T-20 की टक्कर : जब भारत की तेज गेंदबाजी की आंधी में उड़ गया था दक्षिण अफ्रीका
नई दिल्ली, 06 जून। महान कपिलदेव ने भारत में तेज गेंदबाजी के एक नये की शुरुआत की थी। उस समय भारत में स्पिनरों की मददगार पिच ही तैयार होती थी। लेकिन कपिल ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से ऐसी ही पिचों पर तेज गेंदबाजी के गुर सीखे और दुनिया में बड़ा मुकाम बनाया। एक समय वे विश्व में सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। उनके बाद भारत में कई तेज गेंदबाज उभरे। भारत में तेज गेंदबाजों की एक नयी जमात आ चुकी थी। लेकिन दुनिया उनकी रफ्तार और स्विंग का लोहा मानने को तैयार नहीं थी।

उस समय दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों का बड़ा जलवा था। 2007 का टी-20 विश्वकप दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। दक्षिण अफ्रीका की टीम इस प्रतियोगिता में अभी तक अपराजित थी। उसका एक अहम मुकाबला भारत से था। अगर दक्षिण अफ्रीका ये मैच जीत जाता तो वह सेमीफाइनल में पहुंच जाता। लेकिन इस मैच में भारत ने ऐसी तूफानी गेंदबाजी का प्रदर्शन किया कि सितारों से सजी दक्षिण अफ्रीका की टीम थर्रा उठी। उसकी मजबूत बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गयी। भारत ने अपनी तेज गेंदबाजी के दम पर ये मुकाबला शान से जीता और दक्षिण अफ्रीका को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। भारत के इस यादगार लम्हे को याद करना जरूरी है।

दुनिया पहली बार देखी थी ‘रो-हिट मैन’ की झलक
ये मैच सितम्बर 2007 को डरबन में खेला गया था। टी-20 विश्वकप का ये 24 वां मैच था। ये मैच रोहित शर्मा के लिए भी यादगार है। इसी प्रतियोगिता में रोहित ने डेब्यू किया था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही रोहित ने आतिशी पारी खेल कर विश्व क्रिकेट में अपनी धमक का आगाज किया था। कप्तान धोनी ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। पिच पर घास थी और गेंद असामान्य तरीके से बाउंस कर रही थी। उस समय दक्षिण अफ्रीका में शॉन पोलॉक, मखाया नतिनी, मोर्ने मोर्कल, एबी मोर्कल, वेर्नन फिलेंडर जैसे घातक तेज गेंदबाज थे। पोलॉक और नतिनी ने शुरुआती ओवरों में ही कहर बरपा दिया। 33 रन पर भारत के तीन विकेट गिर गये। सहवाग, गंभीर और दिनेश कार्तिक पवेलियन लौट चुके थे। भारत की नैया भंवर में थी। संकट की इस घड़ी में रोहित शर्मा और महेन्द्र सिंह धोनी ने मोर्चा संभाला। रोहित ने स्ट्रोक प्ले का शानदार नमूना पेश किया। उन्होंने तेज गेंदबाजों पर जोरदार हमला बोला और अपने हिटमैन होने की झलक दिखा दी। रोहित और धोनी के बीच 85 रन की साझेदारी हुई और भारत मैच में वापस आ गया। भारत का स्कोर 146 था और 20 वां ओवर चल रहा था। अभी दो गेंद बाकी थी कि धोनी 45 के स्कोर पर रन आउट हो गये। रोहित ने अंतिम गेंद पर छक्का जड़ कर अपनी हारफ सेंचुरी पूरी की। भारत का स्कोर पहुंचा पांच विकेट के नुकसान पर 153 रन। रोहित ने 40 गेंदों में 7 चौकों और दो छक्कों की मदद से 50 रन बनाये। इस पिच पर घास होने की वजह से नमी थी जिससे तेज गेंदबाजों को भरपूर मदद मिल रही थी। लेकिन रोहित औऱ धोनी ने दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों का डट कर सामना किया।

