Sachin Tendulkar 50th Birthday: जब डॉन ब्रैडमैन के जवाब से सचिन रह गये थे हक्के-बक्के
सर डॉन ब्रैडमैन का मानना था कि सचिन उनकी तरह ही बल्लेबाजी करते हैं। सर डॉन ने सचिन के खेल की तारीफ तब की थी, जब उनकी उम्र 21-22 साल की थी। उन्होंने अपने जन्मदिन पर सचिन को खास तौर से आमंत्रित किया था।

Sachin Tendulkar Birthday: IPL 2023 के दौरान सचिन तेंदुलकर के 50वें जन्मदिन से पहले ही उत्सव का माहौल बन गया है। डगआउट में मौजूद सचिन साथी खिलाड़ियों के साथ जन्मदिन का केक काट रहे हैं। खुशी मना रहे हैं। सचिन को इस रंग में देखकर उनके प्रशंसक बेहद खुश हैं।
एक थे ब्रैडमैन, एक हैं सचिन
सर डॉन ब्रैडमैन क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाज हैं। उनका मानना था कि सचिन उनकी तरह ही बल्लेबाजी करते हैं। सर डॉन ने सचिन के खेल की तारीफ तब की थी, जब उनकी उम्र 21-22 साल की थी। 1998 में सर डॉन ब्रैडमैन की उम्र 90 साल थी। तब साउथ ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट एसोसिएशन ने उनके 90वें जन्मदिन को धूमधाम से मनाने का फैसला किया था। उस समय वे ऑस्ट्रेलिया के सबसे सम्मानित और लोकप्रिय जीवित नागरिक थे।
इस जन्मदिन समारोह में देश और दुनिया से करीब 1300 विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। डॉन ब्रैडमैन चूंकि सचिन में अपने खेल की झलक देखते थे, इसलिए उन्होंने सचिन को खास तौर से आमंत्रित किया था। सचिन एकमात्र विदेशी क्रिकेटर थे जिन्हें सर डॉन ने अपनी जन्मदिन पार्टी में बुलाया था। तब सचिन की उम्र 25 साल थी। इस छोटी उम्र में ही सचिन की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति बुलंदी पर पहुंच गयी थी। सर डॉन और सचिन की मुलाकात कितनी विशिष्ट घटना है, इस बात को समझने के लिए यह प्रसंग जरूरी है।
नेल्सन मंडेला ब्रैडमैन के प्रशंसक और ब्रैडमैन सचिन के
डॉन ब्रैडमैन (1928-1948) क्रिकेट के देवदूत थे। उन्होंने जो क्रिकेट खेली उसकी आज तक कोई बराबरी नहीं कर सका। उन्होंने पूरी दुनिया को अपने खेल से मंत्रमुग्ध कर दिया था। नेल्सन मंडेला को दक्षिण अफ्रीका का गांधी कहा जाता है। रंगभेद नीति का विरोध करने के कारण दक्षिण अफ्रीका की गोरी सरकार ने उन्हें 27 साल के लिए जेल में डाल दिया था। 1986 में ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री मैलकम फ्रेजर दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गये थे।
नेल्सन मंडेला उस समय केपटाउन की पोल्समूर जेल में बंद थे। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री फ्रेजर उनसे मिलने जेल में पहुंचे। नेल्सन मंडेला जैसे ही उनके सामने आये, उन्होंने पहला सवाल पूछा, कहिए मिस्टर फ्रेजर क्या डॉन ब्रैडमैन अभी जिंदा हैं? ये सवाल सुनकर मैलकम फ्रेजर चौंक गये ? ये क्या ? मंडेला ने न रंगभेद के अन्याय की बात की, न लोकतंत्र की रक्षा की बात की, एक क्रिकेटर की बात कहां से आ गयी? लेकिन मंडेला को जेल में अपनी तकलीफों से अधिक ये जानने में दिलचस्पी थी कि डॉन ब्रैडमैन का हालचाल कैसा है?
