छत्तीसगढ़ के क्रिकेटर ने जब मियांदाद के सिक्स का बदला लेकर दिलायी थी भारत को रोमांचकारी जीत
छत्तीसगढ़ के क्रिकेटर राजेश चौहान ने छक्का जड़ते हुए भारत को जीत दिलाई थी, हालांकि वह गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे।

IND vs NZ 2nd ODI: रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में पहली बार कोई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेल गया। क्रिकेट के आकाश पर छत्तीसगढ़ राज्य ने भी अपनी चमक बिखेरी। न्यूजीलैंड- भारत एकदिवसीय मैच का गवाह बनना इस राज्य के खेल प्रेमियों के लिए यादगार लम्हा है। इस मौके पर वे अपने राज्य के पूर्व क्रिकेटरों के योगदान को भी याद कर रहे हैं। भिलाई के रहने वाले राजेश चौहान भारत के लिए 21 टेस्ट और 35 एकदिवसीय मैच खेल चुके हैं। 1993 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। उस समय छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा था। राजेश चौहान को इसलिए याद किया जाता है कि क्यों कि उन्होंने जावेद मियांदाद के छक्के का बदला लेकर उसी अंदाज में भारत को जीत दिलायी थी। जब पाकिस्तान अपने को जीता हुआ समझ रहा था तभी राजेश चौहान ने आखिरी ओवर में छक्का लगा पाकिस्तान को धूल चटायी थी। (Photo: Twitter)
छत्तीसगढ़ के टेस्ट क्रिकेटर राजेश चौहान
भिलाई अब छत्तीसगढ़ में है। इस्पात कारखाना के लिए इस शहर को देश और दुनिया में जाना जाता है। राजेश चौहान इसी शहर में पले और पढ़े। कॉलेज स्तर पर क्रिकेट खेलते थे और उनकी ऑफ स्पिन गेंदबाजी का बड़ा नाम था। फिर वे मध्य प्रदेश रणजी टीम में चुने गये। 1993 में उनका चयन टेस्ट टीम में हुआ। उस समय भारतीय टीम में अनिल कुंबले, राजेश चौहान और वैंकटपति राजू स्पिनर के रूप में खेलते थे। अब बात करते हैं उस ऐतिहासिक लम्हे की जब राजेश चौहान ने 11 साल बाद मियांदाद के दिये दर्द से भारत के खेलप्रेमियों को निजात दिलायी थी।
पाकिस्तानी दर्शकों का उत्पात
कराची, 30 सितम्बर 1997, भारत-पाकिस्तान एकदिवसीय मैच। कराची के नेशनल स्टेडियम में बहुत विकट परिस्थितियों में यह मैच खेला गया था। भारत को जीत के लिए 47 ओवर में 266 रन बनाने थे। भारत के कप्तान सचिन तेंदुलकर थे जब कि पाकिस्तान के सईद अनवर। पाकिस्तानी दर्शकों के उपद्रव के कारण चार बार मैच रोका गया था। जब भारतीय टीम फील्डिंग कर रही थी तब उन पर उत्पाती दर्शकों ने पत्थर फेंके थे। स्थिति इतनी खराब हो गयी कि एक बार तो भारतीय टीम खेल का बहिष्कार करने के लिए मैदान से बाहर निकल गयी। समय की खूब बर्बादी हुई। थर्ड अम्पायर किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए बहुत देर लगा रहे थे। लेकिन पाकिस्तान की तमाम तिकड़मबाजी किसी काम न आय़ी। भारत ने बहुत ही रोमांचक तरीके इस मैच को जीत कर पाकिस्तान की हेकड़ी ढीली कर दी।
रोमांचक कहानी की शुरुआत
भारत ने 266 के लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया। सौरव गांगुली और सचिन ने पारी शुरू की। सचिन 18 गेंदों पर 21 रन बना कर आउट हो गये। लेकिन गांगुली ने पिच पर लंगर डाल दिया। उन्होंने पाकिस्तान गेंदबाजों की जम कर खबर ली। 96 गेंदों पर 89 रनों की पारी खेली। विनोद कांबली ने भी उनका अच्छा साथ दिया। कांबली ने 53 रन बनाये। भारत का तीसरा विकेट 179 पर गिरा। मैच पर भारत की पकड़ मजबूत थी। लेकिन इसके बाद अजहरुद्दीन (8) और अजय जडेजा (8) के विकेट जल्दी गिर गये। 195 के स्कोर पर 5 बल्लेबाज लौट चुके थे। पाकिस्तान मैच में वापस आने लगा। लेकिन भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज सबा करीम और रॉबिन सिंह ने एक बार फिर भारतीय पारी को जमाया। दोनों ने छठे विकेट के लिए 62 रनों की साझेदारी कर मैच का पलड़ा फिर भारत की तरफ झुका दिया। 257 के स्कोर पर सबा करीम को वकार यूनूस ने बोल्ड कर दिया। इसके बाद राजेश चौहान मैदान पर उतरे। भारत की पारी का यह 46 वां ओवर था। वकार के इस ओवर में एक गेंद और बाकी थी जो राजेश चौहान को खेलनी थी। अब भारत को जीत के लिए 7 गेंद में 9 रन बनाने थे।
