विनोद राय ने कहा- विराट कोहली और अनिल कुंबले के बीच कोई मतभेद नहीं था

नई दिल्ली, 8 अप्रैल: बीसीसीआई की प्रशासकों की समिति के पूर्व मुखिया विनोद राय ने विराट कोहली और भारत के पूर्व कोच अनिल कुंबले के बीच के संबंधों पर बात की है। विनोद राय ने कहा है कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया जिससे यह पता चले कि कोहली और कुंबले के बीच में कोई अनबन थी। विनोद राय ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए यह बात कही है।

Vinod Rai denys any differences between Virat Kohli and Anil Kumble

यहां विनोद राय कहते हैं कि उन दोनों के बीच में कोई मतभेद नहीं था। मैंने अपनी किताब में केवल इतना कहा है कि जब अनिल कुंबले के कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू करने का समय आया तो हमने टीम के साथ बातचीत की और तब विराट कोहली ने कहा कि टीम के जूनियर मेंबर अनिल कुंबले से थोड़ा डरते हैं क्योंकि वह बहुत अनुशासन रखते हैं। कोहली और कुंबले के बीच में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं था। ना तो मेरे पास इस तरह की कोई जानकारी थी और ना ही ऐसा कुछ मैंने लिखा है।

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इसके साथ ही विनोद राय यह भी कहते हैं कि कोच को सेलेक्ट करने का फैसला उनकी जिम्मेदारी नहीं थी बल्कि इसके लिए एक अलग समिति काम करती थी जिसका नाम क्रिकेट सलाहकार समिति था। विनोद राय कहते हैं कि बोर्ड ने विराट कोहली को मनाने की कोशिश जरूर की थी लेकिन कोच को नियुक्त करने का फैसला सीएससी का था जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे खिलाड़ी थे जिन्होंने अनिल कुंबले को एक कोच के तौर पर पहले नियुक्त किया था।

Vinod Rai denys any differences between Virat Kohli and Anil Kumble

राय ने बताया कि सचिन तेंदुलकर जैसे वरिष्ठ दिग्गजों को नए कोच के मामले पर टीम और कोच से बात करने के लिए कहा गया था क्योंकि उसका प्रभाव कुछ और होता, अगर हम बाहरी लोग टीम और कोच से इस मामले पर बात करते तो उसका प्रभाव कुछ और होता। इसलिए हमने वरिष्ठ पूर्व खिलाड़ियों को टीम से बात करने के लिए कहा था।

विनोद राय यह भी कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं है अनिल कुंबले अच्छे कोच थे। इसी वजह से उनका चयन किया गया था। यह दुर्भाग्य की बात है कि उनको केवल 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला। विनोद राय यह भी कहते हैं कि मेरी किताब किसी सूत्र की कही गई बातों के ऊपर आधारित नहीं है। यह उनकी व्यक्तिगत जानकारी के ऊपर आधारित है।

वे कहते हैं कि, सच तो यह है कि सीएससी को दोबारा इसलिए चुना गया था कि ताकि वह अनिल कुंबले को ही कोच के तौर पर नियुक्ति दे सकें और मैंने अपनी किताब में यह लिखा है कि कुंबले काफी गरिमा वाले और प्रोफेशनल इंसान है।

आईपीएल में मची हलचल के चलते भारतीय क्रिकेट एक मुश्किल दौर से गुजर रहा था तब सुप्रीम कोर्ट ने अपने कदम आगे बढ़ाते हुए बीसीसीआई के कामकाज को संभालने की जिम्मेदारी पूर्व कैग विनोद राय को दी थी।

इसी पीछे विनोद राय ने सौरव गांगुली और विराट कोहली के बीच के मतभेद कथित मतभेद पर भी बात की उन्होंने कहा मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को इस किताब में शेयर किया है। सभी चीजें मेरे कार्यकाल की हैं और उसके बाद मैंने केवल एक ही चीज इस किताब में लिखी है। वह यह कि बीसीसीआई के अध्यक्ष भारत के पूर्व कप्तान हैं और अपने आप में एक दिग्गज हैं और मौजूदा कप्तान विराट कोहली थे और अगर आपको पता हो तब टीम के मेंटर महेंद्र सिंह धोनी थे।

"तो आप जब भी कप्तान बदलते हैं तब मैनेजमेंट, टीम और और बीसीसीआई अध्यक्ष के बीच में एक संवाद स्थापित करते हैं ताकि एक कप्तान से दूसरे कप्तान के बीच का ट्रांजिशन काफी तरलता के साथ हो सके और ऐसा भूतकाल में दो बार हुआ भी है, और आपको पता हो महेंद्र सिंह धोनी ने पहले बोर्ड से बात की और फिर विराट कोहली को कप्तानी सौंप दी। इस तरह से एक पूर्व कप्तान खेल रहा था और दूसरे खिलाड़ी को कप्तानी सौंप रहा था ताकि वह उस खिलाड़ी को एक कप्तान के तौर पर गाइड भी कर सके। धोनी ने यही चीज चेन्नई सुपर किंग्स के दौरान दोबारा की है। उन्होंने अपने आपको टीम में एक खिलाड़ी के तौर पर बनाए रखते हुए अपनी कप्तानी सौंप दी है और यह कुछ ऐसी बात है जो वास्तव में होनी चाहिए।

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