आंसुओं से लिखा जीत का इतिहास, रिंकू ने पिता तो किशन ने खोया बहन, जश्न के पीछे छिपा था खिलाड़ियों दर्द!
T20 World Cup Rinku Singh: भारतीय टीम ने इतिहास रचते हुए तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। इस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन दमदार रहा। जब रविवार को पूरा भारत जश्न में डूबा था, तब ड्रेसिंग रूम के दो हीरो ईशान किशन और रिंकू सिंह अपने भीतर दुखों का पहाड़ दबाए बैठे थे। इन दोनों खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि एक एथलीट के लिए तिरंगे की मान और फर्ज के आगे कुछ भी बड़ा नहीं होता है।
फाइनल में चला किशन का बल्ला (T20 World Cup Rinku Singh)
फाइनल मुकाबले में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ जब भारत को एक आक्रामक शुरुआत की ज़रूरत थी। तब ईशान किशन ने 25 गेंदों में 54 रनों की तूफानी पारी खेली। लेकिन इस पारी के पीछे का सच बेहद दर्दनाक था। ईशान ने खुलासा किया कि फाइनल से कुछ ही दिन पहले एक सड़क हादसे में उनकी चचेरी बहन का निधन हो गया था।

ईशान ने बहन को समर्पित की जीत
ईशान ने भावुक होकर बताया कि ईमानदारी से कहूं तो मैं कल अच्छा महसूस नहीं कर रहा था, लेकिन वह हमेशा चाहती थी कि मैं बड़े रन बनाऊं। इसलिए मैंने अपनी भावनाओं को खेल से ऊपर रखने के बजाय उनके लिए रन बनाने का फैसला किया। टूर्नामेंट में 317 रन बनाने वाले ईशान ने अर्धशतक पूरा करने के बाद आसमान की ओर देखकर अपनी बहन को जीत समर्पित की।
रिंकू सिंह- पिता का सपना और सूनी आंखें
वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से आने वाले रिंकू सिंह के लिए यह वर्ल्ड कप आंसुओं की परीक्षा जैसा था। टूर्नामेंट के बीच में ही रिंकू के पिता, खानचंद सिंह का स्टेज-4 कैंसर से निधन हो गया। रिंकू को सुपर-8 के दौरान घर जाना पड़ा, लेकिन पिता की 'सीख फर्ज सबसे पहले है' को याद करते हुए वे जल्द ही टीम से दोबारा जुड़ गए।
रिंकू ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश में लिखा कि आपने सिखाया था कि फर्ज सबसे आगे है... तो फील्ड पर बस आपका सपना पूरा करने की कोशिश कर रहा था। अब आपका सपना पूरा हो गया है, काश आप पास होते।












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