जब वकार ने राजेश चौहान को डराने की कोशिश की
वकार युनूस उस समय दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में से एक थे। उनके नाम का बड़ा खौफ था। ऐसे में भारत के ऑफ स्पिनर राजेश चौहान को उनका सामना करना था। वकार को आखिर गेंद फेंकनी थी। वे रन अप पर दौड़े लेकिन अचानक रुक गये। शायद वे राजेश चौहान का ध्यान भंग करना चाहते थे। लेकिन चौहान च्विंगम चबाते हुए एकदम बेपरवाह बने रहे। उन्होंने घूम कर मैदान पर जमी फील्डिंग का जायजा लिया। जैसे वे जता रहे थे कि मुझे वकार के रफ्तार की परवाह नहीं। सचमुच चौहान बेखौफ खेलने उतरे थे। 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले वकार के सामने वे बिना हेलमेट के खेल रहे थे। वकार ने हड़बड़ाहट में आखिरी गेंद ऑफ स्टंप से बहुत बाहर फेंक दी जिस पर चौहान ने एक रन ले लिया। अब भारत को अंतिम ओवर (47वां) में जीत के लिए 8 रन बनाने थे। विकेट पर रॉबिन सिंह और राजेश चौहान की जोड़ी मौजूद थी।
राजेश चौहान की जांबाजी
सकलैन मुश्ताक 47वां ओवर फेंकने आये। उस समय सकलेन की स्पिन गेंदबाजी का बड़ा जलवा था। उनकी सटीक गेंदबाजी के सामने रन बनाना मुश्किल माना जाता था। स्ट्राइक राजेश चौहान के पास थी। सब लोग यही सोच रहे थे कि चौहान एक रन लेकर स्ट्राइक रॉबिन सिंह को सौंप देंगे। रॉबिन सिंह उस समय भारत के मशहूर पावर हिटर थे। छक्का मारने में महारत हासिल थी। उनकी आंखें भी जमी हुई थीं। वे 31 गेंदों पर 30 रन बना कर खेल रहे थे। लेकिन राजेश चौहान के दिमाग में कुछ अगल चल रहा था। तनाव के इस मोड़ सकलैन भी नर्वस थे। इसी ओवर से जीत और हार का फैसला होना था। दबाव सकलैन पर हावी था।
राजेश चौहान का करिश्माई छक्का
उन्होंने ओवर की पहली गेंद फेंकी जो फुलटॉस हो गयी। राजेश चौहान ने आगे बढ़ कर एक जोरदार शॉट खेला। गेंद छक्के के लिए बाउंड्री के पार चली गयी। उत्पात मचाने वाले पाकिस्तानी दर्शकों को जैसे सांप सूंघ गया। छक्का लगते ही पूरे स्टेडियम में खामोशी छा गयी। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि विश्वस्तरीय स्पिनर सकलैन को कोई पुछल्ला बल्लेबाज छक्का मार सकता है। लेकिन ये करिश्मा हो चुका था। दूसरी गेंद को चौहान ने लेग साइड में विकेट के पीछे खेला। गेंद ज्यादा दूर नहीं गयी थी और वहां फील्डर मौजूद था। फिर भी चौहान एक रन के लिए दौड़ गये। फील्डर ने तेजी से गेंद विकेटकीपर मोइन खान की तरफ फेंकी। मोइन जब तक गिल्लियां बिखेरते तब तक रॉबिन सिंह एक जोरदार डाइव लगा कर क्रीज में पहुंच चुके थे। रॉबिन सिंह को उस समय भारत का सर्वश्रेष्ठ फील्डर माना जाता था। रनआउट के लिए रिव्यू लिया गया । रॉबिन नॉटआउट करार दिये गये। अब जीत के लिए चार गेंदों पर एक रन चाहिए था। तीसरी गेंद पर रॉबिन सिंह ने एक रन लेकर भारत को एक रोमांचकारी जीत जीत दिला दी। सकलैन मुश्ताक ने कई साल बाद एक इंटरव्यू में कहा था, मैं राजेश चौहान को उस छक्के को कभी भूल नहीं पाया। इसकी टीस हमेशा मेरे दिल में रही।












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