धमकी मामले में पत्रकार को लेकर रिद्धिमान साहा ने तोड़ी चुप्पी, नाम के खुलासे पर जानें क्या कहा
नई दिल्ली। भारत के दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा पिछले कुछ दिनों से लगातार खबरों में बने हुए हैं, जहां पर टेस्ट टीम से बाहर होने पर टीम मैनेजमेंट और बीसीसीआई अध्यक्ष पर दिये गये उनके बयानों ने सुर्खियां बटोरी तो वहीं पर एक सीनियर पत्रकार की ओर से उन्हें इंटरव्यू नहीं देने पर धमकाने का मामला भी सामने आया। पत्रकार की ओर से साहा को धमकाने के मामले पर इस पूर्व विकेटकीपर ने सोशल मीडिया से व्हाटसएप चैट के स्क्रीनशॉट शेयर किये थे, जिसके बाद कई दिग्गज क्रिकेटर्स ने उनके समर्थन में उतरते हुए उनसे पत्रकार की पहचान जाहिर करने की मांग की थी।

अब इस मामले पर रिद्धिमान साहा ने सोमवार को चुप्पी तोड़ी और बताया कि वो कभी भी पत्रकार की पहचान को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे और न ही ऐसा करते नजर आयेंगे। हालांकि अगर बीसीसीआई उनसे इस मामले में सवाल करती तो जरूर उन्हें इसकी जानकारी दे सकते हैं।
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बीसीसीआई करेगी मामले की जांच
उल्लेखनीय है कि साहा के इस बयान से पहले बीसीसीआई ट्रेजरर अरुण धूमल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा था कि बोर्ड इसको लेकर साहा से बात करेगा और कहेगा कि वो पत्रकार की पहचान जारी करें और वो संदेश भी दिखायें ताकि उन्हें भेजने का संदर्भ पता लग सके।
उन्होंने कहा था,'हां, हम रिद्धिमान से उस ट्वीट के बारे में पूछने वाले हैं और पता करने वाले हैं कि असल में क्या हुआ था। हमें यह पता करने की जरूरत है कि क्या उन्हें धमकाया गया था और उनके इस ट्वीट के पीछे का संदर्भ क्या है। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। बीसीसीआई सचिव जय शाह इस मामले में साहा से बात करते नजर आयेंगे।'

कभी नहीं थी नाम सार्वजनिक करने की मंशा
हालांकि रिद्धिमान ने साफ किया है कि वो उस पत्रकार का नाम सार्वजनिक नहीं करना नहीं चाहते हैं, हालांकि अगर बीसीसीआई पूछती है तो वो जरूर बतायेंगे। साहा ने साफ किया कि उनके ऐसा करने के पीछे की वजह पत्रकार के काम को सामने लाना था न कि उसका करियर बर्बाद करना।
इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए साहा ने कहा,'मुझे अभी तक बीसीसीआई की तरफ से कोई संदेश नहीं मिला है, अगर वो मुझसे नाम का खुलासा करने को कहेंगे तो मैं उन्हें यही बताउंगा कि मैं किसी को नीचे गिराने के लिये कभी भी किसी का करियर खराब नहीं करना चाहता। यही वजह है कि मैंने अपने ट्वीट में उनका नाम नहीं लिखा था। यह मेरे माता-पिता ने नहीं सिखाया। मेरे ट्वीट का मुख्य उद्देश्य था कि उस चीज का भांडा फोड़ा जा सके कि मीडिया में कुछ सम्मानित पत्रकार खिलाड़ियों की इच्छा का सम्मान नहीं कर रहे हैं और ऐसी चीजें कर रहे हैं बस।'

नहीं चाहता था कि दूसरे प्लेयर्स के साथ हो
साहा ने आगे बात करते हुए कहा कि यह सही नहीं होगा, मैं अपने ट्वीट के जरिये सिर्फ घटना के बारे में जानकारी देना चाहता था। जिस पत्रकार ने यह किया है वो इस बारे में काफी अच्छे से जानता है। मैंने वो ट्वीट सिर्फ इस वजह से पोस्ट किये क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि कोई खिलाड़ी ऐसी चीजों का सामना करे। मैं बस यही बताना चाहता था कि जो मेरे साथ हुआ वो गलत है और किसी को भी ऐसा दोबारा नहीं करना चाहिये।

ओझा ने किया था साहा को फोन
गौरतलब है कि इस मामले पर साहा को कई पूर्व क्रिकेटर्स और पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का समर्थन मिला है। साहा ने बताया कि इस मामले पर पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा (मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट संघ की ओर से आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के प्रतिनिधि) ने फोन भी किया था।
उन्होंने कहा,'ओझा ने मुझे फोन किया था और कहा था कि मैं तुमसे कुछ भी ऐसा नहीं पूछूंगा जो तुम्हें निजी लगता है। अगर तुम्हे लगता है कि इस मामले को आगे बढ़ाना चाहिये या फिर कानूनी कार्रवाई करनी है तो बीसीसीआई तुम्हारा साथ देगी। मैंने उन्हें तभी बता दिया था कि मैं क्या करना चाहता हूं और उसके पीछे मेरे क्या कारण है। उन्होंने मेरी बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से मेरा ही निर्णय है।'












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