीफाइनल खेल रहा था।

Fifa World Cup

2002 का वर्ल्ड कप एशिया के लिए यादगार

2002 का साल एशियाई फुटबॉल के लिए यादगार है। इसके दो कारण हैं। पहला यह कि फीफा वर्ल्ड कप पहली बार एशिया में आयोजित हुआ। जापान और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से इसकी मेजबानी की। दूसरी बात यह कि विश्वकप फुटबॉल में पहली बार किसी एशियाई देश ने सेमीफाइनल में जगह बनायी थी। यह रिकॉर्ड दक्षिण कोरिया ने बनाया था। 2002 के विश्वकप में उसने पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन के अलावा विश्वविजेता रही इटली को हरा कर इतिहास रच दिया था। यह न केवल दक्षिण कोरिया के लिए बल्कि पूरे एशिया के लिए गौरव की बात थी। विश्व रैंकिंग में हालांकि ईरान (20) दक्षिण कोरिया (28) से आगे है लेकिन एशिया की फुटबॉल महाशक्ति दक्षिण कोरिया ही है। उसने एशिया से रिकॉर्ड 11 बार विश्वकप खेला है। दूसरे स्थान पर जापान है जिसने 7 विश्वकप खेले हैं। जब कि जापान की वर्ल्ड रैंकिंग 24 है। दुनिया की 20वें नम्बर की टीम ईरान ने 6 विश्वकप ही खेला है।

कई बार ऊंची रैंकिंग वाली टीमें छोटी टीमों से हार जाती हैं

कई बार ऐसा होता है कि ऊंची रैंकिंग वाली टीमें बड़े टूर्नामेंट में हार जाती हैं। इसकी वजह से वे कम पायदान वाली टीमों से पिछड़ जाती हैं। अब मिसाल के तौर पर इटली को देखा जा सकता है। इटली चार बार फुटबॉल का वर्ल्ड चैंपियन रहा है। वह अभी मौजूदा यूरोपीय चैम्पियन है। इसके बावजूद इटली 2022 के विश्वकप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सका। प्लेऑफ मैच में इटली एक छोटे से देश उत्तरी मैकडोनिया से हार (1-0) गया था। मैकडोनिया पहले युगोस्लाविया का हिस्सा था जो 1991 में आजाद हुआ था। इटली की वर्ल्ड रैंकिंग 6 है लेकिन अहम मैच में वह उत्तरी मौकडोनिया जैसी नयी टीम से हार गया। दुर्भाग्य इटली का पीछा नहीं छोड़ रहा। वह लगातार दूसरी बार विश्वकप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सका।

दक्षिण कोरिया ने यूं रचा था इतिहास

2002 के विश्वकप में दक्षिण कोरिया ग्रुप डी में था। इस ग्रुप की 3 अन्य टीमें थीं- पुर्तगाल, पौलैंड और अमेरिका। दक्षिण कोरिया को कठिन ग्रुप मिला था क्यों कि बाकि तीनों टीमें उससे मजबूत और वर्ल्ड रैंकिंग में आगे थीं। कोरिया के लिए संतोष की बात ये थी कि उसे अपने घरेलू मैदान पर ये तीनों मैच खेलने थे। कोरिया का पहला मैच पोलैंड से बुसान के एसियाड स्टेडियम में खेला गया। एशियाई खेलों के दौरान कोरिया का यह स्टेडियम बना था। मुकाबला शुरू हुआ। कोरिया के दर्शक अपनी टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए लगातार शोर कर कर रहे थे। इससे कोरियाई खिलाड़ियों का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित करते हुए पोलैंड को 2-0 से हरा दिया। पोलैंड ओलम्पिक फुटबॉल का गोल्ड मेडल (1972) विजेता था। दो बार वह रजक पदक भी जीत चुका था। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि दक्षिण कोरिया पौलेंड को हरा देगा। लेकिन यह बड़ा उलटफेर हुआ। विश्वकप फुटबॉल में दक्षिण कोरिया की यह पहली जीत थी।

