Ben Stokes ने कहा था, “धोनी में जीत की ललक नहीं थी, अब एक साथ खेलते नजर आएंगे

बेन स्टोक्स ने अपनी किताब ‘ऑन फायर’ में 2019 के विश्वकप मैचों का संस्मरण लिखा था। भारत बनाम इग्लैंड के मुकाबले में स्टोक्स ने रोहित शर्मा, विराट कोहली और महेन्द्र सिंह धोनी के खेल पर सवाल उठाया था।

Ben Stokes

IPL-2023 में महेन्द्र सिंह धोनी और बेन स्टोक्स एक साथ चेन्नई के लिए खेलते नजर आएंगे। दोनों ही क्रिकेट के महारथी हैं। क्या ये दोनों मिल कर एक बड़ा धमाका करेंगे या फिर इनके खेल पर 2019 के विवाद का असर पड़ेगा ? बेन स्टोक्स ने अपनी किताब 'ऑन फायर' में 2019 के विश्वकप मैचों का संस्मरण लिखा था। भारत बनाम इग्लैंड के मुकाबले में स्टोक्स ने रोहित शर्मा, विराट कोहली और महेन्द्र सिंह धोनी के खेल पर सवाल उठाया था। बाद में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सिकंदर बख्त ने स्टोक्स के हवाले से कहा दिया कि भारत, इंग्लैंड से जानबूझ कर हारा था ताकि पाकिस्तान सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सके। हालांकि स्टोक्स ने अपनी किताब में ऐसी को कोई बात नहीं लिखी थी। हां, उन्होंने भारत के 'बैटिंग इंटेंट' पर जरूर सवाल खड़ा किया था। लेकिन सिंकदर बख्त ने बात का बतंगड़ बना दिया था।

'ऑन फायर' में रोहित, कोहली, धोनी के खेल पर सवाल

बेन स्टोक्स के मुताबिक, भारत 338 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहा था। इस बड़े टारगेट को पाने के लिए तेज बल्लेबाजी की जरूरत थी। लेकिन रोहित शर्मा और विराट कोहली ने 138 रनों के की साझेदारी के लिए 27 ओवर खर्च कर दिये। इन दोनों की बल्लेबाजी रहस्यमय लग रही थी। इनकी वजह से भारत मैच में पीछे हो गया। धोनी का रवैया और भी हैरान कर देने वाला था। धोनी जब क्रीज पर आये तब भारत को 11 ओवर में जीत के लिए 112 रन चाहिए थे। लेकिन धोनी तेज खेलने की बजाय एक या दो रनों से स्कोर आगे बढ़ा रहे थे। बाउंड़्री मारने की जगह वे सिंगल-डबल ले रहे थे। अंतिम दो ओवरों में भी भारत कुछ बड़ा कर के जीत सकता था। उसे 12 गेंदों में 51 रन चाहिए थे। धोनी और केदार जाधव क्रीज पर थे। लेकिन इन दोनों में जीत की ललक बिल्कुल नहीं दिखी। 49 ओवर में केवल 7 बने और मैच भारत के हाथ से फिसल गया। आखिरी ओवर में धोनी ने छक्का और केदार जाधव ने चौका मारा तब तक भारत की हार तय हो चुकी थी। भारत 31 रनों से यह मैच हार गया था।

स्टोक्स का अतिशयोक्तिपूर्ण लेखन

बेन स्टोक्स की यह राय अतिशयोक्तिपूर्ण थी। जब कसी हुई गेंदबाजी हो रही हो तब बड़े लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं होता। 338 के टारगेट को हासिल करने के लिए भारत ने शुरू में संभल कर बल्लेबाजी की। शुरू में विकेट बचाये रखना था। रोहित शर्मा ने 109 गेदों पर 102 रन और कोहली ने 76 गेंदों पर 66 रन बनाये थे। जब रोहित आउट हुए तब भारत का स्कोर था 3 विकेट पर 198 रन। 36.1 ओवर का खेल हो चुका था। इसके बाद भारत को तेज खेलना था। ऋषभ पंत और हार्दिक पांड्या ने तेजी से रन बनाने शुरू किये। लेकिन दुर्भाग्य से दोनों बड़ी पारी नहीं खेल सके। ये दिन उनका नहीं था। पंत 29 गेंदों में 32 और हार्दिक 33 गेंदों में 45 रन बना कर आउट हो गये। इसी मोड़ पर भारत की रणनीति फेल हो गयी। इसका श्रेय इंग्लैंड के तेज गेंदबाज लियाम प्लंकेट को जाता है। इन दोनों का विकेट उन्हीं ने लिया था। हमेशा बल्लेबाज ही मैच को नहीं मोड़ता, गेंदबाज भी जीत के नायक बनते हैं।

हीरो होने का घमंड

स्टोक्स लिखते हैं, अगर भारत ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की होती तो यह मैच जीत सकता था। धोनी 31 गेंदों में 42 रन बना कर नाबाद रहे। वे जीतने के लिए नहीं बल्कि रेन रेट मेंटेन रखने के लिए खेल रहे थे। स्टोक्स ने रोहित, कोहली और धोनी के बारे में जो कुछ भी लिखा वह अखरने वाली बात थी। चूंकि 2019 का विश्वकप इंग्लैंड जीत गया था और जीत के हीरो स्टोक्स ही थे, इसलिए उनमें घमंड आ गया था। ये एकतरपा बात थी। जिस 49वें ओवर में सिर्फ 7 रन बनने की बात स्टोक्स कर रहे थे, उसे जोफ्रा आर्चर ने फेंका था। जिस जोफ्रा आर्चर की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी क्या उनकी गेंदों पर चार -पांच छक्के लग सकते थे ? जरूरी रेन रेट के हिसाब से इस ओवर में भारत को 25-26 रन बनाने थे। स्टोक्स बेवजह इसे मुमकिन बता रहे थे। इस मैच में जोफ्रा आर्चर को कोई विकेट तो नहीं मिला था लेकिन 10 ओवरों में केवल 45 रन दिये थे।

पहले धोनी की प्रशंसा फिर कमिटमेंट पर सवाल

बेन स्टोक्स के इस नजरिये पर पूर्व तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग ने कहा था, लोग सुर्खियां बटोरने के लिए कुछ भी लिख देते हैं। स्टोक्स ने धोनी की प्रतिबद्धता पर जो सवाल उठाया, वह गलत है। मैच के दौरान मैंने धोनी का चेहरा देखा था जिससे झलक रहा था कि वे जीतना चाहते थे। लेकिन हमेशा आप सफल नहीं हो सकते। क्या स्टोक्स ने अपनी किताब को हिट कराने के लिए ऐसी विवादास्पद बातें लिखीं थीं ? 2017 में जब स्टोक्स पुणे सुपरजाइंट्स से जुड़े थे तब उन्होंने कहा था, महेन्द्र सिंह धोनी मैदान पर शांति के प्रतीक हैं और सबको साथ लेकर चलते हैं। खेल के प्रति उनका समर्पण लाजवाब है। बाद में उन्होंने अपनी किताब में धोनी के कमिटमेंट पर सवालिया निशान लगा दिया। वैसे ये बात अब पुरानी हो गयी है। स्टोक्स भी मानसिक स्वास्थ्य लाभ के बाद आगे बढ़ चुके हैं। आशा है 2023 के आपीएल में वे धोनी के साथ एक नयी शुरुआत करेंगे।

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