जब मैलकम फ्रेजर ने उन्हें बया कि सर डॉन बिल्कुल सही सलामत हैं तो नेल्सन मंडेला बहुत खुश हुए थे। इससे समझा जा सकता है कि डॉन ब्रैडमैन दुनिया की कितनी अजीम हस्ती थे। अगर ये अजीम हस्ती खुद की छवि सचिन में देखता था तो यह कितने गर्व की बात है।
जब सचिन को मिली निमंत्रण की जानकारी
27 अगस्त 1998 को सर डॉन ब्रैडमैन का जन्मदिन समारोह था। सचिन को जब इसके लिए निमंत्रण मिला उस समय वे चेन्नई के क्रिकेट कैंप में थे। उनके मैनेजर ने निमंत्रण के बारे में बताया। इस निमंत्रण पत्र में सर डॉन ब्रैडमैन ने सचिन से यह पूछा था, क्या आप मेरे घर पर आने के लिए समय निकाल सकते हैं ? सचिन को तो बिन मांगी मुराद मिल गयी। वे खुशी से उछल पड़े। दुनिया के महानतम क्रिकेटर के निमंत्रण पर भला कौन नहीं फूले समाएगा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जाने की तैयारी शुरू कर दी।
सचिन एकमात्र विदेशी क्रिकेट थे जिन्हें यह सम्मान मिला था। एक महान शख्सियत से अकेले मिलने में सचिन को घबराहट महसूस हो रही थी। फिर उन्हें मालूम हुआ कि शेन वार्न को भी इस समारोह में आमंत्रित किया गया है। इतना जानना था कि सचिन ने शेन वार्न को फोन कर साथ चलने के लिए राजी कर लिया।
वार्न खुद कार चलाकर सचिन को ले गये सर डॉन के घर
शेन वार्न मस्तमौला और बेधड़क खिलाड़ी थे। लेकिन वे भी डॉन ब्रैडमैन का नाम सुनकर नर्वस थे। सचिन ऑस्ट्रेलिया पहुंचे और शेन वार्न की कार में सवार होकर एडिलेड स्थिति सर डॉन के घर जाने के लिए रवाना हुए। कार खुद वार्न चला रहे थे। सफर के दौरान शेन वार्न ये सोच कर घबराये हुए थे कि भला वे कैसे एक लिविंग लिजेंड से बात कर सकते हैं ? क्या सवाल पूछेंगे, ये समझ में नहीं आ रहा था। तब वार्न ने सचिन को मनाया कि बल्लेबाज होने के नाते वे ही सर डॉन से सवाल पूछेंगे। सचिन और वार्न से मिलकर सर डॉन ब्रैडमैन बहुत खुश हुए।
जब सर डॉन के जवाब से सचिन हुए हक्के-बक्के
वायदे के मुताबिक सचिन को सवाल करना था। 1990 के दशक में क्रिकेट की प्रैक्टिस आज की तरह आधुनिक नहीं थी। बल्लेबाज को खुद ज्यादा मेहनत करनी पड़ती थी। ये बात सचिन के दिमाग में थी। सचिन ने सर डॉन से पूछा, आप बड़े मैच से पहले खुद को कैसे तैयार करते थे ? तब उन्होंने सहज भाव से कहा, मैं एक स्टॉकब्रोकिंग कंपनी में मुलाजिम था। (पहले सेना में भी थे लेकिन अस्वस्थता के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी थी।)
जब एडिलेड (घर) में मैच होता था तब मैच शुरू होने से कुछ पहले अपने काम पर चला जाता था। कुछ देर काम करता। फिर मैदान पर आता और पैड बांध कर खेलने उतर जाता। प्रैक्टिस जैसी कोई बात नहीं थी। यानी जब ब्रैडमैन को अपने होमटाउन में मैच खेलना होता था तब उन्हें अपने ऑफिस का भी कुछ काम करना पड़ता था।
अगर पारी बड़ी हुई तभी पूरे दिन का छुट्टी मिलती थी। संयोग से यदि पारी खत्म होने के बाद कुछ समय बच जाता तो फिर ऑफिस भी लौटना होता था। सचिन ये जवाब सुनकर हक्के बक्के रह रह गये। इतनी कठिन परिस्थितियों में खेलकर सर डॉन ने यदि टेस्ट क्रिकेट में 99.94 का दुर्लभ औसत हासिल किया है तो यह आठवां आश्चर्य है। इसकी कभी बराबरी नहीं हो सकती। इस गुरु ज्ञान ने सचिन तेंदुलकर को एक दक्ष बल्लेबाज बनने में बहुत मदद पहुंचाई थी।












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