मैच में दिखा हाईवोल्टेज ड्रामा, अंपायर के विवादित फैसले पर भड़के उस्मान ख्वाजा, जानिए पूरा मामला
अक्सर क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी अंपायर के फैसले से नाखुश दिखते हैं, लेकिन वो चाहकर भी अंपायर से पंगा नहीं ले सकते और अगर कोई प्लेयर ऐसा करता है तो उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, लेकिन इन सबके बावजूद भी कई मौकों पर खिलाड़ियों को अंपायर से भिड़ते हुए देखा गया है। हाल ही में पाकिस्तान मूल के ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी उस्मान ख्वाजा को ऐसा करते हुए देखा गया है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में चल रही शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के एक मुकाबले में उस्मान ख्वाजा अंपायर के फैसले से नाखुश दिखे, जिसके बाद वो अंपायर से भिड़ गए।

क्या है पूरा मामला?
शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के एक मैच में क्वीसलैंड का मुकाबला NSW से था। इस मैच में विवाद उस वक्त पैदा हो गया, जब फील्ड अंपायरों ने खराब रोशनी के कारण मैच को रोकने का फैसला किया। आपको बता दें कि जिस वक्त अंपायरों ने मैच को रोकने का फैसला किया उस वक्त क्वीसलैंड को जीत के लिए पांच ओवर में 26 रनों की जरूरत थी, लेकिन अंपायर के फैसले ने मैच को ड्रॉ कर दिया, जिसकी वजह से क्वीसलैंड के हाथों से फिसल गया।
जीत के लिए आखिर में चाहिए थे 16 रन
सिडनी के ड्रमॉयने ओवल केग्राउंड पर खेला गया यह मैच अंपायर के फैसले के बाद ड्रॉ घोषित कर दिया गया। अंपायर के फैसले से पहले क्वीसलैंड को जीत के लिए 5 ओवर में महज 26 रन चाहिए थे, जो कि मात्र एक औपचारिकता थी। क्वींसलैंड के बल्लेबाज जो बर्न्स और मैट रेनशॉ ने पहले दो ओवर में 10 रन बना भी लिए थे, जिसके बाद जीत के लिए सिर्फ 16 रन चाहिए थे, लेकिन तभी अंपायर का मैच में दखल हुआ और ऐसा हुआ कि मैच में विवाद हो गया।
उस्मान ख्वाजा को आया गुस्सा
अंपायरों ने शाम के करीब 6 बजक 34 मिनट पर लाइट रीडिंग चेक करने के बाद खिलाड़ियों को मैदान से हटाने और खेल रोकने का फैसला किया गया। अंपायर के फैसले पर क्वीसलैंड के कप्तान उस्मान ख्वाजा भड़क उठे। उन्होंने अंपायरों से पूछा कि जब बल्लेबाजों को दिक्कत नहीं है तो फिर वो क्यों खेल को रोका जा रहा है। क्वीसलैंड के बल्लेबाज जो बर्न्स और रेनशॉ भी ग्राउंड से जाने को तैयार नहीं थे। मैदान पर काफी देर तक बहसबाजी देखने को मिली, लेकिन आखिर में अंपायरों का फैसला ही कायम रहा। अंत में अंपायर ने बेल्स को गिरा दिया और मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया। क्वीसलैंड के खिलाड़ियों ने बाद में इस फैसले को निराशाजनक बनाया।












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