टीम इंडिया में हो रहे 'पक्षपात' पर बिफरे वेंकटेश प्रसाद, सरेआम उधेड़ दी केएल राहुल की बखिया
उससे बेहतर तो मयंक और विहारी हैं, टीम इंडिया में हो रहे 'पक्षपात' पर भारत के पूर्व तेज गेंदबाज प्रसाद ने उधेड़ी केएल राहुल की बखिया

टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने केएल राहुल को टेस्ट क्रिकेट में दिए जा रहे लंबे मौकों पर सवाल उठाया है। हाल ही बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ ने राहुल के पक्ष में जो बयान दिया है उससे साबित है कि इस बल्लेबाज को टीम पूरी तरह बैक करने के मूड में है जैसे विराट कोहली को किया था। वैसे कोहली को अभी भी बैक किया जा रहा है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में वे अपनी फॉर्म में अभी तक नहीं आए हैं। हालांकि कोहली के पास उनके सपोर्ट में उनके आंकड़े हैं पर राहुल के पास वो भी नहीं हैं। ऐसे में शुभमन गिल और सरफराज खान के प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए प्रसाद ने कहा कि कई योग्य खिलाड़ी इंतजार कर रहे हैं।

आठ टेस्ट पारियों में 23 का उच्चतम स्कोर
ऐसे में शुभमन गिल और सरफराज खान के प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए प्रसाद ने कहा कि कई योग्य खिलाड़ी इंतजार कर रहे हैं। राहुल नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रहे टेस्ट की पहली पारी में 20 रन पर आउट हो गए थे। जनवरी 2022 में जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने अर्धशतक के बाद से हाइरेटिड बल्लेबाज ने आठ टेस्ट पारियों में 23 का उच्चतम स्कोर दर्ज किया है।

वेंकटेश प्रसाद ने केएल राहुल पर लिखा
शनिवार, 11 फरवरी को ट्विटर हैंडल पर प्रसाद ने राहुल पर स्पष्ट लिखा है:
"केएल राहुल की प्रतिभा और क्षमता के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है, लेकिन दुख की बात है कि उनका प्रदर्शन काफी नीचे रहा है। 46 टेस्ट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 8 साल से ज्यादा बिताने के बाद 34 का टेस्ट औसत साधारण है। बहुत से ऐसे लोगों को इतने मौके नहीं दिए गए हैं। खासतौर पर तब जब टॉप फॉर्म में बहुत सारे खिलाड़ी इंतजार कर रहे हों। शुभमन गिल शानदार फॉर्म में हैं, सरफराज एफसी क्रिकेट में शतक स्कोर कर रहे हैं और कई ऐसे हैं जो राहुल से पहले एक मौके के हकदार हैं। कुछ लोग भाग्यशाली होते हैं कि उन्हें सफल होने तक अंतहीन मौके दिए जाते हैं जबकि कुछ को ऐसा करने की इजाजत तक नहीं होती।"
उससे बेहतर तो मयंक और विहारी हैं
गिल के बारे में सभी जानते हैं। लेकिन मुंबई के बल्लेबाज सरफराज भी हैं जिन्होंने पिछले कुछ सीजन टीम का दरवाजा खटखटाया है। 37 प्रथम श्रेणी मैचों में, दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 79.65 की शानदार औसत से 3505 रन बनाए हैं। बस उनका भारी शरीर सिलेक्टरों को पसंद नहीं है।
अपने 46वें टेस्ट में खेलते हुए, राहुल ने 34.07 की औसत से सात शतकों के साथ 2624 रन बनाए हैं। वे टीम में ग्लैमर लेकर आते हैं लेकिन उन्होंने अपने दोस्त हार्दिक पांड्या जैसी तरक्की करने का दम नहीं दिखाय है। हार्दिक अल्हड़पन से ऊपर उठकर भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सफेद गेंद खिलाड़ी बन चुके हैं लेकिन राहुल किसी एक फॉर्मेट के भी बेस्ट बल्लेबाज बनने के भी लायक नहीं हैं। प्रसाद ने कहा, दुख तो ये है राहुल को उप-कप्तान बना दिया गया। अश्विन के पास क्रिकेट के लिए तेज दिमाग है उनको उप-कप्तान होना चाहिए था। वर्ना पुजारा या जडेजा को ये भूमिका सौंपते। राहुल से अच्छे तो मयंक अग्रवाल और हनुमा विहारी हैं।

लोग सच नहीं बोलना चाहते हैं
प्रसाद ने आगे कहा, राहुल का चयन प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि पक्षपात के आधार पर हुआ है। उन्होंने 8 साल से ना क्षमता दिखाई ना ही कंसिस्टेंसी। इस तरह के पक्षपात को देखने के बावजूद कई पूर्व क्रिकेटरों ने मुंह नहीं खोला क्योंकि उनको आईपीएल के शो से बाहर होने का खतरा लगता है। वे किसी फ्रैंचाइजी के कप्तान के बारे में गलत बात नहीं कहना चाहेंगे, क्योंकि आज के युग में ज्यादातर लोग हां में हां मिलाने वाले और अंधे लोगों को पसंद करते हैं। अक्सर शुभचिंतक ही आपके सबसे अच्छे आलोचक होते हैं लेकिन समय बदल गया है और लोग सच नहीं बोलना चाहते हैं।"
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