भारत की तेज गेंदबाजी
उस समय दक्षिण अफ्रीकी टीम में हर्शल गिब्स, ग्रीम स्मिथ, एबी डिविलियर्स, जस्टिन कैंप, मार्क बाउचर जैसे विध्वंसक बल्लेबाज थे। ये किसी भी गेंदबाज का हुलिया बिगाड़ सकते थे। फिर शॉन पोलॉक और एबी मोर्केल जैसे दिग्गज ऑलराउंडर भी थे। नम्बर आठ तक ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का विकल्प था। ऊपर से टीम को घरेलू दर्शकों का समर्थन हासिल था। दक्षिण अफ्रीका के प्रशंसक यही मान रहे थे कि उनकी टीम 154 का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लेगी। लेकिन उस दिन तो भारत के तेज गेंदबाजों ने कुछ और ही सोच रखा था। जवागल श्रीनाथ, रुद्र प्रताप सिंह (आर पी सिंह), जोगिंदर शर्मा, और इरफान पठान तेज गेंदबाजी का मोर्चा संभाल रहे थे। स्पिन गेंदबाजी की के लिए दिग्गज हरभजन सिंह मौजूद थे। उस समय श्रीनाथ और आर पी सिंह भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज थे। श्रीनाथ ने 1999 के विश्वकप में 154.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। श्रीनाथ गति के साथ सटीक गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे। आरपी सिंह की गति भी 147 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास थी। वे बाएं हाथ के गेंदबाज थे जो स्विंग गेंदबाजी के लिए मशहूर थे। इरफान पठान भी बाएं हाथ के तेज गेंदबाज थे जो गति के साथ स्विंग कराते थे। जोगिंदर शर्मा भारत की नयी खोज थे। वे मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे जो दो गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराते थे। 2004-05 की रणजी ट्रॉफी में उन्होंने गेंद और बल्ले से शानदार खेल दिखाया था।

भारतीय तेज गेंदबाजों की आंधी में उड़ गया दक्षिण अफ्रीका
इस मैच के आर पी सिंह ने अपनी तेज गेंदबाजी से दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी को तहस नहस कर दिया। उन्होंने दूसरे ओवर की पहली ही गेंद पर गिब्स को आउट कर दिया। 11 रन पर पहला विकेट गिरा। स्कोर में एक ही रन का इजाफा हुआ था कि आरपी सिंह ने कप्तान ग्रीम स्मिथ को भी पवेलियन भेज दिया। अब बारी श्रीनाथ की थी। उन्होंने टी-20 के धाकड़ बल्लेबाज एबी डिविलियर्स को पगबाधा आउट कर दक्षिण अफ्रीकी खेमे में हलचल मचा दी। 12 रन पर तीन विकेट गिर चुके थे। दक्षिण अफ्रीका हताश था। मार्क बाउचर और एल्बी मोर्केल ने पारी संभालने की कोशिश की लेकिन श्रीनाथ और आरपी सिंह के सामने उनकी एक न चली। दोनों 36, 36 रन बना कर पवेलियन लौट गये। आरपी सिंह ने अपनी तेज गेंदों से कहर बरपा दिया। चार ओवर में सिर्फ 13 रन दे कर 4 विकेट लिये। श्रीनाथ ने उनका बखूबी साथ दिया। उन्होंने 4 ओवर में 23 रन दे कर 2 विकेट लिये। इरफान पठान ने चार ओवरों में सिर्फ 16 रन दिये। हालंकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। जोगिंदर शर्मा के चार ओवर में 24 रन ही बने। हरभजन सिंह ने 4 ओवर में 31 रन देकर 2 विकेट लिये। भारत की इस शानदार गेंदबाजी के कारण दक्षिण अफ्रीका की बैटिंग बालू के भीत की तरह ढह गयी। वह 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 116 रन ही बना सका। भारत ने शान के साथ यह मुकाबला 37 रन से जीत लिया।
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