Virat Kohli की कहानी आंकड़ों की जुबानी, तलवारबाजी करने वाले रविन्द्र जडेजा ने छोड़ दिया पीछे

Virat Kohli: विराट कोहली को वर्ल्ड क्रिकेट में किंग कोहली कहा जाता है और यह नाम उन्होंने अपने धमाकेदार प्रदर्शन के आधार पर हासिल किया है। उन्होंने विश्व के हर कोने में जाकर गेंदबाजों की धुनाई करते हुए अपना लोहा मनवाने का कार्य किया है।

हालांकि पिछले कई सालों से कोहली टेस्ट क्रिकेट में फ्लॉप रहे हैं। 36 वर्षीय विराट कोहली अपने टेस्ट करियर में 31 साल की उम्र तक पीक पर थे। पिछले पांच सालों से उनका बल्ला लगभग खामोश ही रहा है लेकिन टीम में उनको नियमित मौके मिलते रहे हैं।

Virat Kohli

साल 2020 से लेकर 2024 तक के आंकड़ों को देखा जाए, तो हैरान करने वाली तस्वीर सामने आती है। कोहली का प्रदर्शन निरंतर गिरता चला गया है। अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा को खराब खेल के कारण बाहर कर दिया गया लेकिन कोहली बड़ा नाम होने के कारण टीम में बने रहे।

स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि पिछले पांच सालों में कोहली से बेहतर औसत के साथ रन तो रविन्द्र जडेजा ने बनाए हैं, जो एक प्रोपर बल्लेबाज भी नहीं है। उनको बतौर ऑल राउंडर टीम में रखा जाता है। कोहली और जडेजा के बीच आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन काफी दिलचस्प है।

Virat Kohli के आंकड़े

विराट कोहली ने 2020 से लेकर 2024 तक टेस्ट क्रिकेट में कुल 38 टेस्ट मैचों की 67 पारियों में बल्लेबाजी की है। इस दौरान उन्होंने 2005 रन अपने नाम किये हैं। उनके बल्ले से 3 शतक और 9 अर्धशतक आए हैं। कोहली का औसत 31 से थोड़ा ऊपर रहा है और बेस्ट स्कोर 186 का है। ये आंकड़े उनके नाम के अनुसार तो हैरान करने वाले हैं।

जडेजा ने Virat Kohli को छोड़ा पीछे

अब जडेजा के आंकड़ों के ऊपर नज़र दौड़ाई जाए, तो कहानी अलग है। जडेजा ने इस समयकाल के दौरान कुल 31 मैच खेले और 47 पारियों में ही बल्लेबाजी करने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने 1487 रन बनाए लेकिन औसत दिलचस्प रहा है। जडेजा का औसत 34 से ज्यादा का रहा है। यहाँ कोहली को उन्होंने पीछे छोड़ दिया है। अगर इसी औसत से वह 67 पारियां खेलते, तो कोहली से ज्यादा रन बना डालते। जडेजा ने भी 3 शतक जड़े और 8 फिफ्टी भी उनके बल्ले से आई। नाबाद 175 रन उनका बेस्ट रहा।

Virat Kohli के ग्राफ में लगातार आई है गिरावट

इन आंकड़ों से समझना होगा कि कोहली का ग्राफ लगातार गिरता चला गया है। इससे एक बात और साफ़ हो जाती है कि वह 31 साल की उम्र से ही टेस्ट क्रिकेट में फ्लॉप हो रहे हैं। जो भी आंकड़े और रन उन्होंने बनाए थे, सभी 31 वर्ष तक बने थे पिछले 5 सालों में तो उनके रनों से ज्यादा अग्रेशन मैदान पर दिखाई दिया है।

युवा खिलाड़ियों के साथ अन्याय

स्थिति चिंताजनक है और बीसीसीआई को अब देखना होगा क्योंकि घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बना रहे युवाओं की उम्र जा रही है। उनको मौका नहीं देना अन्याय से कम नहीं होगा। 38 टेस्ट में मौका देने का कोई फायदा नहीं हुआ है। रन आने होते, तो अब तक आ चुके होते। उम्र भी तेजी से बढ़ रही है लेकिन रनों का अकाल बरकरार है।

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