हैप्पी बर्थडे सुनील गावस्कर: जीवन में क्रिकेटर नहीं बल्कि मछुआरा बनते लिटिल मास्टर, बचपन में हुई थी यह घटना

नई दिल्ली, जुलाई 10। भारतीय क्रिकेट में जब भी दिग्गज खिलाड़ियों का जिक्र होता है तो सुनील गावस्कर का नाम जरूर याद किया जाता है। सुनील गावस्कर का आज 73वां जन्मदिन है। 10 जुलाई 1949 को उनका जन्म हुआ था। भारतीय क्रिकेट के लिए उनके योगदान को हमेशा सराहा जाता है। सुनील गावस्कर ने 1971 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और 1974 में उन्होंने वनडे में डेब्यू किया था। सुनील गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं।

माता-पिता से बिछड़ते-बिछड़ते बचे थे गावस्कर

माता-पिता से बिछड़ते-बिछड़ते बचे थे गावस्कर

लिटिल मास्टर के नाम से फेमस सुनील गावस्कर के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े एक अहम किस्से के बारे में बताते हैं जो उन्होंने अपनी किताब में शेयर किया था। दरअसल, सुनील गावस्कर ने अपनी बायोग्राफी में बताया है कि जब वो पैदा हुए थे तो अपने माता-पिता बिछड़ने से बच गए थे और अगर वो बिछड़ जाते तो वो कभी क्रिकेटर नहीं बन पाते बल्कि एक मछुआरा बनते।

सुनील गावस्कर ने क्या कहा है अपनी किताब में?

सुनील गावस्कर ने क्या कहा है अपनी किताब में?

सुनील गावस्कर ने अपनी किताब में बताया था कि उनके जन्म के बाद वो गलती से एक मछुआरे के बच्चे के साथ बदल गए थे, लेकिन उनके काका नारायण मासुकर की वजह से ही उनकी पहचान हो सकी थी और फिर से मुझे मेरे माता-पिता के पास लाया गया था। गावस्कर ने किताब में कहा है, "मैं कभी क्रिकेटर नहीं बन पाता और यह किताब निश्चित रूप से नहीं लिखी जाती, अगर मेरे काका की बाज जैसी नजरें मुझे नहीं पहचान पाती। ऐसा लगता है कि नन काका ही मुझे इस जीवन में लेकर आए थे। नन काका ने ही मुझे पहले दिन अस्पताल में देखा था और उन्होंने मेरे कान पर एक बर्थमार्क बना दिया था, इसी वजह से मैं एक मछुआरे के बच्चे से बदलने से बच गया था।

कान पर काका ने बनाया था निशान

कान पर काका ने बनाया था निशान

सुनील गावस्कर ने बताया है कि उनके जन्म के बाद उनके काका ने उन्हें सबसे पहले देखा था तो उस वक्त उन्होंने उनके कान के पास एक निशान बना दिया था। नन काका जब अगली बार बच्चे से मिलने आए थे तो उन्होंने उस बच्चे के कान पर निशान नहीं पाया तो वो समझ गए कि यह बच्चा बदल गया है, उन्होंने फिर इस बात की जानकारी सुनील के परिजनों के दी थी। उनके काका की वजह से ही सुनील गावस्कर फिर से अपने परिवार के पास आ गए थे।

नर्स की लापरवाही के चलते हुई थी घटना

नर्स की लापरवाही के चलते हुई थी घटना

इस घटना को लेकर सुनील गावस्कर ने आगे बताया है कि यह घटना नर्स की लापरवाही के चलते हुई थी। वो बताते हैं कि अस्पताल की नर्स ने उन्हें गलती से मछुआरन महिला के पास सुला दिया था। गावस्कर कहते हैं कि हालांकि हो सकता है कि वो बच्चों को नहलाते वक्त बदल गए होंगे, क्योंकि उस दिन चाचा ने ध्यान नहीं दिया होता तो वो क्रिकेटर नहीं बन पाते।

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