जब दक्षिण कोरिया ने पुर्तगाल और इटली को हराया

पहला मैच जीतने के बाद दक्षिण कोरिया की टीम में असीम जोश का संचार हुआ। उसका अगला मैच अमेरिका से था जो1-1 से बराबर रहा। इसके बाद तो उसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। फुटबॉल की यूरोपीय महाशक्ति पुर्तगाल को दक्षिण कोरिया ने 1-0 से हरा दिया। कोरिया के लिए स्वर्णिम गोल मिडफील्डर पार्क जी सुंग ने 70वें मिनट में किया था। कोरिया 7 प्वाइंट के साथ इस ग्रुप में टॉप पर रहा। अमेरिका 4 प्वाइंट के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इस तरह इस ग्रुप से कोरिया और अमेरिका अंतिम 16 में पहुंचे। पुर्तगाल का सफर यहीं खत्म हो गया। दूसरे राउंड में 16 टीमों के बीच मुकाबला शुरू हुआ। इस दौर में दक्षिण कोरिया की भिड़ंत पूर्व चौम्पियन इटली से हुई। कोरिया के देजियोन फुटबॉल स्टेडियम में यह मैच खेला गया। कोरिया ने पहले से भी बड़ा धमाका किया। उसने इटली को जोरदार टक्कर दी। निर्धारित समय तक दोनों टीमें 1-1 से बराबर थीं। फैसले के लिए अतिरिक्त समय में मैच हुआ। दक्षिण कोरिया की तरफ 117वें मिनट में जुंग ह्वान ने गोल कर कोरिया को एक ऐतिहासिक जीत दिलायी। पूर्व विश्व चैम्पियन इटली की 1-2 से हार हो गयी। यह एशियाई फुटबॉल का सर्वोच्च प्रदर्शन था।

स्पेन को हरा कर दक्षिण कोरिया सेमीफाइनल में

अब दक्षिण कोरिया क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुका था। अंतिम चार में जाने के लिए उसका मुकाबला स्पेन से हुआ। स्पेन की टीम विश्व की टॉप टेन में शामिल थी। स्पेन के खिलाफ कोरिया ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। निर्धारित समय तक कोई टीम नहीं गोल कर सकी। तब फैसले के लिए पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया। इस बड़े मंच पर दक्षिण कोरिया ने अपने फुटबॉल कौशल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उसने पांच के पांच सभी पेनल्टी को गोल में तब्दील कर स्पेन को धाराशायी कर दिया। जब कि स्पेन सिर्फ तीन पेनल्टी को ही गोल में बदल पाया। इस तरह स्पेन को 5-3 से हरा कर दक्षिण कोरिया सेमीफाइनल में दाखिल हुआ।

सेमीफाइनल में जर्मनी से हार गया था दक्षिण कोरिया

विश्वकप फुटबॉल में दक्षिण कोरिया के इस हैरतअंगेज प्रदर्शन से बड़ी टीमों मे दहशत फैल गयी थी। उसने पुर्तगाल, इटली और स्पेन जैसी टीमों को धूल चटा दिया था। जब सेमीफाइनल का मैच शुरू हुआ तो जर्मनी को नाकों चने चबाने पड़े। हाफटाइम तक कोई गोल नहीं हो पाया था। दक्षिण कोरिया की मजबूत रक्षापंक्ति को जर्मन खिलाड़ी भेद नहीं पा रहे थे। काफी जोर लगाने के बाद 75वें मिनट मे जर्मनी के माइकल बलाक को गोल करने में कामयाबी मिल गयी। दक्षिण कोरिया 0-1 से हार गया। इसके साथ ही उसके शानदार सफर का यहीं अंत हो गया। इस हार से उसका मनोबल टूट गया। तीसरे स्थान के मैच में वह तुर्की से भी 2-3 से हार गया। दक्षिण कोरिया भले हार गया लेकिन उसने फुटबॉल की दुनिया में एशिया को नयी पहचान दिलायी।

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